राजस्थान के जयपुर में विवाद सुलझाने के लिए हुई बैठक के दौरान कथित तौर पर चाकू से किये गये हमले में 22 साल के एक युवक की मौत हो गई और उसका बड़ा भाई घायल हो गया। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान शाकिर के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, घटना विद्याधर नगर इलाके में हुई, जिसके बाद दोनों लोगों को सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शाकिर की इलाज के दौरान मौत हो गई जबकि उसके बड़े भाई कय्यूम (38) का इलाज जारी है। विद्याधर नगर के थानाधिकारी सज्जन कुमार ने बताया कि घटना सोमवार रात की है। उन्होंने बताया कि इससे एक दिन पहले शराब पीने के दौरान दो पक्षों के बीच झगड़ा हुआ था और विवाद सुलझाने के लिए दोनों गुट सोमवार देर रात मंदिर मोड़ के पास मिले थे, जहां यह घटना हुई।
पुलिस ने बताया कि कय्यूम का भट्टा बस्ती के कुछ युवकों के साथ रुपये के लेन-देन को लेकर पुराना विवाद था। पुलिस ने पूछताछ के लिए कुछ युवकों को हिरासत में लिया है जबकि मुख्य आरोपी को ढूंढने के लिए टीमें बनाई गई हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को गिरफ़्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी। उपाध्याय ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित गड़बड़ियों पर रिपोर्ट की थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि वे उपाध्याय को FIR की कॉपी सौंपें। कोर्ट ने उनसे यह भी कहा कि वे FIR को रद्द कराने और दूसरी उचित राहत पाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट जाएं। उपाध्याय ने गाज़ियाबाद पुलिस द्वारा सड़क पर हुई एक कथित मारपीट की घटना (रोड-रेज) के सिलसिले में दर्ज FIR को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। उनकी याचिका के अनुसार, यह FIR इन आरोपों पर दर्ज की गई थी कि उन्होंने सड़क पर हुई मारपीट की घटना के बाद एक व्यक्ति के साथ मारपीट की और उसे धमकाया था। उपाध्याय का आरोप है कि यह मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित था और इसका मकसद उनके स्वतंत्र पत्रकारिता के काम की वजह से उन्हें परेशान और डराना-धमकाना था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि अनुरोध करने के बावजूद उन्हें FIR की कॉपी नहीं दी गई।
पत्रकार ने यह भी दावा किया है कि पुलिस आस-पास के दुकानदारों पर उस समय का CCTV फुटेज डिलीट करने का दबाव डाल रही थी, जब कथित घटना हुई थी। उन्होंने FIR को रद्द करने या फिर जांच को उत्तर प्रदेश पुलिस के अलावा किसी दूसरी एजेंसी को सौंपने की मांग की है। उपाध्याय की यह याचिका अयोध्या में राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने और उसके प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों पर उनकी रिपोर्टिंग के संदर्भ में आई है। मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी उठा है, जहां श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाएं दायर की गई हैं। डोनेशन से जुड़े मामलों पर दायर याचिकाओं में भक्तों से मिले फंड के मैनेजमेंट, अकाउंटिंग और इस्तेमाल को लेकर आरोप लगाए गए हैं और CBI जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई है। साथ ही, इन याचिकाओं में वित्तीय और अन्य संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और उनकी जांच करने की भी मांग की गई है।
उपाध्याय का आरोप है कि उनके खिलाफ दर्ज FIR को इन मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसलिए, उन्होंने सख्त कार्रवाई से सुरक्षा और उत्तर प्रदेश पुलिस से स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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