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Raksha Bandhan Katha: राखी क्यों बांधी जाती है? कृष्ण-द्रौपदी से लेकर इंद्राणी तक... जानें रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाएं

Raksha Bandhan Katha: रक्षाबंधन का पावन त्योहार इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार (raksha bandhan 2026 date) के दिन मनाया जा रहा है. भाई-बहन का सबसे बड़ा पर्व सनातन धर्म का एक बड़ा त्योहार है. बहनें इस दिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी आयु और खुशहाल जीवन की कामना करती है. भाई भी अपनी बहन की सदैव रक्षा करने का वचन देते हैं और भाई इस दिन बहनों को उपहार भी देते हैं. पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के पीछे की कहानी क्या है? आखिर इसकी पौराणिक कथा क्या है और कैसे देवी-देवताओं ने रक्षा की थी. रक्षाबंधन पर राखी बांधी जाती है, जो एक रक्षा सूत्र होता है. ये पवित्र धागा है, जिसको धारण करने से बुरी शक्तियों से बचा जाता है. आइए जानते हैं रक्षाबंधन की व्रत कथा के बारे में.

रक्षाबंधन व्रत कथाएं (Raksha Bandhan 2026)

1.भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी हुई है. इस कथा का उल्लेख महाभारत काव्य में है. कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से जब शिशुपाल का वध किया था तो उनकी उंगली कट गई थी. यह देखते ही द्रौपदी ने तुरंत ही अपनी साड़ी से एक हिस्सा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था. भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रति समर्पण को देख द्रौपदी से प्रसन्न हो गए और उन्हें जीवनभर रक्षा करने का वचन दे दिया. इस घटना की वजह से ही रक्षा करते हुए द्रौपदी के चीरहरण के दौरान भगवान कृष्ण ने उनकी सहायता की थी और उनकी लाज बचाई थी. हस्तिनापुर में उस दिन हुई सभा में कौरवों द्वारा लाख जतन के बाद भी वे द्रौपदी का चीरहरण नहीं कर पाए थे. इतना ही नहीं भगवान ने ऐसी लीला कि, जिसके चलते पूरी सभा के पुरुषों के शरीर से वस्त्र उतर गए थे और वे नग्न हो गए थे. यह कथा रक्षा और विश्वास के पवित्र बंधन को नई पहचान दिलाई थी.

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2.इंद्राणी और इंद्र की कथा

आज भले ही यह पर्व सिर्फ भाई-बहनों का पर्व बनकर रह गया हो लेकिन पहले के समय में रक्षा सूत्र सिर्फ बहनें नहीं पत्नियां भी बांधती है. भविष्य पुराण के अनुसार, जब देवराज इंद्र और असुरों के बीच देवासुर युद्ध हुआ था. तब देवता हारने लगे थे. इसके बाद गुरु बृहस्पति की सलाह के बाद देवराज इंद्र की पत्नी शचि यानी इंद्राणी ने अपने पति की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था. यह एक अभिमंत्रित पवित्र रक्षा का धागा था. उस रक्षा सूत्र के प्रभाव ने ही देवताओं को युद्ध में विजय हासिल करवाई थी और सभी देवों की रक्षा भी की थी. कहा जाता है कि इसके बाद ही रक्षाबंधन की परंपरा शुरू हुई थी.

3.राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा

पौराणिक कथाओं में राजा बलि और माता लक्ष्मी की रक्षाबंधन वाली कथा भी काफी प्रचलित है. दरअसल, भगवान विष्णु ने असुरराज राजा बलि को वचन देने के चलते पाताल लोक में निवास करना पड़ रहा था. इसलिए, माता लक्ष्मी उन्हें वापस लेने आई थी. हुआ यूं था कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी थी. भगवान ने दो पगों में आकाश और पृथ्वी को नाप लिया था. बलि इतने दानवीर थे कि उनकी भक्ति से भगवान प्रसन्न हो गए. इसके बाद उन्होंने राजा बलि को पाताल लोक में राज्य करने का अधिकार दे दिया और वचन के अनुसार वे उनके द्वारपाल बन गए. पति विष्णु के लंबे समय तक इंतजार में बैठी मात लक्ष्मी अब बैकुंठ से उन्हें खोजने निकली. तब देवर्षि नारद के सुझाव पर माता लक्ष्मी ने एक साधारण ब्राह्मणी का रूप धारण किया. उन्होंने सावन पूर्णिमा के दिन ही राजा बलि की कलाई पर राखी बांधी और उन्हें अपना भाई बनाया. भाई का पवित्र संबंध स्वीकार कर राजा बलि ने माता लक्ष्मी से मनचाहा उपहार मांगने की इच्छा जताई. तब मां लक्ष्मी अपने वास्तविक रूप में आई और उन्होंने भगवान विष्णु को अपने साथ बैकुंठ ले जाने का वचन मांग लिया, जिसे बलि ने निभाया. इसके बाद बलि ने भगवान विष्णु को लौटाया.

