Marathwada में बारिश की कमी से Sowing Area 3.5 लाख हेक्टेयर घटा, सोयाबीन पर जोर
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में बारिश के सामान्य से 20.3 प्रतिशत कम होने के कारण बुवाई का रकबा इस साल करीब 3.5 लाख हेक्टेयर कम हो गया है। कृषि विभाग के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। आंकड़ों के अनुसार, इस साल बुवाई का रकबा 46.19 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले पांच वर्ष के 49.72 लाख हेक्टेयर के औसत से सात प्रतिशत कम है।
यह पिछले साल की तुलना में भी दो लाख हेक्टेयर कम है। मराठवाड़ा क्षेत्र में छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, परभणी, नांदेड़, हिंगोली, धाराशिव और लातूर जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में 479.1 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो अपेक्षित 586.1 मिलीमीटर के मुकाबले 20.3 प्रतिशत कम है।
कृषि विभाग के अनुसार, कपास की खेती का रकबा 2.65 लाख हेक्टेयर घटकर 12.14 लाख हेक्टेयर रह गया है। वहीं इस साल गन्ने की खेती का रकबा पांच साल के औसत 3.24 लाख हेक्टेयर से घटकर सिर्फ 43,821 हेक्टेयर रह गया है। किसानों ने अब सोयाबीन, मक्का और सूरजमुखी की खेती पर जोर दिया है।
सोयाबीन की खेती के रकबे में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह बढ़कर 25.74 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं, मक्का का रकबा पांच प्रतिशत बढ़कर 2.68 लाख हेक्टेयर और सूरजमुखी का रकबा 39 प्रतिशत बढ़कर 2,289 हेक्टेयर हो गया है।
Arunachal Pradesh: पुलिस ने 19 बच्चों को बाल तस्करी से बचाया, तीन दलाल गिरफ्तार
अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी के एक गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विभिन्न हिस्सों से 19 बच्चों को बचाया गया और तीन संदिग्ध बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, नामसाई जिले की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की शिकायत के बाद 17 अगस्त को नामसाई थाने में मामला दर्ज किया गया था।
उन्होंने बताया कि बच्चों को शि-योमी जिले के मेचुका, वेस्ट सियांग के आलो, ईस्ट सियांग के पासीघाट, नाहरलागुन, ईटानगर और लोंगडिंग से बचाया गया। पुलिस ने बताया कि मामला कई जिलों से जुड़ा होने के कारण इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से कथित तौर पर उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और देखभाल उपलब्ध कराने का वादा करके संपर्क किया गया।
इसके बाद नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर दूसरे स्थानों पर ले जाकर वहां अलग-अलग लोगों के पास रखा गया। नामसाई के पुलिस अधीक्षक सांगे थिनले ने बताया कि बचाए गए बच्चों में अधिकांश की उम्र आठ वर्ष से कम है और सबसे छोटे बच्चे की उम्र करीब तीन वर्ष है। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने कुछ बिचौलियों और माता-पिता के बीच हर बच्चे के लिए 10,000 रुपये से 50,000 रुपये तक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का भी पता लगाया है।’’ उन्होंने बताया कि बच्चों से कथित तौर पर घरेलू काम और होटलों से जुड़े काम कराए जा रहे थे।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बच्चों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एसआईटी फिलहाल वित्तीय लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने और उनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है।’’ उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें ऐसे बच्चों के बारे में कोई जानकारी हो, तो वे पुलिस के साथ इसे साझा करें।
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