हिजाब पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद घमासान! Hijab Controversy | Allahabad High Court
उत्तर प्रदेश में हिजाब को लेकर हाई कोर्ट के फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति की मांग वाली छात्रा की याचिका खारिज कर दी। फैसले का यूपी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्वागत किया और स्कूलों में सभी विद्यार्थियों के लिए समान ड्रेस कोड को जरूरी बताया। वहीं, RJD नेता मनोज कुमार झा ने व्यक्तिगत पसंद और अधिकार की बात कही। देखिए हिजाब विवाद पर राजभर और मनोज झा के बीच अलग-अलग राय। #hijabcontroversy #hijabrow #omprakashrajbhar #manojjha #allahabadhighcourt #uttarpradesh #lucknow ------------------------------------------------------------------------------------------------------- "प्रखर राष्ट्रवाद की बुलंद आवाज़" सुदर्शन न्यूज़ चैनल आप देख सकते हैं आपको दिए हुए लिंक पर जाए और सुदर्शन से जुड़े तमाम चैनल जिसमें आप इतिहास, विज्ञान, एजुकेशन, इंटरव्यू और बॉलीवुड़ की जानकारी मिल सकती है। सुदर्शन टैक्नोलॉजी और सुदर्शन डिजिटल पर होने वाले लाइव इंटरव्यू को देखने के लिए सुदर्शन के मैन यूट्यूब चैनल को फॉलो करे। नए चैनल को लेकर आपकी प्रतिक्रिया हमें जरूर दे। "Voice of an intense nationalist" You can see the given links on Sudarshan News Channel and by visiting the link channel related to Sudarshan, you can get information about history, science, education, interviews and Bollywood. To view live interviews with Sudarshan Technology and Sudarshan Digital, follow Sudarshan's main YouTube channel. Please give us your feedback regarding the new channel. #breakingNews #SureshChavhanke #TrendingNews #SudarshanLive #SudarshanNews #HindiNews #Newslive #BindasBol #BindasBolLive #Sudarshan #Hindurastra sudarshan news | sudarshan news live | sudarshan | sudarshan news channel | sudarshan tv | सुदर्शन न्यूज़ | sudarshan channel | sudershan news | सुदर्शन | Breaking | News Hindi | Jihad News | Jihad | Muslim | Hindutuva | Bindas Bol | suresh chavhanke | Jago | Pradosh chavhanke | hindi news | live Skype I.D- SudarshanNews Whatsapp Channel: whatsapp.com/channel/0029Va9FWl8LSmbdEqIsfK2G Facebook: https://www.facebook.com/sudarshantvnews Twitter : https://twitter.com/SudarshanNewsTV Instagram: https://www.instagram.com/Sudarshantvnews/ Join Our Teligram https://t.me/sudarshannewstv Follow on Koo: https://www.kooapp.com/profile/sudarshannewstv Visit Website : www.sudarshannews.com Subscribe YouTube: https://www.youtube.com/c/SudarshanNewsTV बिंदास बोल से जुड़ी तमाम विडियों देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें. https://www.youtube.com/channel/UCNBEfg_PfpSjk8DqiafJJhg संपर्क करें - social@sudarshantv.com व्हाट्स एप - 9540558899 फोन नम्बर - 0120 - 4999900
पूर्व CDS अनिल चौहान बोले- युद्ध और राजनीति अलग नहीं:सरकार को ऑप्शन देना सेना की जिम्मेदारी; ऑपरेशन सिंदूर विदेशों में भी चर्चा का विषय
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सैन्य शक्ति राजनीतिक इच्छा का सीधा विस्तार है। किसी देश के राजनीतिक हित सबसे ऊपर होते हैं और सशस्त्र बल उन हितों की रक्षा करने वाले कई माध्यमों में से एक हैं। उन्होंने कहा- “शुरुआत इस बात से करते हैं कि राजनीति और युद्ध अलग नहीं हैं। क्लॉजविट्ज ने कहा था कि युद्ध दूसरे माध्यमों से राजनीति को आगे बढ़ाना है।” पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात पर चर्चा की। यह आयोजन विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन ने रखा था। इस दौरान पूर्व CDS ने राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक शासन के रिश्ते पर बात की। चौहान बोले- युद्ध और राजनीति अलग नहीं जनरल चौहान ने प्रूशियाई जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की प्रसिद्ध बात का जिक्र