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'मेड इन इंडिया' दूरसंचार तकनीकों को दुनिया तक पहुंचाए सी-डॉट, वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर दें जोर: सिंधिया

नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मंगलवार को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) से आह्वान किया कि वह भारत में विकसित स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से काम करे और अनुसंधान एवं विकास को व्यावसायिक रूप से सफल उत्पादों में बदलने पर विशेष ध्यान दे।

सी-डॉट के 43वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि भारत को 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करनी है। इसके लिए ऐसी तकनीकों का विकास आवश्यक है जो किफायती, भरोसेमंद, विस्तार योग्य और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों।

उन्होंने कहा, हमें ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी जो भारत को केवल मेड इन इंडिया तक सीमित न रखे, बल्कि मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड की दिशा में आगे बढ़ाए।

सिंधिया ने कहा कि सी-डॉट का लक्ष्य केवल भारत की घरेलू जरूरतों के लिए तकनीक विकसित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे उत्पाद तैयार करने चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब दूरसंचार क्षेत्र में केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।

उन्होंने कहा कि भारत 4जी युग में दुनिया के अग्रणी देशों से पीछे था, लेकिन 5जी के दौर में देश ने वैश्विक प्रगति के साथ कदम मिलाया है और अब 6जी तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व करने का लक्ष्य रख सकता है।

सिंधिया ने सी-डॉट द्वारा विकसित स्वदेशी 4जी तकनीकी स्टैक का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो अपनी खुद की 4जी तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि यह तकनीक देशभर में लगभग एक लाख मोबाइल टावरों पर तैनात की जा चुकी है और लाखों उपभोक्ताओं को सेवाएं प्रदान कर रही है।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सी-डॉट के इंजीनियरों को देते हुए कहा कि अब संस्था को इसी सफलता को आधार बनाकर 5जी क्षमताओं को और मजबूत करना चाहिए तथा 6जी मानकों के विकास में सक्रिय योगदान देना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भविष्य के दूरसंचार नेटवर्क केवल कनेक्टिविटी प्रदान करने तक सीमित नहीं रहेंगे। उन्हें सुरक्षित, विश्वसनीय, लचीला और बुद्धिमान भी होना होगा। ऐसे नेटवर्क ही डिजिटल अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा की बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि सी-डॉट में लगभग 1,565 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें आधे से अधिक की आयु 40 वर्ष से कम है। सिंधिया ने युवा कार्यबल को संस्था की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता निर्माण के लिए यह महत्वपूर्ण संसाधन है।

वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए सिंधिया ने कहा कि सी-डॉट को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनने के लिए साहस, नवाचार, स्वामित्व की भावना और दृढ़ता के साथ कार्य करना होगा।

उन्होंने कहा, अनुसंधान के लिए धैर्य चाहिए, इंजीनियरिंग के लिए लगातार सुधार की आवश्यकता होती है और वैश्विक नेतृत्व के लिए दीर्घकालिक सहयोग तथा निरंतर योगदान अनिवार्य है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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पटना में बैरिकेड्स तोड़ CM आवास की ओर बढ़ रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, कई हिरासत में

BPSC TRE 4 Protest: बीपीएससी शिक्षक भर्ती के चौथे चरण (BPSC TRE 4) के नियमों में बदलाव की मांग को लेकर बिहार के छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है. पीटी-मेंस परीक्षा प्रणाली को हटाने, निगेटिव मार्किंग खत्म करने और बहाली में 100 प्रतिशत डोमिसाइल (स्थानीय निवासी) नीति लागू करने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने राजधानी में उग्र आंदोलन शुरू कर दिया है.
यह प्रदर्शन 'ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन' (ABSU) के अमन गुट के नेतृत्व में बुलाया गया है. अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए जब छात्रों का हुजूम गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगा, तो पुलिस के साथ उनकी भारी नोकझोंक हुई. आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर पर पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग को ध्वस्त कर दिया और डाकबंगला चौराहे की तरफ कूच कर गए.

डाकबंगला चौराहे पर पुलिस का एक्शन

छात्रों की भारी भीड़ जब डाकबंगला चौराहे पर पहुंची, तो हालात को बेकाबू होता देख पुलिस ने सख्ती बरती. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया और लाठियां भी चटकाईं. इस दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई छात्रों को हिरासत में ले लिया है. हालांकि, मेट्रो निर्माण कार्य के लिए लगाई गई लोहे की बैरिकेडिंग (शील्ड) की वजह से छात्र डाकबंगला चौराहे से आगे नहीं बढ़ सके. पुलिस अधिकारियों द्वारा छात्रों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे.

