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Ajay Rai ने PM Narendra Modi से की Ethanol Policy की समीक्षा की मांग, चीनी आयात पर सवाल

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित ईंधन नीति की तत्काल समीक्षा करने की मांग की। राय ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि एथनॉल नीति के तहत पेट्रोलियम आयात पर विदेशी मुद्रा की बचत का दावा किया जाता है लेकिन अगर घरेलू चीनी की कमी के कारण चीनी का आयात करना पड़े तो उस पर भी विदेशी मुद्रा खर्च होगी। उन्होंने कहा कि एथनॉल, चीनी उत्पादन, घरेलू कीमतों और आयात से संबंधित वास्तविक आंकड़े जनता के सामने स्पष्ट किए जाने चाहिए।

राय ने अपने पत्र में याद दिलाया कि उन्होंने सात जुलाई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित ईंधन से जुड़े “वैज्ञानिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और उपभोक्ता हित संबंधी प्रश्न” उठाए थे। उन्होंने कहा कि उस पत्र में ई20, ई85 और ई100 ईंधन की नीति की स्वतंत्र समीक्षा करने तथा उसके आर्थिक प्रभाव तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की मांग की गई थी। राय ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी को भी उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण में कथित तौर पर विफल रहने के कारण मंत्रिमंडल से हटाने का आग्रह किया था।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने पत्र में कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मंत्रालय की एथनॉल नीति का प्रमुख तर्क यह रहा है कि इससे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटेगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण 19.24 प्रतिशत तक पहुंच गया था और 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में नीति आगे बढ़ी। राय ने कहा कि इसके बावजूद सरकार को 20 अगस्त को करीब एक दशक में पहली बार 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देनी पड़ी।

उन्होंने कहा, “सीधा सवाल है कि एथनॉल नीति से पेट्रोलियम आयात पर विदेशी मुद्रा की बचत का दावा किया जाता है लेकिन अगर घरेलू चीनी की कमी के कारण चीनी का आयात करना पड़े तो उस पर भी विदेशी मुद्रा खर्च होगी। इसलिए एथनॉल, चीनी उत्पादन, घरेलू कीमतों और आयात इन सभी का वास्तविक लेखा-जोखा जनता के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए।” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब सरकार के एक वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार स्वयं उपभोक्ताओं को विकल्प देने की आवश्यकता बता रहे हैं, तो एथनॉल-मिश्रित ईंधन नीति की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में त्योहारों और पर्वों के शुरू होने से पहले सरकार एथनॉल नीति के साथ-साथ चीनी की कीमतों को लेकर भी कोई ठोस निर्णय लेगी।

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Banke Bihari Temple Management को SC का निर्देश, भक्तों का Donation सीधे खजाने में जाए, 'Golak' चोरी के आरोपों पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि यूपी के वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर को दान में मिलने वाला सारा पैसा - चाहे वह दान पेटी के ज़रिए हो या ऑनलाइन - सीधे मंदिर के खजाने में जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सेवकों या किसी और की तरफ़ से इसमें कोई भी रुकावट डालने को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मैनेजमेंट कमेटी को गड़बड़ियों को रोकने के लिए एक पारदर्शी सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की।

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वकील गोस्वामी ने मंदिर के फंड में गड़बड़ी का आरोप लगाया

सुनवाई के दौरान, वकील एनके गोस्वामी ने आरोप लगाया कि मंदिर के फंड में वित्तीय गड़बड़ी हुई है और करोड़ों रुपये का गबन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में दान की रकम के गबन के आरोपों को गंभीरता से लिया और कहा इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए, और हम निर्देश देते हैं कि दान का एक-एक पैसा दान-पात्रों या मंदिर के ऑनलाइन खजाने में ही जमा होना चाहिए। 'सेवायत' या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इसमें कोई भी बाधा डालने को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। प्रबंधन समिति को मंदिर के खजाने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था लागू करनी होगी। 
सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह की दलीलों पर ध्यान दिया।

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चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह की दलीलों पर ध्यान दिया। उन्होंने मंदिर के कामकाज की देखरेख करने वाली हाई-पावर्ड कमेटी की एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की। सिंह ने तस्वीरें पेश कीं और कहा कि मामले बहुत गंभीर हैं और इसमें तुरंत कार्रवाई की ज़रूरत है। उन्होंने कहा एक वीडियो है। तीन लोग 'गोलक' (पारंपरिक दान पेटी) के सामने खड़े हैं, भक्तों से पैसे इकट्ठा कर रहे हैं और उन्हें अपनी पॉलीथीन की थैलियों में डाल रहे हैं।

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  Sports

धोनी 25% से 18% पर आए, CSK 3% से 5.5% तक... फिर भी क्यों टूट गई बातचीत?

dhoni csk stake deal: एमएस धोनी और चेन्नई सुपर किंग्स के लंबे रिश्ते में दरार की ताजा रिपोर्ट ने सबको हैरान कर दिया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि धोनी फ्रेंचाइजी में हिस्सेदारी खरीदना चाहते थे और इसके लिए भुगतान करने को भी तैयार थे, लेकिन बात नहीं बनी. इस रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि धोनी अगले आईपीएल सीजन में चेन्नई के साथ बने रहेंगे या नहीं, यह भी पक्का नहीं है. Tue, 25 Aug 2026 22:21:20 +0530

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