नितिन गडकरी के रिटायरमेंट की अटकलों के बीच अब कार्यलय की ओर से आया बयान; जानिए पूरी सच्चाई
Nitin Gadkari Clarification: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक हालिया बयान ने देश के सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर अचानक हलचल बढ़ा दी. रविवार को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वह अब पहले जितना काम नहीं कर पाते, इसलिए नई पीढ़ी को आगे आकर बड़ी जिम्मेदारियां संभालनी चाहिए. उनके इस बयान का वीडियो सामने आते ही लोगों ने इसे राजनीति से उनके संन्यास के संकेत के रूप में देखना शुरू कर दिया. हालांकि मंगलवार को उनके कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरे मामले पर सफाई दी और राजनीति से संन्यास की सभी अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया.
नागपुर के कार्यक्रम में क्या बोले थे गडकरी
महाराष्ट्र के नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मराठी भाषा में अपनी बात रखी थी. उन्होंने कहा था कि अब उनसे पहले जैसा भारी काम नहीं हो पाता और लोगों को चाहिए कि वे युवाओं को अधिक काम सौंपें. उन्होंने कहा कि अब नए लोग आ रहे हैं और पुराने लोग उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं. गडकरी ने अपने सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और बड़ी भूमिकाएं निभाई हैं.
उन्होंने अपनी पुरानी जीवनशैली का जिक्र करते हुए यह भी बताया कि युवा दिनों में वह काम की व्यस्तता के बीच कुछ भी खा लेते थे और दिन-रात सक्रिय रहते थे. हालांकि कोरोना काल के बाद से उन्होंने अपनी सेहत और दिनचर्या में काफी अनुशासन लाया है. उनका यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल होते ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि क्या गडकरी सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे पीछे हटने का मन बना रहे हैं.
कार्यालय ने दी सफाई, राजनीति से कोई नाता नहीं
सोशल मीडिया और कई टीवी चैनलों पर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए नितिन गडकरी के कार्यालय ने साफ किया कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है. कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि केंद्रीय मंत्री का यह बयान किसी भी तरह से राजनीतिक नहीं था और न ही इसका संबंध उनके राजनीतिक भविष्य से है.
दफ्तर ने स्पष्ट किया कि गडकरी दरअसल अपने द्वारा स्थापित लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के कार्यों और उसकी भविष्य की रूपरेखा को लेकर बात कर रहे थे. यह संगठन आदिवासी इलाकों में एकल विद्यालय चलाता है और शिक्षा व समाज सेवा के क्षेत्र में काम करता है. कार्यक्रम इसी ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया था, जहां गडकरी ने कहा था कि वह अब ट्रस्ट के दैनिक कामकाज में उतना समय नहीं दे पाते, इसलिए युवा कार्यकर्ताओं को आगे आकर जिम्मेदारी संभालनी चाहिए.
ट्रस्ट के भविष्य और नई पीढ़ी की भूमिका पर था जोर
नितिन गडकरी दशकों से इस सामाजिक संगठन से जुड़े रहे हैं. उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों और कार्यकर्ताओं से कहा कि वह अब ट्रस्ट के कामों में खुद को पीछे रखकर नई पीढ़ी को मौका देना चाहते हैं ताकि सामाजिक कार्य निरंतर आगे बढ़ता रहे. उन्होंने वरिष्ठ सदस्यों से भी अपील की कि वे नए लोगों का मार्गदर्शन करें.
गडकरी ने यह उम्मीद जताई कि ट्रस्ट का काम आने वाले समय में इतना मजबूत हो कि महाराष्ट्र का कोई भी आदिवासी गांव शिक्षा और विकास की रोशनी से वंचित न रहे. उनका कहना था कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही इस ट्रस्ट का मूल लक्ष्य है.
अटकलों पर लगा पूर्ण विराम
गडकरी के दफ्तर ने कुछ समाचार चैनलों द्वारा उनके बयान को गलत तरीके से राजनीतिक रंग देने पर नाराजगी भी जताई. बयान में कहा गया कि एक सामाजिक मंच पर कही गई बात को राजनीतिक संन्यास से जोड़ना पूरी तरह अनुचित है.
इस स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद अब उन सभी अफवाहों और कयासों पर विराम लग गया है, जिनमें उनके सक्रिय सार्वजनिक जीवन से हटने की बातें कही जा रही थीं. नितिन गडकरी केंद्रीय मंत्रिमंडल के सबसे सक्रिय और प्रमुख मंत्रियों में से एक हैं और वह अपने मंत्रालय के काम को पूरी ऊर्जा के साथ संभाल रहे हैं. उनके दफ्तर के बयान ने यह साफ कर दिया है कि युवाओं को आगे लाने की उनकी अपील केवल सामाजिक ट्रस्ट के संचालन तक ही सीमित थी.
