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Gold Price: 7 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंचा सोना, क्या अभी खरीदारी का सही समय है? जानिए तेजी की वजह

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें करीब 7 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूत तेजी का असर भारत में भी देखने को मिला, जहां एमसीएक्स पर सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की कमजोरी, बॉन्ड यील्ड में गिरावट, ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम इस तेजी की प्रमुख वजह हैं। हालांकि निवेशकों को आने वाले दिनों में कुछ अहम आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखनी होगी।

वैश्विक और घरेलू बाजार में सोने की कीमतें चढ़ीं
कॉमेक्स पर स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.65% बढ़कर 4,333.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। यह 18 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं भारत में MCX स्पॉट गोल्ड 1,47,647 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जबकि अक्टूबर वायदा अनुबंध 0.91% की बढ़त के साथ 1,49,843 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा।

ऑगमोंट बुलियन की 6 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, सोना 4,200 डॉलर (करीब 1.46 लाख रुपये) के स्तर से ऊपर निकल चुका है और यदि तेजी जारी रहती है तो यह 4,500 डॉलर (करीब 1.55 लाख रुपये) तक पहुंच सकता है।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें?

विशेषज्ञों के मुताबिक सोने में तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। आइए जानते हैं। 

  • अमेरिकी डॉलर में कमजोरी, जिससे अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता हुआ।
  • अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट, जिससे बिना ब्याज वाले निवेश के रूप में सोना आकर्षक बना।
  • फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका कम होना, क्योंकि तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव घटा है।
  • अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत में प्रगति, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ी है।
  • रुपये में कमजोरी, जो शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 95.17 पर पहुंच गया। चूंकि भारत अपनी अधिकांश सोने की जरूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए कमजोर रुपया घरेलू बाजार में सोने को और महंगा बनाता है।

निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने की दिशा कुछ अहम घटनाओं पर निर्भर करेगी।

  • अमेरिका के Nonfarm Payrolls (NFP) आंकड़े
  • फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
  • अमेरिका-ईरान और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम
  • डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड

यदि अमेरिकी रोजगार के आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है तो सोने में तेजी जारी रह सकती है। वहीं मजबूत आर्थिक आंकड़े आने पर सोने पर दबाव भी बन सकता है।

(प्रियंका कुमारी)

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Credit Card Tips: क्रेडिट कार्ड का सिर्फ मिनिमम ड्यू भरना क्यों पड़ सकता है महंगा, समझिए पूरा गणित

क्रेडिट कार्ड का बिल आने पर ज्यादातर लोगों के सामने दो रकम दिखाई देती हैं- एक कुल बकाया और दूसरी मिनिमम अमाउंट ड्यू (Minimum Amount Due)। कई बार पैसों की कमी होने पर लोग सिर्फ मिनिमम ड्यू भरकर बाकी रकम अगले महीने के लिए छोड़ देते हैं। इससे तत्काल डिफॉल्ट से तो बचा जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना आपकी वित्तीय स्थिति पर भारी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह विकल्प सिर्फ आपात स्थिति के लिए है, इसे आदत नहीं बनाना चाहिए।

मिनिमम ड्यू भरने से तुरंत नहीं गिरता क्रेडिट स्कोर
अगर आप तय तारीख तक कम से कम मिनिमम ड्यू का भुगतान कर देते हैं, तो आमतौर पर इसे भुगतान चूक नहीं माना जाता। इसलिए एक-दो बार ऐसा करने से आपका क्रेडिट स्कोर तुरंत खराब नहीं होता। यही वजह है कि कई लोग इसे सुरक्षित विकल्प समझ लेते हैं।

असल नुकसान बकाया रकम पर शुरू होता 
मिनिमम ड्यू भरने के बाद बची हुई राशि अगले बिलिंग साइकिल में चली जाती है। इस रकम पर बैंक ऊंची ब्याज दर से ब्याज वसूलते हैं, जो कई अन्य प्रकार के लोन से कहीं अधिक होती है। अगर हर महीने सिर्फ मिनिमम ड्यू भरते रहे तो ब्याज लगातार बढ़ता जाएगा और कर्ज तेजी से बढ़ सकता है।

क्रेडिट यूटिलाइजेशन भी बढ़ाता है जोखिम
बैंक और वित्तीय संस्थान सिर्फ समय पर भुगतान ही नहीं देखते, बल्कि यह भी देखते हैं कि आपने अपनी कुल क्रेडिट लिमिट का कितना हिस्सा इस्तेमाल किया है। यदि लंबे समय तक बकाया राशि ज्यादा रहती है तो क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ जाता है। इससे भविष्य में आपका क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है।

कर्ज चुकाने में लग सकता है लंबा समय
मिनिमम ड्यू का उद्देश्य आपका खाता सक्रिय रखना है, न कि कर्ज जल्दी खत्म करना। हर महीने मूल रकम का छोटा हिस्सा ही चुकता होता है, जबकि ब्याज लगातार जुड़ता रहता है। ऐसे में पूरा बकाया चुकाने में कई महीने या साल भी लग सकते हैं।

कब करें इसका इस्तेमाल

  • मेडिकल इमरजेंसी या अचानक आर्थिक परेशानी में ही मिनिमम ड्यू का विकल्प चुनें।
  • इसे नियमित भुगतान का तरीका न बनाएं।
  • कोशिश करें कि हर महीने पूरा क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुका दें।
  • इससे ब्याज नहीं लगेगा और क्रेडिट प्रोफाइल भी मजबूत बनी रहेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड को उधार लेने का नहीं बल्कि भुगतान का माध्यम मानकर इस्तेमाल करना बेहतर होता है। मिनिमम ड्यू सिर्फ डिफॉल्ट से बचाने का विकल्प है, सस्ता कर्ज नहीं। इसलिए इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाना समझदारी है।

(प्रियंका कुमारी)

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  Sports

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