बोली के आखिरी दिन छा गया Augmont Enterprises IPO, GMP से मिल रहा 41% मुनाफे का इशारा
Augmont Enterprises IPO: ऑगमोंट एंटरप्राइजेज के IPO ने बोली लगने के आखिरी दिन भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, 25 अगस्त को दोपहर 15:12 बजे तक इस इश्यू को 67.27 गुना सब्सक्राइब किया जा चुका था. निवेशकों की इस IPO पर खास नजर बनी हुई है. तो आइए इस कंपनी के IPO के बारे में विस्तार से जानते हैं.
Augmont Enterprises IPO: सब्सक्रिप्शन स्टेटस
₹825 करोड़ के इस IPO में ऑफर किए गए 7,715,999 शेयरों के मुकाबले 11,66,91,369 शेयरों के लिए बोलियां मिली हैं. नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) की तरफ से सबसे ज्यादा 118.86 गुना डिमांड देखी गई. जबकि रिटेल इन्वेस्टर्स का हिस्सा 29.07 गुना सब्सक्राइब हुआ. यह IPO 21 अगस्त को खुला था और 25 अगस्त को बंद होगा. कंपनी ने इस इश्यू के लिए ₹750-788 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का लक्ष्य ₹620 करोड़ के फ्रेश इश्यू और प्रमोटर कोठारी परिवार द्वारा ₹205 करोड़ तक के ऑफर फॉर सेल के जरिए कुल ₹825 करोड़ जुटाना है.
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Augmont Enterprises IPO GMP: कितना मिल रहा संकेत?
ग्रे मार्केट में भी ऑगमोंट एंटरप्राइजेज के शेयरों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. Investorgain के अनुसार, कंपनी के शेयर ₹325 के GMP पर ट्रेड कर रहे हैं. ₹788 के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर यह आंकड़ा 41.24% के संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत देता है. हालांकि निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि GMP एक अनौपचारिक इंडिकेटर है और लिस्टिंग से पहले इसमें बदलाव हो सकता है. यह किसी भी तरह से वास्तविक लिस्टिंग प्राइस या रिटर्न की गारंटी नहीं देता है.
एंकर इन्वेस्टर्स से जुटाए ₹246.3 करोड़
पब्लिक इश्यू खुलने से पहले कंपनी ने एंकर इन्वेस्टर्स से ₹246.3 करोड़ जुटाए. 20 अगस्त को ऑगमोंट ने 15 इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को ₹788 प्रति शेयर की कीमत पर 31.25 लाख शेयर अलॉट किए. एंकर बुक में नोमुरा और सोसिएट जेनरल जैसे नाम शामिल थे. वहीं, चार घरेलू म्यूचुअल फंड हाउस-HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी, निप्पॉन लाइफ इंडिा एसेट मैनेजमेंट, टाटा एसेट मैनेजमेंट कंपनी और ट्र्स्ट म्यूचुअल फंड की पांच स्कीमों में 13.38 लाख शेयर अलॉट किए गए.
एडेलवाइस लाइफ इंश्योरेंस (Edelweiss Life Insurance Company) को ₹10 करोड़ की कीमत के 1.26 लाख शेयर अलॉट किए गए. एंकर बुक में शामिल अन्य निवेशकों में आशीष कचोलिया की बंगाल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट (Bengal Finance and Investment), गिरिक कैपिटल का गिरिक मल्टीकैप ग्रोथ इक्विटी फंड (Girik Multicap Growth Equity Fund), 360 ONE WAM का टर्नअराउंड अपॉर्चुनिटीज फंड, ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर, जुपिटर फंड मैनेजमेंट और लायन ग्लोबल इन्वेस्टर्स शामिल हैं.
फंड्स का इस्तेमाल किस तरह करेगी कंपनी?
ऑगमोंट एंटरप्राइजेज नए इश्यू से मिली रकम में से ₹465 करोड़ा का इस्तेमाल फ्यूचर वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी. इस पैसे का इस्तेमाल इन्वेंट्री खरीदने और उसके रखरखाव, इन्वेंट्री बढ़ाने और इन्वेंट्री खरीदने के लिए जरूरी एडवांस मार्जिन की जरूरतों को पूरना करने में किया जाएगा. बाकी बची रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा.
कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ कैसी रही?
