BPSC Candidates पर लाठीचार्ज की विपक्ष ने की निंदा, Tejashwi ने सरकार को घेरा
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई की विपक्ष ने मंगलवार को निंदा की और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर छात्रों के प्रति ‘तानाशाही रवैया’ अपनाने का आरोप लगाया। बीपीएससी परीक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस से भिड़ गए। प्रदर्शनकारियों द्वारा अवरोधक तोड़ने और पथराव किए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार की तथा कथित तौर पर लाठीचार्ज भी किया।
इस दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। कुछ प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल भी हुए। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को लेकर विपक्ष के दबाव और सरकार की आलोचना के बावजूद सरकार ‘‘गोली चलाना तो बंद कर सकती है, लेकिन लाठीचार्ज नहीं छोड़ेगी।’’ उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, नौकरी और शिक्षा की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे छात्रों और युवाओं से सरकार संवाद नहीं करेगी।
इसके बजाय अहंकारी अधिकारियों से उनका अपमान करवाएगी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस से बेरहमी से लाठीचार्ज कराएगी।’’ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी ने आरोप लगाया कि छात्रों के प्रति सरकार का ‘‘तानाशाही रवैया’’ जारी है। उन्होंने कहा कि बिहार का युवा बल प्रयोग से डरने वाला नहीं है। कांग्रेस की बिहार इकाई के अध्यक्ष राजेश राम ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे ‘‘शर्मनाक और निंदनीय’’ बताया।
उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) पहुंचकर पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों से मुलाकात की। राम ने कहा कि अपने अधिकारों, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाने वाले छात्रों के साथ लाठी और दमन से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए। उन्होंने घायल छात्रों के समुचित इलाज, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच तथा प्रदर्शनकारी बीपीएससी अभ्यर्थियों के साथ तत्काल वार्ता कर उनकी शिकायतों का समाधान करने की मांग की।
Ayodhya Ram Mandir चढ़ावा चोरी मामले में गलत BNS धाराएं लगीं: कोर्ट में वकील का दावा
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपियों की ओर से पेश वकील ने मंगलवार को विशेष अदालत में दावा किया कि पुलिस ने मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गलत धाराओं के तहत की है। आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह ने कहा कि मामले में चोरी और गबन, दोनों की धाराएं लगाई गई हैं, जबकि ये दोनों धाराएं एक साथ लागू नहीं हो सकतीं। सिंह ने अयोध्या के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत में यह दलील दी।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कथित चोरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए।
सिंह ने कहा, ‘‘मैंने अदालत के समक्ष दलील दी कि चोरी और गबन, दोनों की धाराएं लगाई गई हैं। ये दोनों धाराएं एक साथ लागू नहीं हो सकतीं। आरोपियों के खिलाफ आजीवन कारावास वाली धाराएं भी लगाई गई हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वहीं, उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि आजीवन कारावास वाली धारा तभी लगाई जा सकती है, जब आरोपी आदतन अपराधी हो या उसे पहले किसी अपराध में सजा मिल चुकी हो।
इस मामले में आरोपी पहली बार अपराध के आरोपी हैं, इसलिए आजीवन कारावास वाली धारा लागू नहीं होती।’’ सिंह ने यह भी दलील दी कि पुलिस ने आरोपियों को लोक सेवक के रूप में पेश किया है, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट लोक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लगाई गई धाराओं में आरोपियों को लोक सेवक बताया और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर पुलिस ने सही धाराएं लगाई होतीं तो मेरे मुवक्किलों को स्थानीय अदालत से जमानत मिल सकती थी।’’ सिंह ने बताया कि अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख तय की है।
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