किया कि युद्ध दूसरे माध्यमों से राजनीति को आगे बढ़ाने का तरीका है। उन्होंने कहा, “किसी देश के राजनीतिक हित सबसे ऊपर होते हैं और सशस्त्र बल उनकी रक्षा के लिए काम करने वाले माध्यमों में से सिर्फ एक हैं। ऐसे कई माध्यम होते हैं।” प्रूशियाई जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की किताब ‘ऑन वॉर’ (वॉम क्रिगे) आधुनिक पश्चिमी सैन्य सिद्धांत की आधारशिला मानी जाती है। यह किताब उनकी मौत के बाद 1832 में उनकी पत्नी मैरी वॉन ब्रुहल ने प्रकाशित की थी। क्लॉजविट्ज ने नेपोलियन के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया था। सरकार को सैन्य विकल्प देना सेना की जिम्मेदारी जनरल चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में जब सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बल प्रयोग का फैसला करती है, तब सेना की जिम्मेदारी दो तरह की होती है। पूर्व सीडीएस ने कहा कि सरकार जितने सैन्य विकल्प चाहती है, उन्हें तैयार करने के लिए शांतिकाल में उतना ही पैसा रक्षा क्षमताओं को विकसित करने पर खर्च करना होगा। सैन्य नेतृत्व को सरकार को ऐसे विकल्प देने होते हैं, जिन्हें खास रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने कहा, “राजनीतिक लोकतंत्र में जब भी सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए बल प्रयोग का फैसला करती है, तब रक्षा बलों या सेना की भूमिका दो तरह की होती है।” ट्रेनिंग और युद्धाभ्यास से बढ़ते हैं विकल्प जनरल चौहान ने कहा कि सैन्य विकल्पों की संख्या और उनकी गुणवत्ता अचानक तैयार नहीं होती। इसके लिए शांतिकाल में लगातार तैयारी करनी पड़ती है। इसमें कड़ी ट्रेनिंग, युद्धाभ्यास और अलग-अलग संभावित हालात की योजना बनाना शामिल है। उन्होंने कहा, “विकल्प इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि सैन्य नेतृत्व ने किस तरह की ट्रेनिंग दी है, किस तरह के युद्धाभ्यास किए हैं और किन संभावित हालात पर काम किया है। इससे हमारे पास उपलब्ध विकल्पों की संख्या बढ़ती है।” उन्होंने यह भी कहा कि हर सैन्य विकल्प में किसी न किसी तरह का जोखिम होता है। कमांडरों और नेताओं को इस जोखिम और हासिल किए जाने वाले राजनीतिक नतीजे के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। जनरल चौहान ने कहा, “हर विकल्प में एक खास तरह का जोखिम होता है और वह उस राजनीतिक जरूरत को भी पूरा करता है, जिसके लिए उसका इस्तेमाल किया जाना है। इसलिए यह जोखिम और राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के बीच का तालमेल है।” ऑपरेशन सिंदूर का असर अब भी रणनीतिक चर्चा का विषय ऑपरेशन सिंदूर के बड़े सक्रिय अभियान खत्म हुए लगभग 15 महीने हो चुके हैं। जनरल चौहान ने कहा कि इसके बावजूद ऑपरेशन का रणनीतिक असर बना हुआ है और भारत के साथ विदेशों में भी रणनीतिक मामलों के जानकार इस पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “इसे खत्म हुए करीब एक साल और तीन महीने हो चुके हैं। कुछ मायनों में यह अब भी जारी है। सक्रिय अभियानों का बड़ा हिस्सा खत्म हो चुका है, लेकिन यह विषय सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रणनीतिक समुदाय की दिलचस्पी का विषय बना हुआ है।” उन्होंने कहा कि ऐसे ऑपरेशन का आकलन सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें ऑपरेशन से मिली सीख, सामने आई कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदम, आधुनिक युद्ध के बदलते तरीके और दुनिया में बनी अनिश्चितताओं को एक साथ देखना जरूरी है। कमियों और बदलते युद्ध से नई चुनौती पूर्व सीडीएस ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों का भी आकलन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही युद्ध के बदलते तरीके और व्यापक भू-राजनीतिक माहौल को भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा, “इस ऑपरेशन में लोगों ने जो कमियां देखीं, उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए कदम, युद्ध के बदलते तरीके और दुनिया में बनी अनिश्चितताएं मिलकर हम सभी के सामने एक नई तरह की चुनौती खड़ी करती हैं।”
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