पूजा में क्यों चढ़ाई जाती है दूर्वा घास? जानें भगवान गणेश से जुड़ी इसकी खास कथा और महत्व
Durva ghas puja mahatva: हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास अर्पित करने की परंपरा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि दूर्वा के बिना भगवान गणेश की पूजा अधूरी रहती है, और उन्हें प्रसन्न करने के लिए दूर्वा चढ़ाना सबसे प्रिय भोग माना जाता है। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी सहित हर बुधवार को गणपति बप्पा की पूजा में दूर्वा जरूर चढ़ाई जाती है।
दूर्वा से जुड़ी पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों में एक प्रचलित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नामक एक राक्षस ने संपूर्ण सृष्टि में उत्पात मचा रखा था और वह देवताओं व ऋषि-मुनियों को निगलता जा रहा था। सभी देवता भयभीत होकर भगवान गणेश के पास सहायता मांगने पहुंचे। भगवान गणेश ने उस राक्षस को निगल लिया, जिसके बाद उनके पेट में अत्यधिक जलन होने लगी।
मान्यता है कि तब कश्यप ऋषि ने भगवान गणेश को दूर्वा घास खिलाई, जिससे उनके पेट की जलन तुरंत शांत हो गई। इसी घटना के बाद से भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय हो गई, और तभी से उनकी पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
दूर्वा चढ़ाने का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि नियमित रूप से भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इसके अलावा दूर्वा को दीर्घायु और स्थिरता का भी प्रतीक माना जाता है, क्योंकि यह घास आसानी से नष्ट नहीं होती और तेजी से फिर से उग आती है। यही वजह है कि दूर्वा चढ़ाने को समृद्धि और दीर्घायु की कामना से भी जोड़कर देखा जाता है।
दूर्वा चढ़ाने का सही नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भगवान गणेश को दूर्वा हमेशा जोड़ी यानी दो या इक्कीस की संख्या में चढ़ानी चाहिए, क्योंकि विषम संख्या में दूर्वा अर्पित करना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा दूर्वा को हमेशा ताजा और हरी-भरी अवस्था में ही चढ़ाना चाहिए, सूखी या मुरझाई हुई दूर्वा का इस्तेमाल पूजा में वर्जित माना जाता है।
यह भी मान्यता है कि दूर्वा चढ़ाते समय "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करना विशेष रूप से फलदायी होता है, जिससे भगवान गणेश की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
दूर्वा के औषधीय गुणों का भी है महत्व
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ दूर्वा घास को आयुर्वेद में भी अत्यंत गुणकारी माना जाता है। कहा जाता है कि दूर्वा में शीतलता प्रदान करने और घाव भरने जैसे औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिस वजह से प्राचीन काल से ही इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के उपचार में किया जाता रहा है।
आज भी हर बुधवार को चढ़ाई जाती है दूर्वा
समय के साथ भले ही पूजा-पाठ के तरीकों में कुछ बदलाव आया हो, लेकिन भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने की यह परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। आज भी हर बुधवार और गणेश चतुर्थी के अवसर पर लाखों भक्त गणपति बप्पा को दूर्वा चढ़ाकर उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान से सलाह अवश्य लें।
Mangla Gauri Vrat 2026: आज जरूर करें ये 5 उपाय, दांपत्य जीवन में बढ़ेगा प्रेम और मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद!
सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन के सोमवार जहां महादेव को समर्पित होते हैं, वहीं मंगलवार का दिन माता गौरी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इसी वजह से सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। 18 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा और कुछ विशेष उपाय करने से अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और परिवार में खुशहाली की कामना की जाती है।
माता गौरी को अर्पित करें सुहाग की सामग्री
मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं माता पार्वती की पूजा करते समय सुहाग की सामग्री अर्पित कर सकती हैं। इसमें सिंदूर, कुमकुम, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और लाल चुनरी शामिल हैं। पूजा के बाद माता गौरी से पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें।
लाल फूल और मिठाई का लगाएं भोग
माता पार्वती की पूजा में लाल रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही पूजा में गुड़, फल और मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से माता गौरी प्रसन्न होती हैं और परिवार में सुख-शांति का आशीर्वाद देती हैं।
पति-पत्नी साथ करें शिव-पार्वती की पूजा
अगर संभव हो तो इस दिन पति-पत्नी को साथ बैठकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें और इसके बाद माता पार्वती की पूजा करें। दोनों मिलकर परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में प्रेम व आपसी समझ बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं।
पति की लंबी उम्र के लिए जलाएं दीपक
मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं माता गौरी के सामने पति के नाम से दीपक जला सकती हैं। दीपक जलाते समय पति की अच्छी सेहत, दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना करें। इसे दांपत्य सुख से जुड़ा एक शुभ उपाय माना जाता है।
सुहागिन महिला को करें सुहाग सामग्री का दान
इस दिन किसी जरूरतमंद सुहागिन महिला को सुहाग की सामग्री दान करना भी शुभ माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी या अन्य सुहाग सामग्री दी जा सकती है। मान्यता है कि इससे सौभाग्य और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।
मंगला गौरी व्रत का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से मंगला गौरी व्रत को दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से माता गौरी की पूजा कर सकती हैं।
नोट: यहां बताए गए उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था और परंपरा के रूप में ही लें।
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