सड़कों पर उतरी सीआरपीएफ, सीएम आवास की सुरक्षा बढ़ी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पटना की सड़कों पर भारी पुलिस बल के साथ-साथ सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों को भी तैनात कर दिया गया है. डाकबंगला चौराहे पर आईजी जितेंद्र राणा और एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा खुद मोर्चा संभाले हुए हैं और पुलिस पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में है. दूसरी तरफ, छात्रों के आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया गया है. फिलहाल जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे के बीच कई जगहों पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी हुई है. छात्र किसी भी कीमत पर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं.

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  Sports

ICC की कार्रवाई: Prabhat Jayasuriya ने भारत के खिलाफ खोया आपा, मैदान पर तोड़फोड़ के बाद मिली सख्त सजा

श्रीलंका के स्पिन गेंदबाज प्रभात जयसूर्या के लिए भारत के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दौरान हुई एक घटना भारी पड़ गई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने उन्हें आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया है। जयसूर्या पर मैच के दौरान क्रिकेट उपकरण के अनुचित इस्तेमाल से जुड़े नियम का उल्लंघन करने के लिए आधिकारिक फटकार लगाई गई है और उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक नकारात्मक अंक भी जोड़ा गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार 24 अगस्त को दिन के खेल की आखिरी गेंद के बाद हुई। जयसूर्या दिन की अंतिम गेंद पर आउट हुए थे। पवेलियन लौटते समय उन्होंने बल्ले से सीमा रेखा के पास लगे सुरक्षा अवरोधकों पर प्रहार किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इसे क्रिकेट उपकरण या मैदान से जुड़े सामान के अनुचित इस्तेमाल के नियम के दायरे में माना है।

जयसूर्या पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की आचार संहिता की धारा 2.2 के तहत कार्रवाई की गई है। यह प्रावधान अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान क्रिकेट उपकरण, कपड़ों या मैदान से जुड़े सामान और सुविधाओं के दुरुपयोग से संबंधित है। जयसूर्या ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट की ओर से प्रस्तावित सजा को भी मान लिया। इसलिए मामले में औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी।

यह जयसूर्या का पिछले 24 महीनों में पहला ऐसा अपराध है। इसी वजह से उन्हें केवल आधिकारिक फटकार और एक नकारात्मक अंक की सजा दी गई है। मैदान पर मौजूद अंपायर एहसान रजा, शरफुद्दौला इब्ने शाहिद, तीसरे अंपायर रॉड टकर और चौथे अंपायर प्रगीथ रम्बुकवेला ने जयसूर्या के खिलाफ आरोप लगाए थे।

गौरतलब है कि कोलंबो टेस्ट में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की कार्रवाई का सामना करने वाले जयसूर्या तीसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले भारत के यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के असिथा फर्नांडो पर भी पहले दिन की घटना के बाद कार्रवाई की जा चुकी है। दोनों खिलाड़ियों पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया था और उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक-एक नकारात्मक अंक जोड़ा गया था।

पहले दिन भारत की पहली पारी के 17वें ओवर में असिथा फर्नांडो ने यशस्वी जायसवाल को आउट किया था। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ कहासुनी हुई। यशस्वी फर्नांडो की ओर बढ़े और दोनों के बीच बातचीत हुई। इसी दौरान फर्नांडो ने अपना सिर यशस्वी की ओर बढ़ाया। जवाब में यशस्वी भी आगे झुके और दोनों के सिर आपस में टकरा गए थे।

बता दें कि भारत और श्रीलंका के बीच यह मुकाबला विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र का हिस्सा है। मैच में पहले ही अनुशासन से जुड़े कई मामले सामने आने के कारण खिलाड़ियों की गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की निगरानी बढ़ी हुई है। जयसूर्या पर हुई कार्रवाई के बाद कोलंबो टेस्ट में अब तक तीन खिलाड़ी आचार संहिता के उल्लंघन के लिए दंडित किए जा चुके हैं।
Tue, 25 Aug 2026 21:48:00 +0530

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