रिश्वत मामले में SBI के पूर्व शाखा प्रबंधक को 4 साल की सजा, 90 हजार रुपये का जुर्माना
लखनऊ की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अदालत ने रिश्वतखोरी के एक मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अजय कुमार गौर को दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर 90 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह फैसला 24 अगस्त 2026 को सुनाया गया. अजय कुमार गौर उस समय SBI की शाहूपुरी शाखा, जिला चंदौली, उत्तर प्रदेश में शाखा प्रबंधक के पद पर तैनात थे.
10 लाख रुपये के पर्सनल लोन के लिए मांगी रिश्वत
CBI के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि शाखा प्रबंधक अजय कुमार गौर ने उसके 10 लाख रुपये के पर्सनल लोन को मंजूर करने और राशि जारी करने के बदले 50 हजार रुपये की अवैध रिश्वत मांगी थी. आरोप के मुताबिक, रिश्वत की रकम पर्सनल लोन की राशि का 5 प्रतिशत बताई गई थी. यानी 10 लाख रुपये के लोन के लिए 50 हजार रुपये की मांग की गई थी.
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CBI ने बिछाया जाल, 40 हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा
शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी को पकड़ने के लिए ट्रैप कार्रवाई की. जांच एजेंसी के अनुसार, ट्रैप के दौरान अजय कुमार गौर को शिकायतकर्ता से 40 हजार रुपये की अवैध रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया. CBI की कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई.
2018 में दर्ज हुआ था मामला
CBI ने इस मामले में 26 फरवरी 2018 को केस दर्ज किया था. जांच पूरी करने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने 27 अप्रैल 2018 को आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद अदालत ने 9 जनवरी 2019 को आरोपी अजय कुमार गौर के खिलाफ आरोप तय किए और मामले की सुनवाई शुरू हुई.
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लंबी सुनवाई के बाद दोषसिद्धि
मामले में CBI की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत में सुनवाई चली. ट्रायल पूरा होने के बाद अदालत ने अजय कुमार गौर को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी पाया. 24 अगस्त 2026 को CBI कोर्ट, लखनऊ ने आरोपी को चार वर्ष के कारावास और 90 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई.
- आरोपी: अजय कुमार गौर
- पद: तत्कालीन शाखा प्रबंधक, SBI
- शाखा: शाहूपुरी शाखा, चंदौली, उत्तर प्रदेश
- लोन की राशि: 10 लाख रुपये
- कथित रिश्वत की मांग: 50 हजार रुपये
- ट्रैप के दौरान स्वीकार की गई रकम: 40 हजार रुपये
- CBI केस दर्ज: 26 फरवरी 2018
- चार्जशीट: 27 अप्रैल 2018
- आरोप तय: 9 जनवरी 2019
- अदालत का फैसला: 24 अगस्त 2026
- सजा: 4 वर्ष का कारावास
- जुर्माना: 90 हजार रुपये
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यह मामला बैंक अधिकारी द्वारा लोन मंजूर करने के बदले अवैध रकम मांगने से जुड़ा है. शिकायतकर्ता का आरोप था कि 10 लाख रुपये के पर्सनल लोन को मंजूर और जारी करने के लिए शाखा प्रबंधक ने 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायत के आधार पर CBI ने ट्रैप लगाया और आरोपी को 40 हजार रुपये लेते हुए पकड़ लिया. जांच के बाद चार्जशीट दाखिल हुई और करीब आठ साल चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए चार साल की जेल और 90 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.
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दिल्ली एयरपोर्ट पर 150 मिलियन डॉलर के निवेश से इंटीग्रेटेड एयर कार्गो हब बनाएगी फेडएक्स
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। ग्लोबल लॉजिस्टिक्स कंपनी फेडएक्स ने मंगलवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे स्थित जीएमआर क्रागो सिटी में एक इंटीग्रेटेड एयर कार्गो हब विकसित करने के लिए लगभग 150 मिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की।
फेडएक्स ने बताया कि प्रस्तावित सुविधा करीब 2.30 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैली होगी। इसमें अंतरराष्ट्रीय गेटवे और पिकअप-एंड-डिलीवरी ऑपरेशन को एक ही छत के नीचे लाया जाएगा, जिससे शिपमेंट की आवाजाही तेज होगी और परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
इस परियोजना के भूमिपूजन समारोह में नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू भी शामिल हुए।
कंपनी के अनुसार, पूरी तरह ऑटोमेटेड यह हब शुरू होने के बाद 5,000 पैकेज प्रति घंटा प्रोसेस करने की क्षमता रखेगा। मांग बढ़ने के साथ इसकी क्षमता को और बढ़ाने की भी गुंजाइश होगी।
इस सुविधा में एडवांस ऑटो-सॉर्टर, नई पीढ़ी की एक्स-रे मशीनें, बेहतर सुरक्षा प्रणालियां और स्मार्ट पैकेज-हैंडलिंग तकनीक शामिल होंगी।
कंपनी ने कहा कि इन तकनीकों से शिपमेंट प्रोसेसिंग में सुधार, नेटवर्क की मजबूती और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
फेडएक्स के मध्य पूर्व, भारतीय उप महाद्वीप और अफ्रीका (एमईआईएसए) के अध्यक्ष कामी विश्वनाथन ने कहा कि भारत कंपनी के वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण बाजार है। उत्तर और पूर्वी भारत देश की बढ़ती व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विश्वनाथन ने कहा, “दिल्ली में अपनी मौजूदगी मजबूत करने से इन बाजारों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और कारोबार के विस्तार में कंपनियों को सहायता मिलेगी। यह भारत में हमारे दीर्घकालिक भरोसे और देश की बदलती व्यापारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक क्षमता और क्षमताओं में निवेश की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
प्रस्तावित हब जीएमआर क्रागो सिटी में बनाया जाएगा। यह दिल्ली एयरपोर्ट पर विकसित किया जा रहा एक एकीकृत कार्गो और लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट है।
जीएमआर क्रागो सिटी करीब 50 एकड़ में फैली है और इसमें कुल लगभग 15-20 लाख वर्ग फुट विकास की क्षमता है। इसके पहले चरण में करीब 30 एकड़ क्षेत्र में लगभग 10 लाख वर्ग फुट का विकास किया जाएगा।
जीएमआर एयरपोर्ट्स ने बताया कि पहले चरण का विस्तृत डिजाइन तैयार हो चुका है और शुरुआती तैयारियां शुरू हो गई हैं। निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड के प्रेसिडेंट और सीईओ (कमर्शियल एंड ग्रोथ) राजेश अरोड़ा ने कहा कि फेडएक्स का जीएमआर क्रागो सिटी में अपना इंटीग्रेटेड हब स्थापित करने का फैसला दिल्ली एयरपोर्ट की वैश्विक लॉजिस्टिक्स गेटवे के रूप में बढ़ती भूमिका की पुष्टि करता है।
उन्होंने कहा कि यह सुविधा उत्तर और पूर्वी भारत के कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में मदद करेगी। साथ ही, इससे देश के बढ़ते व्यापार, ई-कॉमर्स और एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को भी मजबूती मिलेगी।
--आईएएनएस
एबीएस
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