यह भी पढ़ें: राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर नितिन गडकरी और सीएम योगी समेत कई नेताओं ने दी बधाई
पंजाब के सरकारी स्कूलों पर केजरीवाल का खुला चैलेंज, बोले- 1000-1000 स्कूलों का हो निरीक्षण
पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात और पंजाब के स्कूलों की तुलना करने का खुला चैलेंज दिया है. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के एक-एक हजार सरकारी स्कूलों का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए और जनता व मीडिया के सामने तय किया जाए कि किस राज्य के स्कूल बेहतर स्थिति में हैं.
केजरीवाल ने दावा किया कि पंजाब में सरकार बनने के बाद सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार किया गया है. उनके मुताबिक, राज्य के करीब 19,700 सरकारी स्कूलों में से लगभग 19,200 स्कूलों को बेहतर बनाया जा चुका है, जबकि बाकी करीब 500 स्कूलों में सुधार का काम जारी है.
1000-1000 स्कूलों के निरीक्षण का प्रस्ताव
केजरीवाल ने कहा कि गुजरात में करीब तीन दशक से एक ही राजनीतिक व्यवस्था की सरकार रही है, जबकि पंजाब में मौजूदा सरकार को लगभग साढ़े चार साल हुए हैं. ऐसे में दोनों राज्यों के सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति की तुलना होनी चाहिए.
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि पंजाब के 1,000 और गुजरात के 1,000 सरकारी स्कूलों की सूची तैयार की जाए. इसके बाद मीडिया और जनता की मौजूदगी में इन स्कूलों का निरीक्षण कराया जाए. उनका कहना है कि इससे दावों और आरोपों के बजाय जमीनी हकीकत सामने आ जाएगी.
19,200 स्कूलों में सुधार का दावा
केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में करीब 19,700 सरकारी स्कूल हैं और इनमें से 19,200 को बेहतर बनाने का काम किया जा चुका है. बाकी स्कूलों में भी निर्माण और सुधार कार्य चल रहे हैं.
उनके मुताबिक, आने वाले डेढ़ से दो वर्षों में शेष स्कूलों में भी जरूरी सुधार पूरा करने का लक्ष्य है. उन्होंने दावा किया कि शिक्षा व्यवस्था में किए गए इन बदलावों का असर छात्रों और शिक्षकों के स्तर पर भी दिखाई दे रहा है.
पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को बताया नंबर वन
केजरीवाल ने पंजाब की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को देश में शीर्ष स्थान पर पहुंचने का दावा भी किया. उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट में पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर स्थिति में बताया गया है.
उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2022 में उनकी सरकार सत्ता में आई थी, तब पंजाब शिक्षा के मामले में काफी पीछे था. अब राज्य ने कई राज्यों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है.
पुराने वीडियो पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने सरकारी स्कूलों से जुड़े पुराने वीडियो और तस्वीरों को लेकर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि कुछ ऐसे वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जो वर्ष 2018 के हैं.
उन्होंने कहा कि उस समय राज्य में मौजूदा सरकार नहीं थी. उनके मुताबिक, जिन स्कूलों की पुरानी तस्वीरें दिखाकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें से कई को बाद में सुधार दिया गया है.
शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी
केजरीवाल ने कहा कि पंजाब के स्कूलों में बदलाव केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं हुआ. इसमें शिक्षकों, प्रिंसिपल, अभिभावकों, छात्रों और स्थानीय लोगों की भी भूमिका रही है.
उन्होंने कहा कि स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर लोगों से सुझाव लिए और आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराए.
गलतियां बताएं, सरकार सुधार करेगी
केजरीवाल ने कहा कि स्कूलों को लेकर सरकार की नीयत साफ है. अगर किसी स्कूल में वास्तव में कमी है या कोई गलती सामने आती है तो उसे बताने पर सुधार किया जाएगा.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में एक स्कूल को लेकर शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई की और संबंधित स्कूल के लिए आवश्यक धनराशि जारी की गई.
शिक्षा के मुद्दे पर सियासी बहस तेज
सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर यह विवाद अब राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है. केजरीवाल ने कहा कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति का फैसला आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि जमीनी निरीक्षण और सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए.
उन्होंने एक बार फिर 1,000-1,000 स्कूलों के संयुक्त निरीक्षण का प्रस्ताव दोहराते हुए कहा कि इससे साफ हो जाएगा कि किस राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था वास्तव में बेहतर है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation








.jpg)