ऑगमोंट एंटरप्राइजेज ने FY26 में ₹348.3 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹227.2 करोड़ के मुकाबले 53.3% ज्यादा है. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 42.2% बढ़कर ₹66,230.8 करोड़ से ₹94,186.2 हो गया. नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, इंटेंसिव फिस्कल सर्विसेस, जेएम फाइनेंशियल और मोतीललाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स इस इश्यू के लिए मर्चेंट बैकर के तौर पर काम कर रहे हैं.
Augmont Enterprises के बारे में जानें
ऑगमोंट मुख्य रूप से दो वर्टिकल में काम करती है. इसका एंटरप्राइजेज बिजनेस ऑगमोन्ट SPOT प्लेटफॉर्म ( जिसमें इंटरनेशनल सेल्स भी शामिल है) के जरिए चलता है. जबकि कंज्यूमर बिजनेस ऑगमोंट गोल्ड फॉर ऑल प्लेटफॉर्म और ऑफलाइन चैनलों के जरिए काम करता है. कंपनी अपने प्रोडक्ट राजस्थान के जयपुर में सीतापुर SEZ स्थिच एक यूनिट में बनाती है, जिसकी क्षमता 13.80 MTPA है. इसके अलावा, कंपनी उत्तराखंड के रुद्रपुर और महाराष्ट्र के मुंबई में सोना और चांदी रिफाइन करने वाली यूनिट भी चलाती है. कंपनी का ऑपरेशनल स्केल मुख्य रूप से बुलियन ट्रेडिंग पर निर्भर है. जिसकी वजह से इंवेन्ट्री और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को सपोर्ट करने के लिए वर्किंग कैपिटल एक अहम जरूरत बन जाती है.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में, कार्यबल में जेन-जी की हिस्सेदारी दोगुनी हुई : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में जेन जी की हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है, लेकिन कर्मचारियों को बनाए रखने का संकट बढ़ रहा है और हर दो में से एक कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
ग्रेट प्लेस टू वर्क की रिपोर्ट में पाया गया कि करीब हर दो में से एक कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहा है, जबकि चार में से तीन कर्मचारी अगले 12 महीनों के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कर्मचारियों द्वारा अपनी औपचारिक रूप से तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर काम करने की इच्छा लगातार घट रही है, जबकि कार्यस्थल की बुनियादी स्थितियों में सुधार हो रहा है।
कंपनी ने 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले 130 से ज्यादा संगठनों के अध्ययन के बाद कहा, “यह गिरावट दर्शाती है कि कर्मचारी कार्यस्थल की भौतिक या बुनियादी सुविधाओं में मामूली सुधार को तो स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक कंपनी के प्रति वफादारी और अतिरिक्त प्रयास के लिए जरूरी व्यापक प्रणालीगत और सांस्कृतिक बदलाव उन्हें अभी तक महसूस नहीं हुए हैं।”
अब जेन जी कुल कार्यबल का 34 प्रतिशत है, जो 2023 में 17 प्रतिशत था। इस पीढ़ी में वेतन, पहचान और पदोन्नति के मानदंडों को लेकर अस्पष्टता के प्रति सहनशीलता कम है और उम्मीदें पूरी नहीं होने पर वे नौकरी छोड़ने में तेजी दिखाते हैं।
ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया के प्रबंध निदेशक अक्षत शाह ने कहा, “प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र के लीडर्स को अपने कर्मचारियों की भागीदारी और उन्हें बनाए रखने के तरीकों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा और विविध कार्यबल की व्यक्तिगत अपेक्षाओं के अनुरूप बनाना होगा।”
आंकड़े के अनुसार, 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं, जबकि व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया, “ये मैनेजर पूरे उद्योग के लिए शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम कर रहे हैं। वे प्रोजेक्ट पूरा करने का दबाव, ग्राहकों की मांगों और टीम की देखभाल का संयुक्त बोझ उठा रहे हैं, जबकि उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि वे संगठन में होने वाले हर बदलाव को बिना किसी व्यवधान के कर्मचारियों तक पहुंचाएं।”
लगभग 10 में से 6 संगठन अपने रोजमर्रा के कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, केवल 10 में से 2 कर्मचारियों ने पूरी तरह सहमति जताई कि उन्हें इन एआई टूल्स से जुड़े जोखिमों और फायदों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई है।
--आईएएनएस
एबीएस
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