Upcoming SUVs: इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और पेट्रोल-डीजल सेगमेंट में आएंगी ये धांसू नई गाड़ियां
Upcoming SUVs: भारत में SUV की बढ़ती मांग को देखते हुए कई वाहन निर्माता कंपनियां नए मॉडल और मौजूदा SUV के अपडेटेड वर्जन लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं। आने वाले समय में ग्राहकों को इलेक्ट्रिक, पेट्रोल, डीजल और हाइब्रिड पावरट्रेन के साथ कई नए विकल्प देखने को मिल सकते हैं। इनमें हुंडई की नई इलेक्ट्रिक माइक्रो SUV HE1i शामिल है, जिसका मुकाबला टाटा पंच EV से हो सकता है। वहीं, मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स फेसलिफ्ट में नया सीरीज-हाइब्रिड पावरट्रेन मिलने की उम्मीद है, जिसके जरिए करीब 35 kmpl माइलेज हासिल करने का लक्ष्य हो सकता है। इसके अलावा महिंद्रा विजन एस और थार फेसलिफ्ट भी आने वाले प्रमुख मॉडल्स में शामिल हैं।
1. Hyundai HE1i: Punch EV को टक्कर देगी नई इलेक्ट्रिक SUV
Hyundai भारतीय बाजार में अपनी सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक SUV लाने की तैयारी कर रही है। इसे फिलहाल HE1i कोडनेम दिया गया है। यह एक इलेक्ट्रिक माइक्रो SUV होगी और लॉन्च के बाद इसका सीधा मुकाबला Tata Punch EV से हो सकता है।
इसे 2026 के अंत से पहले बाजार में उतारे जाने की उम्मीद है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 10 लाख रुपये हो सकती है।
डिजाइन की बात करें तो HE1i में बॉक्सी लुक और SUV जैसा दमदार स्टांस मिलने की संभावना है। इसमें स्प्लिट LED हेडलैंप, इंटीग्रेटेड रूफ रेल्स और 17-इंच अलॉय व्हील्स जैसे फीचर्स दिए जा सकते हैं।
यह Hyundai के E-GMP(K) प्लेटफॉर्म पर आधारित हो सकती है। इसमें 42 kWh और 49 kWh के दो बैटरी पैक मिलने की उम्मीद है। इसकी संभावित रेंज करीब 350 किलोमीटर तक हो सकती है।
2. Mahindra Vision S: नई सब-4 मीटर SUV की तैयारी
Mahindra भी Vision S कॉन्सेप्ट पर आधारित एक नई प्रोडक्शन SUV लाने की तैयारी में है। इसे 2027 की शुरुआत में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
यह SUV सब-4 मीटर सेगमेंट में एंट्री कर सकती है। इसमें बॉक्सी डिजाइन के साथ दमदार SUV स्टांस देखने को मिल सकता है। वहीं, केबिन में आधुनिक और टेक्नोलॉजी आधारित कई फीचर्स दिए जाने की उम्मीद है।
Vision S को Mahindra के नए NU-IQ प्लेटफॉर्म पर तैयार किया जा सकता है। यह एक मल्टी-एनर्जी आर्किटेक्चर है, इसलिए SUV को अलग-अलग पावरट्रेन के साथ पेश करने की संभावना है।
शुरुआत में इसमें पेट्रोल और डीजल इंजन दिए जा सकते हैं। बाद में इसके लाइनअप में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वर्जन भी शामिल किए जा सकते हैं।
3. Maruti Suzuki Fronx Facelift: 35 kmpl माइलेज पर नजर
Maruti Suzuki की लोकप्रिय Fronx को भी जल्द बड़ा अपडेट मिल सकता है। इसके फेसलिफ्ट वर्जन को फेस्टिव सीजन के आसपास लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
फेसलिफ्ट मॉडल में डिजाइन में मामूली बदलाव के साथ कई नए फीचर्स जोड़े जा सकते हैं। हालांकि, इसका सबसे बड़ा अपडेट पावरट्रेन में देखने को मिल सकता है। इसमें नया सीरीज-हाइब्रिड सिस्टम मिलने की संभावना है।
इस सिस्टम में 1.2-लीटर Z12E पेट्रोल इंजन सीधे पहियों को पावर देने के बजाय जनरेटर की तरह काम कर सकता है। यह इलेक्ट्रिक मोटर को पावर देने के लिए बिजली उत्पन्न कर सकता है। इस तकनीक के जरिए करीब 35 kmpl माइलेज हासिल करने का लक्ष्य हो सकता है।
केबिन में भी कई नए फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं। इनमें वेंटिलेटेड सीट्स, बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और Level 2 ADAS जैसे फीचर्स शामिल होने की उम्मीद है।
4. Mahindra Thar Facelift: डिजाइन और फीचर्स में होगा बदलाव
Mahindra अपनी लोकप्रिय तीन-दरवाजे वाली Thar को भी अपडेट करने की तैयारी में है। नए मॉडल में डिजाइन और फीचर्स में बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जबकि मौजूदा मैकेनिकल सेटअप को बरकरार रखा जा सकता है।
नई Thar में Thar Roxx से प्रेरित ग्रिल, C-शेप DRLs के साथ प्रोजेक्टर LED हेडलैंप, अपडेटेड टेल-लैंप और नए अलॉय व्हील्स दिए जाने की उम्मीद है।
केबिन को मौजूदा मॉडल से ज्यादा प्रीमियम बनाया जा सकता है। इसमें डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, बड़ा टचस्क्रीन, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और ADAS जैसे आधुनिक फीचर्स मिल सकते हैं।
किस SUV पर रहेंगी सबसे ज्यादा नजर?
