मध्यप्रदेश के धार जिले में सोमवार को श्रद्धालुओं से भरी ‘ट्रैक्टर-ट्रॉली’ के पुल से नीचे गिर जाने से 42 वर्षीय एक कांवड़िये की मौत हो गई और 21 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक घायलों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार यह हादसा जिला मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर कुक्षी थाना क्षेत्र के कदमल गांव में हुआ जहां श्रद्धालु श्रावण मास के अंतिम सोमवार के अवसर पर नर्मदा नदी से जल लेने के लिए ‘ट्रैक्टर ट्रॉली’ से पुराने चिखल्दा जा रहे थे। कुक्षी के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी सुनील गुप्ता ने मृतक की पहचान राजेंद्र पाटीदार के रूप में की। उन्होंने बताया कि पाटीदार को पड़ोसी बड़वानी जिले के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जांच में ‘ट्रैक्टर-ट्रॉली’ का स्टीयरिंग फेल होना हादसे का कारण सामने आया है, जिसके बाद वाहन पुल से नीचे जा गिरा। उन्होंने बताया कि घायलों का बड़वानी जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। ट्रैक्टर के पीछे चल रहे मनोहर पाटीदार ने बताया कि वाहन में दो महिलाओं समेत 30 से अधिक लोग सवार थे।
उन्होंने कहा कि नवनिर्मित पुल पर गुजरते समय ‘ट्रैक्टर-ट्रॉली’ स्टीयरिंग फेल होने के कारण नीचे गिर गयी।
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश के उस आरोप का जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि ISRO का "दम घोंटा जा रहा है और उसे कमजोर किया जा रहा है"। सिंह ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की विरासत कमजोर नहीं हो रही है, बल्कि मोदी सरकार के तहत इसके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए आक्रामक निजीकरण एजेंडा अपनाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में जितेंद्र सिंह ने पिछले 12 वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में हुई प्रगति का ब्योरा दिया और कहा कि "मॉडल ISRO और इंडस्ट्री का मिलकर काम करना है और वे भारत की अंतरिक्ष कहानी का अगला अध्याय लिख रहे हैं। अंतरिक्ष राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने जयराम रमेश पर सरकार की उपलब्धियों को कमतर दिखाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
आप और आपके जैसे लोग भारत की हर कामयाबी को कमतर आंकने और हर आगे बढ़ते कदम पर शक करने पर तुले हुए हैं। भारत का स्पेस प्रोग्राम इसका नया शिकार बना है - लेकिन असलियत कुछ और ही है। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत का स्पेस सेक्टर अब ग्लोबल लेवल पर आगे बढ़ रहा है। यह पहले मुख्य रूप से सरकार द्वारा चलाया जाने वाला प्रोग्राम था, लेकिन अब यह ISRO, इंडस्ट्री और स्पेस स्टार्टअप्स को मिलाकर एक पूरा इकोसिस्टम बन गया है। उन्होंने कहा, "भारत के स्पेस प्रोग्राम को कम नहीं किया जा रहा है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य हर साल 50 लॉन्च करने का है। उन्होंने कहा इसे बढ़ाया जा रहा है। आइए सबूतों के साथ असलियत को साफ-साफ समझें। ISRO को कमजोर नहीं किया जा रहा है। इसे खास मिशनों - जैसे गगनयान, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और भविष्य में चांद, शुक्र और मंगल पर जाने वाले मिशनों - पर ज़्यादा ध्यान देने के काबिल बनाया जा रहा है। साथ ही, जैसे-जैसे भारत हर साल 50 लॉन्च के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, इंडस्ट्री को बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग करनी होगी, जबकि ISRO अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी और मिशन विकसित करेगा।
उन्होंने कहा, "यह भारत के स्पेस प्रोग्राम का स्वाभाविक विकास है। भारतीय इंडस्ट्री हमेशा से ISRO की अहम पार्टनर रही है। आज हमारे युवा अपने रॉकेट और सैटेलाइट बना रहे हैं, अपना इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं, प्राइवेट कैपिटल जुटा रहे हैं और अपने स्पेस प्रोग्राम चला रहे हैं। इसका सबसे साफ उदाहरण इस साल 18 जुलाई को देखने को मिला, जब स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 ऑर्बिट में पहुंचा - यह ऐसा करने वाला पहला प्राइवेट तौर पर विकसित भारतीय रॉकेट था। इससे ISRO की विरासत कमजोर नहीं हो रही है, बल्कि ISRO की विरासत रंग ला रही है। इसी तरह भारत आगे बढ़ेगा।
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