4.यमुना और यमराज की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मृत्यु के देवता यमराज और नदी रूपी यमुना, दोनो ही भाई-बहन हैं. एक बार लंबे समय तक यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने नहीं आए थे. तब यमुना के निमंत्रण पर वे कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया (भाई दूज) के दिन उनके घर पहुंचे, जहां यमुना ने उनका स्वागत कर तिलक लगाया और रक्षासूत्र बांधा था. इससे प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना को वरदान दिया कि जो बहन इस दिन अपने भाई का सत्कार करेगी, उसे यमराज का भय नहीं होगा. यमराज और यमुना, दोनों ही सूर्य देव की संतानें हैं और वे अपने-अपने दायित्वों को पूरा करने में लगे रहते थे. इस कार्य-व्यस्तता के कारण वे मिल नहीं पा रहे थे. इस दिन बहन यमुना ने अपने भाई का सत्कार किया था और उन्हें भोजन भी करवाया था. इसके बाद यमराज ने बहन को अमरता और स्नेह का वरदान दिया था. इस पवित्र कथा को भी भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के प्रतीक पर्व रक्षाबंधन और भाईदूज से जोड़ा जाता है.

रक्षाबंधन का महत्व (Raksha Bandhan Importance)

राखी का त्योहार सिर्फ धागा बांधने या फिर उपहार हासिल करने का नहीं होता है. इस त्योहार को भाई और बहन के प्रेम और विश्वास का पवित्र रिश्ता माना जाता है. इस दिन बहने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं. वहीं, भाई अपनी बहन की रक्षा का दायित्य लेते हैं. इस त्योहार के माध्यम से परिवार के सभी लोग आपस में मिलते-जुलते हैं और प्रेम बढ़ता है. इस दिन लोग जाति और धर्म से ऊपर उठकर इस त्योहार को मनाते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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नहीं चला वैभव सूर्यवंशी का बल्ला तो क्या... दलीप ट्रॉफी में RCB पूर्व स्टार प्लेयर ने मचाया गदर, खेली 167 रनों की मैराथन पारी

Vaibhav Sooryavansh : वैभव सूर्यवंशी इन दिनों टीम इंडिया के लिए नहीं खेल रहे हैं, तो वो घरेलू क्रिकेट में नजर आ रहे हैं. 15 साल के बाएं हाथ के विस्टोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी दलीप ट्रॉफी 2026 में खेल रहे हैं. वैभव ईस्ट जोन की ओर नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ खेल रहे हैं. दरअसल, 23 अगस्त से ईस्ट जोन बनाम नॉर्थ ईस्ट जोन के बीच दलीप ट्रॉफी का क्वार्टर फाइनल मैच खेला जा रहा है. इस मैच में वैभव सूर्यवंशी पहले दिन ईस्ट जोन की ओर से पारी की शुरुआत करने के लिए मैदान पर उतरे. 

वैभव सूर्यवंशी का बल्ला नहीं चला और वो सस्ते में पवेलियन लौट गए. वैभव सूर्यवंशी ने 6 बॉलों का सामना किया और 4 चौके लगाते हुए 133.33 की तूफानी स्ट्राइक रेट के साथ मात्र 8 रन बनाए. इस मैच में ईशान किशन भी एक बड़े खिलाड़ी थे, जो ईस्ट जोन के कप्तानी की भूमिका में नजर आ रहे हैं. उनका बल्ला भी पहली पारी के दौरान खामोश रहा लेकिन टीम के 2 खिलाड़ी ने धमाल बल्ले के साथ धमाल मचा दिया. 

आरसीबी के स्टार प्लेयर में मचाया गदर

इन खिलाड़ियों में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL)  में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के पूर्व क्रिकेटर शहबाज अहमद ने 167 रनों की मैराथन पारी खेलकर धमाल मचा दिया.  31 वर्षीय स्पिन ऑलराउंडर शहबाज अहमद ने नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते हुए टीम को संभाला. उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान 244 बॉल का सामना किया और 17 चौके और 4 छक्कों की मदद से 167 रनों की पारी खेली. इस पारी के दौरान उनका स्ट्राइक रेट 68.44 का रहा.

शहबाज अहमद की इस शानदार पारी की बदौलत ईस्ट जोन ने पहली पारी में 112.5 ओवर में 10 विकेट के नुकासान पर कुल 467 रन बनाए. टीम के लिए कुमार कुशाग्र ने 55 रनों की अर्धशतकीय पारी खेली. वहीं अनुकूल रॉय ने 37 और मोहम्मद शमी ने 11 रनों का योगदान दिया. इनके अलावा सुदीप कुमार घरामी ने शतकीय पारी खेली.

