T20 Cricket ही भविष्य, लेकिन Test और ODI को बचाना जरूरी: Chaminda Vaas ने क्रिकेट बोर्ड्स को चेताया
श्रीलंका के पूर्व तेज गेंदबाज चमिंडा वास ने टी20 के बढ़ते चलन और फ्रेंचाइजी आधारित लीग के बढ़ते प्रभाव के बीच टेस्ट और वनडे प्रारूपों को जीवित रखने के लिए संबंधित लोगों से उचित कदम उठाने का आग्रह किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सीईओ संजोग गुप्ता ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि ‘‘प्रतिस्पर्धा के अभाव वाली द्विपक्षीय श्रृंखलाओं का युग समाप्त होना चाहिए।’’ इस बयान ने एकदिवसीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। वास ने पीटीआई से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि भविष्य में अधिकतर देश टी20 खेलना चाहेंगे। टी20 ही भविष्य का खेल है। लेकिन सभी बोर्डों को यह समझना चाहिए कि टेस्ट क्रिकेट और वनडे क्रिकेट ही इस खेल का चरम हैं और उन्हें इन दोनों प्रारूपों को बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए।’’
वनडे में 400 और टेस्ट क्रिकेट में 355 टेस्ट विकेट लेने वाले वास ने सभी क्रिकेट बोर्डों से इन दोनों पारंपरिक प्रारूपों को पुनर्जीवित करने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें 50 ओवर की क्रिकेट को जीवित रखने के लिए किसी न किसी तरह की व्यवस्था करनी होगी। मुझे यकीन है कि इससे कई युवा क्रिकेटर टेस्ट क्रिकेट या 50 ओवर के प्रारूप में खेलने के लिए प्रेरित होंगे।’’ वास ने कहा, ‘‘खासकर अगर टेस्ट क्रिकेट की बात करें तो टेस्ट क्रिकेट खत्म होता जा रहा है। सभी बोर्डों को टेस्ट क्रिकेट को जीवित रखने और युवाओं को इस प्रारूप से परिचित कराने के लिए योजना बनानी चाहिए क्योंकि इसी प्रारूप में आपके कौशल की असली परीक्षा होती है।’’
इस 52 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर ने पिछले दशक में श्रीलंका के टेस्ट क्रिकेट के स्तर में आई गिरावट का उदाहरण देते हुए इसका जिक्र किया। श्रीलंका को हाल में भारत से पहले टेस्ट क्रिकेट मैच में 165 रन से हार का सामना करना पड़ा था। उसे यह हार गॉल में मिली जो कभी उसका गढ़ हुआ करता था। वास ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि भारतीय टीम बहुत अच्छी है। उनके पास एक स्थान के लिए कई विकल्प हैं। वे टेस्ट, टी20 और वनडे में अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं। बीसीसीआई ने बेहतरीन बुनियादी ढांचा तैयार किया है और अपने खिलाड़ियों का ख्याल रखा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर गॉल टेस्ट की बात करें तो उन्होंने बेहतरीन टेस्ट क्रिकेट खेला। उन्होंने तीन बहुत अच्छे स्पिनर उतारे थे और उनके सामने टिकना आसान नहीं था।
हमारे खिलाड़ियों ने कड़ी चुनौती दी। मुझे यकीन है कि दूसरा टेस्ट ज्यादा रोमांचक होगा।’’ लेकिन वास के लिए यह हार एक गहरी समस्या का प्रतीक है क्योंकि श्रीलंका काफी कम टेस्ट मैच खेल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से हमें ज्यादा टेस्ट मैच देखने को नहीं मिलते। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को कुछ करना चाहिए।
अधिक टेस्ट मैच करवाने की कोशिश करनी चाहिए। यह दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद नहीं है।’’ वास ने श्रीलंका के घरेलू क्रिकेट में व्यापक बदलाव का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने घरेलू क्रिकेट के स्वरूप को बदलने की जरूरत है। हमारे पास इतने सारे क्लब हैं। हमें उन क्लबों को प्रोत्साहित करने और अच्छी क्रिकेट खेलने की कोशिश करने की जरूरत है। ’’ वास ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हमें तीन दिवसीय क्रिकेट के बजाय चार दिवसीय क्रिकेट खेलना चाहिए। इससे खिलाड़ियों को टेस्ट क्रिकेट जैसा अनुभव मिलेगा। हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन हमें उन्हें तराशने और अगले स्तर तक पहुंचाने की जरूरत है।
लाठी, पानी की बौछार और अपमानजनक बोल, बिहार में छात्रों के बड़े प्रदर्शन के बीच गरमाई सियासत
BPSC Student Protest News: बिहार में रोजगार, पारदर्शी परीक्षा और शिक्षक बहाली को लेकर छात्रों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर फूट पड़ा है. राजधानी पटना की सड़कों पर जब हजारों की संख्या में बेरोजगार युवा और अभ्यर्थी अपने हक की मांग करने उतरे, तो उनके सामने सुरक्षा बलों की लाठियां और पानी की तेज बौछारें आ गईं. इस घटनाक्रम के बाद राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है. एक तरफ जहां छात्र भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, पदों की संख्या, आरक्षण नियमों और प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर जवाब मांग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाने में जुट गए हैं. टीवी डिबेट्स से लेकर विधानसभा के गलियारों तक, छात्रों के मुद्दे पर भारी घमासान मचा हुआ है.
छात्रों के बुनियादी सवाल और बहाली का विवाद
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे केवल अपने बुनियादी अधिकार और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं. छात्रों का आरोप है कि पिछले कई सालों से लाइब्रेरियन जैसी महत्वपूर्ण बहालियां लटकी पड़ी हैं. बीपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में सीटों के आवंटन और पिछले चरणों में अचानक बढ़े पदों को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है. अभ्यर्थियों का कहना है कि दिव्यांग और संविदा कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की सही तरीके से पहले जांच की जानी चाहिए, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनका हक मिल सके. इसके अलावा साल 2020 में प्रस्तावित नई शिक्षा नीति के पूरी तरह लागू न होने और एकल परीक्षा प्रणाली को लेकर भी युवाओं में गहरा असंतोष है.
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