Raksha Bandhan 2026: पंचक में पड़ रहा रक्षाबंधन, क्या इस दौरान भाई को बांध सकते हैं राखी? जानें नियम
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुखी जीवन की कामना करती है। हालांकि, इस बार रक्षाबंधन के आसपास पंचक का संयोग होने के कारण शुभ कार्यों को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति है।
ज्योतिषीय मान्यताओं में पंचक को पांच नक्षत्रों का विशेष संयोग माना गया है। इस अवधि में कुछ कार्यों को वर्जित बताया गया है। हालांकि, पंचक का अर्थ यह नहीं है कि इस दौरान हर काम अशुभ होता है।
क्या पंचक में बांध सकते हैं राखी?
हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान भाई को राखी बांधी जा सकती है। पंचक को रक्षाबंधन जैसे पर्व पर राखी बांधने में बाधक नहीं माना जाता। इसलिए बहनें पंचक के दौरान भी भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि, राखी बांधने का समय तय करते समय स्थानीय पंचांग और उस दिन के शुभ मुहूर्त को देखना बेहतर माना जाता है।
क्या होता है अग्नि पंचक?
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब पंचक की शुरुआत मंगलवार या गुरुवार से होती है तो इसे अग्नि पंचक कहा जाता है। अग्नि पंचक के दौरान विशेष रूप से निर्माण कार्य, नई मशीनरी खरीदने या औजारों से जुड़े काम करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस अवधि में आग, दुर्घटना या नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं, विवाद या कानूनी मामलों से जुड़े कुछ कार्यों को इस अवधि में किया जा सकता है, ऐसी भी ज्योतिषीय मान्यता है।
पंचक में किन कामों से बचना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।
दक्षिण दिशा में यात्रा
पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा को शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता में दक्षिण दिशा को यम की दिशा से जोड़कर देखा जाता है।
लकड़ी और ज्वलनशील सामान जमा करना
धनिष्ठा नक्षत्र से जुड़े पंचक में लकड़ी, घास और अन्य ज्वलनशील सामग्री इकट्ठा करने से बचने की मान्यता है।
नया पलंग या चारपाई बनवाना
पंचक के दौरान पलंग या चारपाई बनवाने अथवा खरीदने को लेकर भी धार्मिक मान्यताओं में सावधानी बरतने की बात कही गई है।
घर की छत का निर्माण
इस अवधि में घर की छत या लेंटर डालने जैसे निर्माण कार्यों को भी वर्जित माना जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा करने से घर में परेशानी या आर्थिक नुकसान हो सकता है।
अंतिम संस्कार
धार्मिक मान्यताओं में पंचक के दौरान मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय परंपरा और विद्वान की सलाह के अनुसार निर्धारित शांति कर्म किए जाते हैं।
पंचक में क्या खरीदना नहीं चाहिए?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान लकड़ी, लोहा, चारपाई और नए कपड़े खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस अवधि में इन चीजों की खरीदारी करने से नुकसान हो सकता है। हालांकि, इन मान्यताओं का पालन व्यक्ति अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करता है।
क्या पंचक में शुभ काम किए जा सकते हैं?
पंचक को पूरी तरह अशुभ अवधि नहीं माना जाता। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और बड़े निर्माण कार्य जैसे कुछ मांगलिक कार्यों को पंचक में करने से बचने की सलाह दी जाती है।
वहीं सामान्य दिनचर्या, पूजा-पाठ और कुछ जरूरी कार्य पंचक के दौरान किए जा सकते हैं। किसी विशेष शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर होता है।
पंचक को अशुभ क्यों माना जाता है?
ज्योतिष में धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती इन पांच नक्षत्रों के संयोग को पंचक कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचक में किए गए कुछ कार्यों का प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है या उनकी पुनरावृत्ति हो सकती है। इसी वजह से इस अवधि में कुछ विशेष कामों को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा चली आ रही है।
डिस्क्लेमर: पंचक, उसके नियम और शुभ-अशुभ प्रभाव से जुड़ी बातें धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता। अलग-अलग पंचांग और परंपराओं में नियमों में अंतर हो सकता है।
Sawan Pradosh 2026: नहीं मिल रहा मनचाहा जीवनसाथी? अंतिम प्रदोष पर शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें
Sawan Pradosh 2026: कई बार पढ़ाई-लिखाई और करियर में सब कुछ ठीक होने के बावजूद विवाह के लिए सही रिश्ता नहीं मिल पाता या बात बनते-बनते रुक जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में कुंडली के कुछ ग्रहों और सप्तम भाव को विवाह से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को विवाह संबंधी मनोकामनाओं के लिए विशेष माना जाता है। सावन का अंतिम प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026 को है। मान्यता के अनुसार इस दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करने से विवाह संबंधी बाधाओं के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान सोमवार के साथ-साथ प्रदोष व्रत का भी विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इस बार सावन मास का अंतिम प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026 को रखा जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर विवाह में देरी हो रही है या लंबे समय से सही रिश्ता नहीं मिल रहा है तो सावन प्रदोष के दिन शिव-पार्वती की पूजा और कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
शिवलिंग पर जल और 11 बेलपत्र चढ़ाएं
विवाह की मनोकामना रखने वाले लोग प्रदोष के दिन सुबह शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल और 11 बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव के मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ शिव आराधना करने से मनोकामना के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कुंदकेश्वर महादेव का स्मरण कर चढ़ाएं जल
दिए गए धार्मिक संदर्भ के अनुसार, विवाह की इच्छा रखने वाले भक्त दो लोटे जल लेकर शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं। जल चढ़ाते समय कुंदकेश्वर महादेव का स्मरण करने की मान्यता है। यह उपाय विशेष रूप से विवाह संबंधी मनोकामना के लिए किया जाता है।
अशोक सुंदरी के स्थान पर लगाएं हल्दी
शिवलिंग के पास माता पार्वती से संबंधित अशोक सुंदरी के स्थान पर शुद्ध घी या हल्दी की बिंदी लगाने की परंपरा भी कुछ धार्मिक मान्यताओं में बताई गई है। इस दौरान माता पार्वती से विवाह संबंधी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की जा सकती है।
108 बेलपत्र पर चंदन लगाकर करें अर्पित
प्रदोष के दिन 108 बेलपत्र लेकर उन पर सफेद या पीला चंदन लगाया जा सकता है। इसके बाद ‘ॐ गौरी शंकराय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए एक-एक बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करने की मान्यता है। यह उपाय शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना से जुड़ा माना जाता है।
शिवलिंग पर हल्दी या केसर चढ़ाएं
प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर थोड़ी हल्दी या केसर अर्पित करने की भी धार्मिक मान्यता है। विवाह में आ रही बाधाओं के लिए भक्त श्रद्धा के साथ यह उपाय कर सकते हैं।
108 बार करें मंत्र का जाप
विवाह की मनोकामना रखने वाले लोग ‘ॐ गौरीशंकराय नमः’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा दिए गए मंत्र का भी जाप करने की परंपरा बताई गई है:
‘ॐ नमः मनोभिलाषितं वरं देहि वरं ह्रीं ॐ गोरा पार्वती देव्यै नमः’
मंत्र का जाप 108 बार करने की धार्मिक मान्यता है।
ध्यान रखें
ये उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनसे विवाह निश्चित होने की वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। विवाह से जुड़ा निर्णय लेते समय व्यक्तिगत परिस्थितियों, आपसी समझ और व्यावहारिक पहलुओं को भी महत्व देना चाहिए।
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