Responsive Scrollable Menu

Kashmiri Pandits पर हुए अत्याचार का चुन चुन कर हिसाब ले रही Modi सरकार, 1998 के Wandhama Massacre में 23 लोगों की निर्मम हत्या की फाइल दोबारा खोली

कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध मोदी सरकार ने घाटी में उनके खिलाफ हुए अत्याचारों की फाइलें एक-एक कर दोबारा खोलनी शुरू कर दी हैं। दशकों पुराने उन जघन्य अपराधों की परतें फिर से खोली जा रही हैं, जिनमें आतंकवाद के दौर में कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया गया, उनके परिवार उजाड़े गए और हजारों लोगों को अपना घर-बार छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। अब इन मामलों को तार्किक और कानूनी निष्कर्ष तक पहुंचाने, अत्याचार करने वालों और साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाने तथा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में गंभीर पहल शुरू हो चुकी है।

हम आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एसआईए ने 1998 के वंधामा नरसंहार की जांच दोबारा शुरू कर दी है। 25 जनवरी 1998 को गांदरबल जिले के वंधामा गांव में आतंकियों ने कश्मीरी पंडित परिवारों के घरों में घुसकर 23 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। यह मामला करीब तीन दशक बाद भी अनसुलझा रहा, लेकिन अब एसआईए ने इसे प्राथमिकता के साथ फिर से अपने हाथ में लिया है। जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इस मामले में जल्द ही महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है।

इसे भी पढ़ें: Kashmiri Pandit कर्मचारियों को मिली धमकी, Omar Abdullah ने जताई गंभीर चिंता

वंधामा हत्याकांड के साथ-साथ एसआईए ने कश्मीर के दो प्रमुख कश्मीरी पंडित व्यक्तित्वों वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता टीका लाल टपलू तथा न्यायमूर्ति नीलकंठ गंजू की हत्याओं की जांच भी तेज कर दी है। आतंकवाद के शुरुआती दौर में टपलू उन प्रमुख कश्मीरी पंडित चेहरों में थे जिन्हें चुनकर निशाना बनाया गया। सितंबर 1989 में श्रीनगर स्थित उनके आवास के पास उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इसके कुछ ही समय बाद न्यायमूर्ति नीलकंठ गंजू को भी आतंकियों ने निशाना बनाया। न्यायमूर्ति गंजू ने जेकेएलएफ संस्थापक मकबूल भट को मौत की सजा सुनाई थी। 4 नवंबर 1989 को श्रीनगर में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इन हत्याओं को कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद के उस दौर की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है, जब चुनिंदा कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर घाटी में भय का माहौल पैदा किया गया।

एसआईए का अभियान केवल इन मामलों तक सीमित नहीं है। 12 अगस्त को एजेंसी ने कश्मीरी पंडित कवि और लेखक सर्वानंद कौल प्रेमी तथा उनके पुत्र की हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर के नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। हम आपको याद दिला दें कि 66 वर्षीय प्रेमी और उनके छोटे बेटे वीरेंद्र को 1 मई 1990 को अनंतनाग स्थित उनके गांव से अगवा कर लिया गया था। अगले दिन दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और उनके शव पेड़ से लटके हुए मिले। इस हृदय विदारक घटना के पांच दिन बाद शोक और भय से टूटा कौल परिवार कश्मीर छोड़कर चला गया और फिर कभी वापस नहीं लौटा।

इससे पहले 29 जून को एसआईए ने 27 वर्षीय नर्स सरला भट की हत्या के मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में कार्यरत सरला भट को 18 अप्रैल 1990 को हॉस्टल से अगवा किया गया था। उन्हें प्रताड़ित करने के बाद गोली मार दी गई और अगले दिन उनका गोलियों से छलनी शव बरामद हुआ। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि वर्षों पुरानी और लगभग ठंडी पड़ चुकी फाइलों को अब दोबारा गंभीरता से खंगाला जा रहा है।

