Jaggery Plant Accident: ‘भाई बचा लो...’ चिल्लाता रहा युवक, उबलती चाशनी में फंसा रहा करीब 1 मिनट, सामने आया खौफनाक VIDEO
Sugarcane Jaggery Plant Accident: महाराष्ट्र में काम करने गए लखीमपुर के 25 साल के युवक की दर्दनाक मौत हो गई. वो गुड़ की उबलती चाशनी की कड़ाही में गिर गया था. करीब एक मिनट तक वो अंदर फंसा रहा और मदद के लिए चिल्लाता रहा.
Parenting Tips: बच्चे को हर बात पर टोकना छोड़ दें, अपनाएं ये तरीका; खुद फैसले लेना सीखेगा
Let Them Lead : पैरेंटिंग में बच्चे को सही-गलत समझाना जरूरी है, लेकिन हर काम अपनी मर्जी से करवाना सही नहीं होता। अपने तरीके से लीड करने देने से माता-पिता बच्चे को यह तय करने का मौका देते हैं कि वह क्या खेलना या करना चाहता है।
उदाहरण के लिए, अगर बच्चा खिलौनों से खेल रहा है तो पहले देखें कि वह खुद क्या करना चाहता है। फिर उसकी पसंद के खेल में शामिल हों और जरूरत पड़ने पर ही मदद या सलाह दें। जानें बच्चे की बात सुनने और समझने के 5 आसान तरीके।
1. बच्चे की बात पूरी सुनें
बच्चा स्कूल या दोस्तों से जुड़ी कोई बात बता रहा हो तो तुरंत सलाह देने के बजाय पहले उसकी बात पूरी सुनें। बीच में कुछ कहने से पहले पूछें कि उसे कैसा लगा और वह खुद इस बारे में क्या सोचता है। इससे बच्चे को लगता है कि उसकी बात को गंभीरता से सुना जा रहा है।
2. खेल का फैसला बच्चे को करने दें
खेलते समय हर चीज अपने हिसाब से चलाने की जरूरत नहीं है। बच्चे को तय करने दें कि वह कौन सा खेल खेलना चाहता है । अगर बच्चा ब्लॉक्स से घर बना रहा है, तो उसे यह बताने के बजाय कि घर कैसा होना चाहिए, उसके साथ बैठकर उसकी बनाई चीज को देखें। इस तरह बातचीत भी होगी और बच्चे की कल्पना को भी जगह मिलेगी।
3. हर बात पर सवाल न पूछें
बच्चे के साथ समय बिताते हुए लगातार सवाल पूछना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए, “तुमने कारों के लिए पूरा रास्ता बना दिया।” इसके बाद बच्चे को खुद बताने का मौका दें। इससे बातचीत ज्यादा स्वाभाविक रह सकती है।
4. बच्चे की भावनाओं को समझने की कोशिश करें
बच्चा गुस्सा या उदास हो तो उसकी भावना को समझने की कोशिश करें। आप कह सकते हैं,“तुम इस बात से परेशान लग रहे हो।” इससे बच्चे को अपनी भावना पहचानने और उसे शब्दों में बताने में मदद मिल सकती है।
5. हर छोटी गलती पर न टोकें
बच्चा खेलते समय कोई चीज आपके तरीके से नहीं कर रहा है तो हर बार उसे सुधारना जरूरी नहीं है। माता-पिता उसकी तारीफ कर सकते हैं, उसकी नकल कर सकते हैं या उसकी बात को दोहरा सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे को हर चीज की खुली छूट दे दी जाए।
‘Let Them Lead’ का मतलब मनमानी नहीं
इस पैरेंटिंग तरीके का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को हर फैसला खुद लेने दिया जाए या माता-पिता उसकी हर बात मान लें। इसका सीधा मतलब है कि जहां बच्चे को अपनी पसंद जाहिर करने की आजादी दी जा सकती है, वहां उसे पहल करने का मौका दें। माता-पिता बच्चे के साथ रहें, उसकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर सही दिशा दिखाएं।
बच्चे के साथ रोज थोड़ा ‘नो-इंस्ट्रक्शन टाइम’ रखें
इसके लिए कोई नियम बनाने की जरूरत नहीं है। रोज कुछ समय सिर्फ बच्चे के साथ बिताएं। मोबाइल को दूर रखें, उसकी बात सुनें और उसकी पसंद की एक्टिविटी में शामिल हों। बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसकी पसंद की भी अहमियत है।
यह भी पढ़ें: पब्लिक में बच्चे की जिद कर देती है शर्मिंदा? इन 5 स्मार्ट टिप्स से करें स्थिति कंट्रोल
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Asianetnews
Haribhoomi






/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)

