Assam लॉन्च करेगा अपना Satellite, Private Partner चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार अपना उपग्रह प्रक्षेपित करने के लिए निजी क्षेत्र से साझेदार चुनने की प्रक्रिया के अंतिम चरण में है। शर्मा ने दावा किया कि असम भारत का पहला ऐसा राज्य होगा, जिसके पास अपनी पृथ्वी अवलोकन प्रणाली होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ‘डीबीएलओटीटी मॉडल’ के तहत उपग्रह संचालित करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इस साल की शुरुआत में हमने डीबीएलओटीटी मॉडल (डिजाइन, निर्माण, प्रक्षेपण, संचालन, प्रशिक्षण और हस्तांतरण) के तहत कार्यान्वयन साझेदार का चयन करने के लिए अभिरुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित की थी।’’ शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत की निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की कंपनियों की ओर से मजबूत रुचि दिखाए जाने के बाद अब हम साझेदार के चयन के अंतिम और महत्वपूर्ण चरण में हैं। इसके लिए गठित समितियां प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रही हैं।’’ उन्होंने कहा कि ‘असमसैट’ एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। शर्मा ने कहा कि असम अब केवल उपग्रह डेटा का उपयोग करने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय भागीदार बनेगा।
इससे शासन व्यवस्था में तेजी आएगी और फैसले साक्ष्यों पर आधारित होंगे। पिछले साल मार्च में 2025-26 का राज्य बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री अजंता नियोग ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार अपना उपग्रह बनाएगी। उन्होंने कहा था कि इससे महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए डेटा जुटाने में मदद मिलेगी और राज्य की सीमा पर निगरानी भी रखी जा सकेगी।
Sunil Ambekar बोले: अति-वामपंथी आंदोलन कमजोर होने पर मुख्यधारा की पार्टियों में गए
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता सुनील आंबेकर ने रविवार को आरोप लगाया कि दुनिया भर में मार्क्सवाद और भारत में नक्सलवाद जैसे अति-वामपंथी आंदोलनों से जुड़े लोग इनके कमजोर पड़ने के बाद मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो गए। आंबेकर ने कहा कि उनके ‘मायावी रूप’ की पहचान की जानी चाहिए और उसे खत्म किया जाना चाहिए। आंबेकर ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में नक्सलियों के हाथों मारे गए दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं पर लिखी एक पुस्तक के विमोचन के बाद कहा, ‘‘यह दुनियाभर में देखने को मिला है।
मार्क्सवाद, माओवाद या भारत में नक्सलवाद...इनके विफल होने के बाद वे मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल होने लगे।’’ उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में वे डेमोक्रेटिक पार्टी और ब्रिटेन में लेबर पार्टी में शामिल हो गए। आरएसएस नेता ने कहा कि भारत में भी देखा जा रहा है कि वे मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो गए हैं। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख आंबेकर ने कहा कि इस तरह का प्रयोग दुनियाभर में चल रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में वर्णित राक्षसों के ‘मायावी’ रूप के समान हैं। उन्होंने कहा कि इन तत्वों को लगातार समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘उनके मायावी रूप को समझकर उन्हें खत्म करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’’ आंबेकर ने आरोप लगाया कि भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन का मूल चरित्र, चाहे वह माकपा, भाकपा, नक्सली या आज के ‘‘शहरी नक्सली’’ हों, आमतौर पर देश की सुरक्षा, एकता और विकास के खिलाफ रहा है।
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