नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह सरकारी और सरकार द्वारा किराए पर लिए गए वाहनों के लिए 'पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट' (PUCC) नियमों को सख्ती से लागू करे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस नियम को लागू करने की व्यवस्था को "ज़मीनी स्तर पर पूरी गंभीरता के साथ" लागू किया जाना चाहिए। NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफ़रोज़ अहमद की बेंच ने कहा कि अगर कोई सरकारी वाहन बिना वैध PUCC के दिल्ली की सड़कों पर चलता हुआ पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसियों को ज़रूरी सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों को यह भी निर्देश दिया कि वे जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD), GNCTD द्वारा 7 अप्रैल, 2026 को जारी किए गए सर्कुलर का पालन सुनिश्चित करें। इस सर्कुलर में यह अनिवार्य किया गया है कि सरकारी कामकाज के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी सरकारी और किराए के वाहनों के पास हर समय वैध PUCC होना चाहिए। सर्कुलर में साफ़ तौर पर कहा गया है कि बिना वैलिड PUC सर्टिफिकेट वाली किसी भी गाड़ी को सरकारी ड्यूटी पर नहीं लगाया जाएगा।
ये निर्देश जितेंद्र महाजन की अर्ज़ी पर सुनवाई के दौरान दिए गए। उन्होंने दिल्ली में सरकारी गाड़ियों द्वारा नियमों का पालन न करने से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। सुनवाई के दौरान, अर्ज़ी देने वाले ने अपनी बात सिर्फ़ उन सरकारी गाड़ियों तक सीमित रखी जो बिना वैलिड PUCC के चल रही थीं। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए नियमों के पालन से जुड़े डेटा पर ध्यान दिया। सरकार के हलफ़नामे के मुताबिक, 19 जून 2025 तक, इलेक्ट्रिक गाड़ियों को छोड़कर, डीज़ल, पेट्रोल या CNG से चलने वाली 30,995 एक्टिव रजिस्टर्ड सरकारी गाड़ियों में से 14,569 के पास वैलिड PUCC थे, जबकि 12,399 के PUCC की मियाद खत्म हो चुकी थी। बाकी 4,027 गाड़ियों का PUCC डेटा उपलब्ध नहीं था।
सरकार ने ट्रिब्यूनल को यह भी बताया कि 24 जून 2025 तक, फ्यूल स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम के ज़रिए ऐसी 1,360 गाड़ियों का पता चला जिनके PUCC की मियाद खत्म हो चुकी थी, और उन पर 'नवागति' (Nawgati) द्वारा चालान किया गया।
इस आदेश में अर्ज़ी में बताई गई 106 गाड़ियों की स्थिति का भी ज़िक्र है: 102 सरकारी गाड़ियां और चार प्राइवेट गाड़ियां। इनमें से 30 के पास वैलिड PUCC थे, 60 के PUCC की मियाद खत्म हो चुकी थी और उन पर चालान किया गया था, चार को कंडम (बेकार) घोषित कर दिया गया था, दो को कंडम करने की प्रक्रिया चल रही थी, तीन नहीं चल रही थीं, पांच 'एंड-ऑफ-लाइफ' (उपयोग की अवधि समाप्त) गाड़ियां थीं जिनके लिए सेक्शन 133 के तहत नोटिस जारी किए गए थे, और दो को स्क्रैप कर दिया गया था। ट्रिब्यूनल ने गौर किया कि दिल्ली सरकार ने एक एनफोर्समेंट मैकेनिज्म (नियम लागू करने की व्यवस्था) के बारे में बताया है, जिसके तहत फ्यूल स्टेशनों और ISBTs समेत 498 अहम जगहों पर लगे ANPR कैमरों को VAHAN पोर्टल से जोड़ा गया है ताकि बिना वैलिड PUCC वाली गाड़ियों की पहचान की जा सके। नियमों के उल्लंघन का पता चलने पर अपने-आप चालान जनरेट हो जाते हैं।
सरकार ने ट्रिब्यूनल को यह भी बताया कि PUCC से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले में उनका एनफोर्समेंट सिस्टम सरकारी और प्राइवेट गाड़ियों के बीच कोई फ़र्क नहीं करता है। इसलिए, नियमों का पालन न करने पर सरकारी गाड़ियों का भी चालान किया जाता है।
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जम्मू कश्मीर अपराध शाखा के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने कश्मीर में भोले-भाले निवेशकों से करीब दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में बेंगलुरु से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ का रहने वाला जुनैद-उल-इस्लाम रणवीर दंड संहिता (आरपीसी) की धारा 420 के तहत दर्ज एक मामले में वांछित था और पिछले एक साल से गिरफ्तारी से बच रहा था।
ईओडब्ल्यू के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘उसे बेंगलुरु के मंगम्मनापाल्या से गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी श्रीनगर की चौथी अतिरिक्त मुंसिफ न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के आदेशों के अनुपालन में की गई, जिसने उसके खिलाफ वारंट जारी किया था।’’
जांच में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और वित्तीय हेराफेरी के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आरोपी ने खुद को एक ई-कॉमर्स कंपनी से जुड़ा निवेशक बताकर और 10 प्रतिशत मासिक रिटर्न का वादा करके कई लोगों से कथित तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये जमा किए थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कई बैंक खातों के माध्यम से पैसे लेने के बाद, वह अपने वादों को पूरा करने में विफल रहा और बाद में उसने कोई जवाब देना भी बंद कर दिया।
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