एसआईए अधिकारियों के अनुसार, इन सभी दशकों पुराने मामलों की केंद्रित और व्यापक जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य केवल पुराने रिकॉर्ड खोलना नहीं, बल्कि हत्याओं के पीछे की परिस्थितियों और साजिशों का पर्दाफाश करना, विश्वसनीय साक्ष्य जुटाना और ठोस सबूतों तथा गवाहों की गवाही के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है।

लेकिन एक तरफ पुराने अपराधों की जांच तेज हो रही है, तो दूसरी तरफ घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को एक बार फिर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर एक नया धमकी भरा पोस्टर प्रसारित हुआ है, जिसमें कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम, पते और वाहनों के नंबर होने का दावा किया गया है। पोस्टर कथित रूप से यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल नामक संगठन के नाम से जारी बताया गया है और उस पर 23 अगस्त की तारीख अंकित है।

ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज फोरम कश्मीर ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव से कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। फोरम ने कहा है कि पोस्टर की प्रामाणिकता की अभी पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी के साथ ऐसे धमकी पत्रों का बार-बार प्रसार गंभीर चिंता का विषय है। फोरम ने कार्यस्थलों और आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा तथा उन कर्मचारियों को विशेष सुरक्षा देने की मांग की है, जिनकी व्यक्तिगत जानकारियां कथित पोस्टर में शामिल हैं। हालांकि धमकियों के बीच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का हौसला झुका नहीं है। एक कर्मचारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे इस बार न तो डरेंगे और न ही घाटी छोड़कर भागेंगे। उनका कहना है, “कश्मीर हमारा भी है और यही हमारी जन्मभूमि है।”

देखा जाये तो यही संदेश आज सबसे महत्वपूर्ण है। एक ओर पुरानी फाइलें खुल रही हैं और दशकों पुराने अत्याचारों के दोषियों तक पहुंचने की कोशिश तेज हो रही है, तो दूसरी ओर नई धमकियों के बावजूद कश्मीरी पंडित अपने अधिकार और अपनी जन्मभूमि से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है। एक तो बीते दौर के अपराधों को न्याय के अंजाम तक पहुंचाना और साथ ही वर्तमान में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। न्याय की यह लड़ाई जितनी अतीत की है, उतनी ही कश्मीर के भविष्य की भी है।

Continue reading on the app

राहुल गांधी को किस करने वाली मरियम कौन हैं? जानें क्या बनना चाहती हैं

पुणे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. सेल्फी लेने पहुंची छात्रा ने राहुल गांधी के गाल पर किस कर दिया.

Continue reading on the app

  Sports

अरे कामिंडु आ जाओ भाई, लेट हो रहा है...श्रीलंकन टीम को छेड़ते रहे सरफराज खान

सरफराज खान को भले ही दूसरे टेस्ट में जगह नहीं मिली हो, लेकिन अपने मजाकिया अंदाज से वह सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. दरअसल, ऋषभ पंत के इंजर्ड होने के बाद बतौर सब्टिट्यूट फील्डर उन्हें ग्राउंड पर बुलाया गया. वह शॉर्ट लेग में फील्डिंग कर रहे थे, इस दौरान लगातार श्रीलंकन बल्लेबाजों पर कमेंट्स करते रहे. किसी की खिल्ली उड़ाते दिखे तो किसी को उकसाते नजर आए. स्टंप कैमरे में उनकी सारी बातें रिकॉर्ड हो गई. Tue, 25 Aug 2026 17:56:19 +0530

  Videos
See all

Uttarakhand SIR Controversy: 2002 से 2022 तक आंकड़ों का खेल! कांग्रेस का आरोप vs बीजेपी का पलटवार #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-25T12:45:18+00:00

Viral Video: रक्सौल में ‘शोले’ वाला सीन! टावर पर चढ़ी प्रेमिका | #viralvideo #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-25T12:39:50+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers