AISA President Neha Bora ने कहा, समाज के विकास के लिए शिक्षा तक सबकी पहुंच जरूरी
(फोटो के साथ) मुंबई, 25 अगस्त ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंगलवार को कहा कि समाज और देशों की प्रगति में शिक्षा एक महत्वपूर्ण कारक है और आबादी के एक बड़े हिस्से को शिक्षा व्यवस्था से बाहर रखना उन्हें पिछड़ेपन की ओर धकेलने के समान है। नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) की ओर से मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में बोरा ने कहा कि मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, साक्षरता, खुशहाली और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे मानकों पर समाजों और देशों की तुलना करने वाले कई अध्ययनों में शिक्षा को प्रगति को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण साझा कारक पाया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘एक साझा कारक शिक्षा है।
अगर आप असमानताओं को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं और समाज के एक बड़े हिस्से को शिक्षा से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं, तो आप यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि आप पीछे ही बने रहें।’’ बोरा ने दावा किया कि वामपंथी दलों को छोड़कर अन्य राजनीतिक दल शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देते। बोरा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जुलाई में दिल्ली में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ 23 दिन की भूख हड़ताल की थी। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी कर रहीं बोरा ने कहा कि देश के पिछड़ने पर सवाल उठाने के साथ-साथ समाज के एक बड़े हिस्से को शिक्षा तक पहुंच से वंचित करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया जाना चाहिए।
आइसा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध छात्र संगठन है। झारखंड में भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भी हिस्सा ले चुकीं बोरा ने कहा कि असमानताओं को कम करने और व्यापक सामाजिक विकास सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा तक समावेशी पहुंच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा लोगों के कल्याण के लिए है और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
बोरा ने कहा, ‘‘सपना एक ऐसे देश का निर्माण करना था जो समानता पर आधारित हो। लोकतंत्र मूल रूप से समानता के बारे में है। हमें उन पूर्वजों का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने इस आदर्श के लिए संघर्ष किया और उनकी दृष्टि को आगे बढ़ाना चाहिए।
समानता एक खूबसूरत चीज है और यह न्यायपूर्ण समाज की नींव है।’’ आइसा अध्यक्ष ने कहा कि आज दिखाई देने वाली समस्याएं वर्षों से पैदा हो रही हैं और शिक्षा का स्थान धीरे-धीरे निजीकरण लेता गया है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यावहारिक समाधानों पर आधारित व्यापक बदलाव की जरूरत पर बल दिया। इस कार्यक्रम में मॉडल रिया अहीर ने भी अपने विचार रखे।
रिया पिछले महीने छात्र प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने से रोकने के लिए मुंबई पुलिस की एक वैन के सामने खड़े होने के बाद देशभर में चर्चा में आई थीं। अहीर ने कहा कि राजनीति हमेशा से उनके जीवन का हिस्सा रही है और वह सामाजिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखती रही हैं। अहीर ने कहा, ‘‘हमारे माता-पिता हमारी आलोचना इसलिए करते हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि हम बेहतर करें।
वे हमारी आलोचना इसलिए करते हैं क्योंकि वे हमसे प्यार करते हैं। इसी तरह सरकार पर सवाल उठाने और उसकी आलोचना करने का यह मतलब नहीं है कि हम अपने देश से प्यार नहीं करते। यह हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है और देश के भविष्य को लेकर हमारी चिंता से पैदा होता है।’’ बोरा और अहीर दोनों ने कहा कि उनके परिवारों की सेना से जुड़ी पृष्ठभूमि ने उन्हें सामुदायिक जीवन के महत्व को समझना सिखाया है।
कश्मीर में ‘‘आजादी’’ के नारों के समर्थन से जुड़े सवाल पर बोरा ने कहा, ‘‘मैं कश्मीरियों की आकांक्षाओं का समर्थन करती हूं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कहती है कि उसके शासन में कश्मीरी खुश हैं।’’ आइसा अध्यक्ष ने युवाओं की आकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की सराहना की।