सुदीप कुमार घरामी के बल्ले से भी निकला शतक

ईशान किशन की टीम ईस्ट जोन के बल्लेबाज सुदीप कुमार घरामी ने भी धमाल मचाया और बल्ले के साथ शतकीय पारी खेल डाली. घरामी ने 185 बॉल का सामना अपनी पारी के दौरान किया. इस दौरान उन्होंने 25 चौके और 1 छक्का लगाया. उनके बल्ले से 146 रनों की आतिशी पारी निकली. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 78.92 का रहा है.

दलीप ट्रॉफी 2026-27 के इस मुकाबले में नॉर्थ ईस्ट जोन की टीम ने अब तक 8.4 ओवर में बगैर कोई विकेट खोए 16 रन बना लिए हैं. टीम के लिए इस समय क्रीज पर सलामी बल्लेबाज जोसेफ ललथनखुमा 10 और अर्पित सुभाष भटेवारा 9 रन बनाकर नाबाद बल्लेबाजी कर रहे हैं. ईस्ट जोन के लिए अब तक मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार 4-4 ओवर गेंदबाजी कर चुके हैं. इस दौरान शमी ने 4 और मुकेश ने 5 रन खर्च किए हैं. इन दोनों को कोई विकेट अभी तक नहीं मिला है. 

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Sanjay Bangar की बेटी Anaya Bangar को Australia में मिली बड़ी राहत, अब महिला कम्युनिटी क्रिकेट में दिखाएंगी दम

क्रिकेट से दोबारा जुड़ने की उम्मीद कर रही अनाया बांगर के लिए ऑस्ट्रेलिया से अच्छी खबर सामने आई है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर की संतान अनाया को ऑस्ट्रेलिया में महिला सामुदायिक क्रिकेट खेलने की अनुमति मिल गई है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की ओर से मिली मंजूरी के बाद वह तत्काल प्रभाव से सामुदायिक स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकती हैं।

अनाया ने मार्च 2026 में लिंग-पुष्टिकरण से जुड़ी शल्य चिकित्सा कराई थी। इसके बाद उनके लिए क्रिकेट में वापसी का रास्ता आसान नहीं था। अनाया ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि एक समय उन्हें लगा था कि वह शायद दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी, लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें फिर से मैदान पर उतरने का मौका दिया है। उन्होंने इस फैसले को अपने लिए बेहद खास दिन बताया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अनाया पहले मुंबई की आयु वर्ग की क्रिकेट टीम में खेल चुकी हैं। उस दौरान उन्होंने सरफराज खान और उनके भाई मुशीर खान के साथ भी क्रिकेट खेला था। क्रिकेट से उनका जुड़ाव नया नहीं है और यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया में सामुदायिक क्रिकेट खेलने की अनुमति उनके लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालांकि, अनाया के लिए शीर्ष स्तर की महिला क्रिकेट में खेलने की राह फिलहाल अलग नियमों से जुड़ी हुई है। महिला बिग बैश लीग जैसी विशिष्ट प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए उन्हें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की लिंग-पार और लिंग-विविध खिलाड़ियों से संबंधित विशिष्ट क्रिकेट नीति के तहत खिलाड़ी के रक्त में सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर लगातार कम से कम 12 महीने तक 10 नैनोमोल प्रति लीटर से नीचे रहना जरूरी है। अनाया की विशिष्ट क्रिकेट में पात्रता मार्च 2027 से इस शर्त के पूरा होने पर निर्भर करेगी।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की अखंडता प्रमुख जैकी पार्ट्रिज ने अनाया को भेजे पत्र में कहा है कि मार्च 2027 में विशिष्ट क्रिकेट के लिए पात्रता का आकलन उनके ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर कराए जाने वाले रक्त परीक्षण और नीति की अन्य शर्तों के आधार पर होगा। जांच में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनका टेस्टोस्टेरोन स्तर निर्धारित सीमा के भीतर है।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने 2023 में महिला वर्ग की विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को लेकर ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की पात्रता संबंधी नीति में बदलाव किया था। इसके तहत पुरुष यौवन की अवस्था से गुजर चुके ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिला वर्ग की विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने से बाहर रखा गया था।

वहीं, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के फैसले में सामुदायिक और विशिष्ट क्रिकेट के बीच स्पष्ट अंतर रखा गया है। जैकी पार्ट्रिज के अनुसार, मार्च 2027 तक अनाया ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र की प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकती हैं, क्योंकि इन्हें सामुदायिक क्रिकेट की श्रेणी में रखा गया है।

इस फैसले के साथ अनाया के लिए क्रिकेट में वापसी का तत्काल रास्ता खुल गया है। अब उनकी नजर मैदान पर वापसी और सामुदायिक क्रिकेट में अपने प्रदर्शन के जरिए आगे बढ़ने पर है।
Tue, 25 Aug 2026 21:38:00 +0530

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