अक्सर हम सभी नींद को लेकर काफी परेशान रहते हैं। हर बार यही सोचते हैं कि 'इस वीकेंड हफ्ते भर की नींद पूरी करेंगे....' लेकिन ऐसा हो नहीं पता है। जब हमारा पूरा हफ्ता भागदौड़ में बीतता है और आखिर में हम यही सोच लेते हैं कि छुट्टी वाले दिन या वीकेंड पर नींद पूरी करके हम अपनी थकान दूर करेंगे, हालांकि ऐसा हो नहीं पाता है।
असल में आपके शरीर को जो रोजाना नींद चाहिए, वो उतनी मिल नहीं रही है जो कि हमारे शरीर के लिए काफी जरुरी होती है। जब आपकी नींद पूरी न हो, तो इसका असर आपके तन और मन पर साफ दिखाई देता है। नींद की कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अक्सर देखा जाता है कि बिजी शेड्यूल के चक्कर में नींद पूरी नहीं होती है।
ऐसे में 'स्लीप डेट' (Sleep Debt) या स्लीप डेफिसिट बढ़ जाता है। आखिर यह क्या है, इसके क्या लक्षण है और कैसे यह आपके पूरे शरीर और मन प्रभावित करता है, आइए आपको बताते हैं।
Sleep Debt क्या होता है?
दरअसल, 'स्लीप डेट' तब होता है जब आपको नींद की जरुरत है और असल में आपको मिलने वाली नींद की मात्रा में अंतर होना। यह सब तब होता है जब आपकी नींद पूरी न हो, आप देर तक काम करते हैं, तनाव की वजह से सो नहीं पा रहे हैं या आपके सोने का कोई तय समय नहीं होता है। रोजाना एक या दो घंटे कम सोने से भी 'स्लीप डेट' हो सकता है और इसका आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
नींद की कमी के लक्षण
- थकान होना
- सुबह उठने में मुश्किल अधिक होना
- दिन में बहुत ज्यादा नींद आना
- ध्यान और फोकस की कमी
- भूलने की आदत
- सिरदर्द
- चिड़चिड़ापन
शरीर पर बुरा असर डालती है नींद की कमी
अक्सर नींद की कमी से लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत खराब हो जाती है। नींद न आने (इंसोम्रिया) के चलते इम्यून सिस्टम का कमजोर होना, मेटाबॉलिज्म पर असर दिखना, वजन पर असर होना और बार-बार बीमार बनें रहने की समस्या देखी जाती हैं। वहीं, पर्याप्त नींद न लेने से आपकी याददाश्त, सीखने की क्षमता और ध्यान लगाने की शक्ति पर काफी असर देखने को मिलता है।
इतना ही नहीं, तनाव और बेचैनी महसूस होती है। नींद की भारी कमी होने पर आपको मेंटल हेल्थ जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
रोजाना कितनी नींद है जरूरी?
डॉक्टर मानते हैं कि कम से कम रोजाना 8-9 घंटे की नींद लेना बहुत जरुरी है। वहीं आपकी स्लीप साइकिल तय होनी चाहिए। किसी भी तरह से पूरी नींद नहीं ले पा रहे हैं, तो आप इस बात का ध्यान दें। यदि आपको नींद आने में काफी दिक्कत होती है तो लाखों कोशिशों के बाद भी नींद नहीं आती है, तो डॉक्टर को जरुर दिखाएं।
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आज के समय में देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा डायबिटीज जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से परेशान है। जोकि मुख्य रूप से आधुनिक लाइफस्टाइल और गलत खानपान की आदतों से जुड़ी है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी, सोने-जागने का अनिश्चित समय, खानपान की गलत आदतें, स्मोकिंग की लत और अल्कोहल आदि इसकी मुख्य वजहें हैं। वैसे तो डायबिटीज से बचाव के कई तरीके बताए जाते हैं, जैसे चीनी, आलू, चावल, तेल-घी और मैदे आदि से परहेज करना आदि। लेकिन क्या आप जानती हैं कि डायबिटीज को कम करने में स्लो वॉक भी मदद कर सकती है।
जानें क्या कहती है रिसर्च
एक रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना लंच या डिनर के करीब 30 मिनट बाद 10-15 मिनट की हल्की वॉक के बाद भी लोगों में ब्लड शुगर लेवल में कमी पाई गई। अगर खाना खाने के करीब 30 मिनट के बाद 10 मिनट के लिए थोड़ा टहल लिया जाए। तो यह क्रिया सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। ऐसे में अगर आप भी इस समस्या से बचना चाहती हैं, तो लंच और डिनर के बाद टहलने की आदत को रूटीन में शामिल करें। इससे न सिर्फ शुगर लेवल कंट्रोल होगा बल्कि फिटनेस के लिए भी यह आदत अच्छी साबित होगी।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह रिचर्स बिल्कुल सही है। खाने के बाद शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही तरीके से होता है। इससे मसल्स खून में मौजूद ग्लूकोज का सही तरीके से यूज कर लेते हैं। रोजाना वॉक करने से तनाव दूर होता है, नींद अच्छी आती है और शुगर लेवल भी कंट्रोल होता है।
स्लो वॉक के क्या हैं फायदे
वॉक करना सबसे आसान एक्टिविटी में से एक है। डायबिटीज से परेशान लोग इसको कर सकते हैं। स्लो वॉक में चोट का खतरा कम होता है। वहीं वॉक शुरू करने के लिए किसी स्पेशल इक्विपमेंट की जरूरत नहीं होती है। लेकिन आरामदायक जूते और कपड़े पहनने से आपको मोटिवेट रहने में मदद मिल सकती है। वहीं जब आप रोजाना वॉक करते हैं, तो आपको सेहत से जुड़े कई फायदे मिलते हैं।
मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।
मूड बेहतर होता है।
ब्लड प्रेशर कम होता है।
बैलेंस में सुधार होता है।
इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है।
दिल की सेहत में सुधार होता है।
ब्लड शुगर का लेवल कम होता है।
वेट कंट्रोल में रहता है।
वॉक करने से ज्यादा अलर्ट और फोकस्ड फील होता है।
सोचने-समझने और याददाश्त की क्षमता में सुधार होता है।
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