इन चारों आगामी SUV में अलग-अलग खूबियां देखने को मिल सकती हैं। Hyundai HE1i इलेक्ट्रिक सेगमेंट में किफायती विकल्प के तौर पर सामने आ सकती है, जबकि Maruti Fronx Facelift का हाइब्रिड पावरट्रेन बेहतर माइलेज पर फोकस कर सकता है। दूसरी ओर, Mahindra Vision S और Thar Facelift अपने SUV डिजाइन और दमदार फीचर्स के चलते ग्राहकों का ध्यान खींच सकते हैं।
कुल मिलाकर, आने वाले समय में SUV खरीदारों के पास इलेक्ट्रिक से लेकर हाइब्रिड, पेट्रोल और डीजल पावरट्रेन तक कई विकल्प मौजूद होंगे।
(मंजू कुमारी)
Donald Trump के Mail Voting आदेश को US Supreme Court से मिली हरी झंडी
अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने डाक से मतदान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासकीय आदेश को आगे बढ़ाने का रास्ता सोमवार को साफ कर दिया। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि नजदीक आ रहे मध्यावधि चुनावों से पहले उनका प्रशासन इस आदेश को किस हद तक लागू कर पाएगा। इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की गुंजाइश बनी हुई है, जो ट्रंप के आदेश के कार्यान्वयन में और देरी कर सकती हैं।
अमेरिकी डाक सेवा ने पिछले सप्ताह बताया था कि वह इस आदेश को किस तरह लागू करेगी, लेकिन बड़े बदलाव लागू करने के लिए अब समय बहुत कम बचा है। कुछ राज्यों में मतदाताओं को डाक मतपत्र भेजने की प्रक्रिया कुछ ही हफ्तों में शुरू होने वाली है। डाक से मतदान लंबे समय से ट्रंप के निशाने पर रहा है।
ट्रंप का दावा रहा है कि इससे चुनाव में हेराफेरी को बढ़ावा मिलता है। हालांकि, इसके विपरीत ठोस प्रमाण मौजूद हैं और खुद ट्रंप भी इस मतदान पद्धति का इस्तेमाल कर चुके हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने शीर्ष अदालत में आपात अपील दायर कर अनुरोध किया था कि मध्यावधि चुनाव से पहले बदलावों को लागू करने की प्रक्रिया पर काम करने की अनुमति दी जाए।
मार्च में हस्ताक्षरित ट्रंप के शासकीय आदेश में उनके प्रशासन से पात्र मतदाताओं की सूची तैयार करने को कहा गया है। साथ ही, अमेरिकी डाक सेवा को निर्देश दिया गया है कि वह डाक मतपत्र केवल उन्हीं लोगों को भेजे, जिनके नाम इन सूचियों में शामिल हों। देश के 23 राज्यों और कोलंबिया जिले के डेमोक्रेटिक अधिकारियों ने इस आदेश को रोकने के लिए मुकदमा दायर किया।
उनका तर्क था कि संविधान राज्यों और कांग्रेस को चुनाव संचालित करने का अधिकार देता है और ट्रंप के प्रस्तावित बदलावों से अराजकता और राजनीतिक पक्षपात का दुरुपयोग हो सकता है। वहीं ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया कि राज्यों ने बहुत जल्द मुकदमा दायर कर दिया। प्रशासन ने वाशिंगटन से आए एक अन्य फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें एक न्यायाधीश ने ट्रंप के आदेश को आगे बढ़ने की अनुमति दी थी।
एक अपीलीय अदालत ने भी उस फैसले का समर्थन किया, हालांकि उसने भविष्य में बदलाव लागू किए जाने की स्थिति में आगे की अदालती कार्रवाई की गुंजाइश बरकरार रखी। उच्चतम न्यायालय पहले भी डाक मतपत्रों से जुड़े ट्रंप समर्थित तर्कों के खिलाफ फैसला दे चुका है। जून में अदालत ने फैसला सुनाया था कि राज्य ऐसे मतपत्रों की भी गिनती कर सकते हैं जो चुनाव वाले दिन के बाद पहुंचते हैं।
ट्रंप ने बिना ठोस सबूत के 2020 में डेमोक्रेटिक नेता जो बाइडन से अपनी हार के लिए डाक से मतदान को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने अपने शासकीय आदेश में प्रस्तावित बदलावों को ऐसे सुरक्षा उपायों के रूप में पेश किया है, जिनका उद्देश्य गैर-अमेरिकी नागरिकों को मतदान करने से रोकना है। ट्रंप ने उस कानून को पारित करने की भी बार-बार मांग की है, जिसमें मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य किया जाएगा।
अमेरिका के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के मतदाताओं के बीच डाक मतपत्रों का इस्तेमाल बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डाले गए कुल मतपत्रों में करीब 30 प्रतिशत डाक के जरिए डाले गए थे। डाक से मतदान की प्रक्रिया सुरक्षित भी मानी जाती है।
‘ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन’ के 2025 के एक अध्ययन के अनुसार, डाक से डाले गए हर एक करोड़ मतपत्रों में हेरफेर के केवल करीब चार मामले सामने आए।
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