Maharashtra Ki Badi Khabar Live | महाराष्ट्र की बड़ी खबर | Marathi Language Row | CM Fadnavis
Maharashtra Ki Badi Khabar Live | महाराष्ट्र की बड़ी खबर | Marathi Language Row | CM Fadnavis महाराष्ट्र में ‘मराठी टेस्ट’ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की जानकारी की जांच शुरू होने के बाद मुंबई और ठाणे में इसका विरोध देखने को मिला। कई ड्राइवरों ने इस नियम को लेकर नाराजगी जताई और प्रदर्शन भी किया। RTO की ओर से ड्राइवरों की मराठी बोलने और समझने की क्षमता जांची जा रही है। जो ड्राइवर टेस्ट में खरे नहीं उतर रहे हैं, उन्हें मराठी सीखने के लिए नोटिस दिया जा रहा है। वहीं, विरोध करने वाले ड्राइवरों का कहना है कि इस नियम से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है। आखिर महाराष्ट्र में मराठी टेस्ट को लेकर इतना बवाल क्यों मचा है? नियम क्या है और ड्राइवर इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? देखिए पूरी खबर। #live #marathitest #marathilanguage #maharashtra #mumbainews #thanenews #marathinews #autotaxi #autorickshaw #taxidrivers #driverprotest #protest #politicalnews #latestnews #hindinews #timesnownavbharat You can Search us on YouTube by- NBT, NBT TV Live, Navbharat Times, Times Now, TNN, TNNB, Navbharat TV, Hindi News, Latest news and @timesnownavbharat About Channel: Times Now Navbharat देश का No.1 Hindi news है। यह चैनल भारत और दुनिया से जुड़ी हर Latest News और Breaking News , राजनीति, मनोरंजन और खेल से जुड़े समाचार आपके लिए लेकर आता है। इसलिए सब्सक्राइब करें और बने रहें टाइम्स नाउ नवभारत के साथ Times Now Navbharat is India's fastest growing Hindi News Channel with 24 hour coverage. Get Breaking news, Latest news, Politics news, Entertainment news and Sports news from India & World on Times Now Navbharat. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Watch Live TV : https://www.timesnowhindi.com/live-tv Subscribe to our other network channels: Times Now: https://www.youtube.com/TimesNow Zoom: https://www.youtube.com/zoomtv ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- You can also visit our website at: https://www.timesnowhindi.com Download our App for Breaking News: https://tinyurl.com/bde8rv84 Like us on Facebook: https://www.facebook.com/Timesnownavbharat Follow us on Twitter: https://twitter.com/TNNavbharat Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/timesnownavbharat
Caste census: जाति जनगणना के तरीकों पर खड़गे और राहुल गांधी ने उठाए सवाल, पीएम मोदी को पत्र लिखकर की यह मांग
Caste census: कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आगामी जनगणना के दौरान जातिगत विवरण जुटाए जाने के प्रस्तावित तरीके को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में इन दोनों शीर्ष कांग्रेस नेताओं ने आग्रह किया है कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनगणना से मिलने वाले आंकड़े पूरी तरह सटीक और विश्वसनीय हों।
नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करने और प्रभावी सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां तैयार करने के लिए प्रामाणिक जातिगत आंकड़े होना बेहद अनिवार्य है।
'ओपन-ENDED' सवालों से आंकड़ों में गड़बड़ी की आशंका
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कांग्रेस नेताओं ने सरकार द्वारा जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए 'ओपन-एंडेड' (खुले छोर वाले) सवाल चुनने के फैसले पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने पत्र में लिखा, "आपकी सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए ओपन-एंडेड प्रश्नों का तरीका चुना है, जो कि भ्रामक है।"
भारत में सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं।
— Congress (@INCIndia) August 25, 2026
अलग-अलग जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो।
लेकिन सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए open-ended प्रश्न का तरीका… pic.twitter.com/ySP3REE7yQ
खड़गे और राहुल गांधी ने दलील दी कि इस तरह के खुले प्रारूप से भारी विसंगतियां पैदा हो सकती हैं, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही जाति को अलग-अलग नामों, उपजातियों या अलग वर्तनी (spellings) से जाना जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक ही समुदाय के लोग अलग-अलग नाम दर्ज करवाते हैं, तो डेटा में उन्हें अलग-अलग समूहों के रूप में गिना जा सकता है।
पत्र में आशंका जताते हुए कहा गया, "इससे देश में लाखों जातियां बन जाएंगी, जिससे जाति जनगणना से मिलने वाला पूरा डेटा ही बेकार हो जाएगा।" कांग्रेस नेताओं का मानना है कि ऐसी अशुद्धियों से समुदायों की आबादी का गलत अनुमान लग सकता है, जिसका सीधा असर शिक्षा, रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं और विकास योजनाओं जैसे सामाजिक न्याय के उपायों पर पड़ेगा। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि प्रस्तावित प्रश्नावली में 'पिछड़े वर्ग' (backward class) शब्द का जिक्र नहीं है, जिससे वर्गीकरण की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
कांग्रेस नेताओं ने सुझाए वैकल्पिक उपाय
सरकार के सामने एक बेहतर विकल्प रखते हुए खड़गे और राहुल गांधी ने सुझाव दिया कि जनगणना में खुली छूट देने के बजाय एक निश्चित (Fixed) जाति सूची का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तरदाताओं को अपनी जाति चुनने के लिए एक ड्रॉप-डाउन विकल्प दिया जा सकता है, जिससे नामों और वर्तनी में आने वाली भिन्नताओं को कम किया जा सके।
नेताओं के मुताबिक, इस तरह की मानकीकृत सूची को मौजूदा सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक स्रोतों की मदद से तैयार किया जा सकता है। इसमें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची के साथ-साथ भारतीय नृविज्ञान सर्वेक्षण (Anthropological Survey of India) के पास उपलब्ध डेटा को शामिल किया जा सकता है।
इस सिलसिले में उन्होंने तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों का हवाला दिया, जहां निश्चित जाति सूचियों का उपयोग किया गया था। प्रधानमंत्री को सौंपे गए पत्र के साथ तेलंगाना जाति सर्वेक्षण-2024 और बिहार जाति सर्वेक्षण-2022 की सूचियों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।
कांग्रेस नेताओं का दृढ़ मत है कि एक मानकीकृत दृष्टिकोण अपनाने से जनगणना के आंकड़ों में जातियों के बिखराव को रोका जा सकेगा और नीति निर्माण के लिए सही आंकड़ों का उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। आने वाली जनगणना से ठीक पहले विपक्ष के इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम आंकड़े देश के विभिन्न समुदायों की वास्तविक जनसांख्यिकीय तस्वीर को सही ढंग से पेश कर सकें।
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