टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया के सामने वित्तीय दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया ने अपने मालिकाना पक्ष टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर यानी लगभग 12,500 करोड़ रुपये की नई पूंजी मांगने की तैयारी की है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और बातचीत जारी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह मांग एयर इंडिया की ओर से टाटा समूह के नियंत्रण में आने के बाद शेयरधारकों से की गई सबसे बड़ी सार्वजनिक पूंजी मांगों में से एक हो सकती है। वर्ष 2022 में टाटा समूह ने पूर्व सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया का नियंत्रण संभाला था। इसके बाद कंपनी को दोबारा मजबूत बनाने, पुराने विमानों के बेड़े को बदलने, सेवाओं में सुधार करने और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बड़े निवेश की योजना बनाई गई थी।
लेकिन वित्तीय परिणामों ने इस बदलाव की चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है। मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में एयर इंडिया और उसकी किफायती विमानन सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा करीब 2.33 अरब डॉलर रहा। यह पिछले वर्ष के नुकसान के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। सिंगापुर एयरलाइंस की मई में जारी वार्षिक रिपोर्ट में एयर इंडिया समूह का घाटा 3.56 अरब सिंगापुर डॉलर बताया गया था, जो उस समय की विनिमय दर के आधार पर करीब 2.80 अरब डॉलर के बराबर था।
रॉयटर्स से बातचीत करने वाले सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया को धन की जरूरत तत्काल है, हालांकि प्रस्तावित राशि को अलग-अलग चरणों में उपलब्ध कराया जा सकता है। सिंगापुर एयरलाइंस के लिए भी अपनी हिस्सेदारी के अनुसार पूंजी देना जरूरी होगा। कंपनी के पास एयर इंडिया में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सिंगापुर एयरलाइंस ने एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर कंपनी के बदलाव की प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।
गौरतलब है कि एयर इंडिया की आर्थिक मुश्किलें केवल कंपनी के भीतर की समस्याओं तक सीमित नहीं हैं। पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर रोक, पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में आई बाधाएं और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने भी कंपनी के खर्च और संचालन पर दबाव बढ़ाया है।
इसके अलावा, पिछले साल अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे का असर भी कंपनी पर पड़ा है। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी। एयर इंडिया को विमानों की आपूर्ति में देरी और पुराने ढांचे को बदलने जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एयर इंडिया के बदलाव की प्रक्रिया को पूरा होने में करीब एक दशक तक लग सकता है। कंपनी एयरबस और बोइंग से मिलने वाले सैकड़ों विमानों की आपूर्ति को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत कर रही है, ताकि लागत और घाटे पर नियंत्रण पाया जा सके।
सिंगापुर एयरलाइंस की वार्षिक रिपोर्ट में भी एयर इंडिया के सामने मौजूद मुश्किल परिचालन परिस्थितियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता को निवेश के लिए चिंता का संकेत बताया गया था। कंपनी ने हालांकि भारतीय विमानन बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं को देखते हुए एयर इंडिया में अपने निवेश को लेकर प्रतिबद्धता जताई है। ऐसे में प्रस्तावित नई पूंजी एयर इंडिया के लिए अपने लंबे बदलाव अभियान को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को 27 जिलों के कांग्रेस विधायकों के साथ करीब सात घंटे तक बैठक की। सूत्रों ने बताया कि बैठक में विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं, पार्टी संगठन और अधिकारियों के तबादलों पर चर्चा हुई। शिवकुमार ने विधायकों से उनके विधानसभा क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं जैसे पेयजल, बुनियादी ढांचा, आवास, सिंचाई और अन्य विकास कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी।
मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों ने बताया कि शिवकुमार ने विधायकों को भरोसा दिलाया कि धन आवंटन पर फैसला लेने से पहले वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों से चर्चा करके उनकी समस्याओं पर विचार किया जाएगा। शिवकुमार ने विधायकों से पंचायत स्तर पर ‘भारत जोड़ो युवा संघ’ बनाने को प्राथमिकता देने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि वे सक्रिय रूप से काम करें। उन्होंने विधायकों से इन संघों के अध्यक्ष के लिए उपयुक्त लोगों के नाम सुझाने को भी कहा।
सूत्रों के अनुसार शिवकुमार ने विधायकों से कहा, “कई वर्षों के अध्ययन के बाद मैंने यह योजना तैयार की है।”
उन्होंने विधायकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने विधायकों को पंचायत स्तर पर गारंटी समितियों में छह सदस्यों की नियुक्ति करने और पार्टी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा करने की सलाह दी। बैठक में शामिल जिला अध्यक्षों को कांग्रेस पार्टी के कार्यालय बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया।
शिवकुमार ने विधायकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के साथ कोई अन्याय न हो। अधिकारियों के तबादलों के बारे में मुख्यमंत्री ने विधायकों को आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप न करने की सलाह दी। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने विधायकों से कहा, “तबादलों में जातिवाद नहीं होना चाहिए।
पार्टी नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि सामाजिक न्याय का पालन किया जाना चाहिए। इसलिए तबादले करते समय इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।”
सूत्रों ने बताया कि शिवकुमार बुधवार को बेंगलुरु शहरी, बेंगलुरु ग्रामीण और बेंगलुरु दक्षिण जिलों के विधायकों से मुलाकात करेंगे। विधान परिषद के सदस्यों के साथ अलग से बैठक भी होगी।
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