G Kishan Reddy ने पूछा: क्या New York मेयर से मिलना चाहते थे रेवंत रेड्डी
(फाइल फोटो के साथ जारी) हैदराबाद, 25 अगस्त केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने रेवंत रेड्डी की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा को केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने को लेकर विवाद के बीच मंगलवार को कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी से मिलने की योजना थी या नहीं। किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री के ममदानी से मिलने की इच्छा संबंधी मीडिया खबरों का जिक्र करते हुए न्यूयॉर्क के मेयर पर भारत विरोधी विचार रखने और ‘‘भारत के खिलाफ जहर उगलने’’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘ममदानी ने न्यूयॉर्क में दिवाली जैसे स्थानीय समारोहों पर पाबंदियां लगाई हैं और वह पाकिस्तान का समर्थन करते हैं।’’ किशन रेड्डी ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘वह (ममदानी) मूर्ख व्यक्ति हैं, जिन्होंने भारत के प्रधानमंत्री की तुलना एक आतंकवादी से की थी।
क्या रेवंत रेड्डी ऐसे व्यक्ति से मिलना चाहते थे? रेवंत रेड्डी को बताना चाहिए कि वह उनसे क्यों मिलना चाहते थे।’’ केंद्रीय मंत्री ने राजनीतिक बदले संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्रियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की विदेश यात्रा से जुड़े नियम न तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बनाए हैं और न ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने। उन्होंने दावा किया कि विदेश मंत्रालय ने लंबे समय से लागू मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही काम किया है।
किशन रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस समेत पिछली सरकारों के समय भी मुख्यमंत्रियों की विदेश यात्राओं को मंजूरी नहीं दी गई थी और ऐसे फैसले प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने 2005 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिका यात्रा की अनुमति नहीं दी थी।’’ उन्होंने कहा कि केंद्र ने रेवंत रेड्डी की अमेरिका और ब्रिटेन यात्राओं को पहले मंजूरी दी है। किशन रेड्डी ने कहा कि उन्हें भी अलग-अलग मौकों पर रूस और अन्य देशों की यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई थी।
उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री अपनी विदेश यात्रा की मंजूरी के लिए विदेश मंत्री से मुलाकात करें या इस काम के लिए अधिकारियों को भेजें। हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय लाने के रेवंत रेड्डी के प्रयासों को ‘‘केंद्र द्वारा बाधित करने’’ के आरोपों पर किशन रेड्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले विद्यार्थियों की शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की लंबित राशि जारी करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से विद्यार्थियों के लिए कांग्रेस के चुनावी वादों को लागू करने का आग्रह किया जिनमें शिक्षा के लिए बजट का 15 प्रतिशत आवंटित करना, विद्यार्थियों को पांच लाख रुपये का कार्ड देना, कॉलेज जाने वाली छात्राओं को स्कूटी देना और प्रत्येक मंडल में एक ‘अंतरराष्ट्रीय स्कूल’ खोलना शामिल है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जातिगत जनगणना में ‘तेलंगाना मॉडल’ अपनाने का सुझाव दिया था। किशन रेड्डी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तेलंगाना की कांग्रेस सरकार के जाति आधारित सर्वेक्षण को ‘‘विफल’’ करार दिया। सिकंदराबाद से लोकसभा सदस्य किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि जाति आधारित सर्वेक्षण करने वाले कर्मी हैदराबाद में 20 प्रतिशत घरों तक भी नहीं पहुंचे।
किशन रेड्डी ने राहुल गांधी पर पिछले 12 वर्ष में सरकार की किसी भी पहल का समर्थन नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के प्रति बदले की भावना वाला रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी के कदम देश की विभिन्न व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाने वाले रहे हैं।’’ मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 25 अगस्त को अपनी अमेरिका यात्रा की अनुमति नहीं मिलने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर तीखा हमला किया था। उन्होंने इस फैसले को ‘‘तानाशाहीपूर्ण’’ और राज्य की चार करोड़ जनता का अपमान बताया था।
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