बुक रिव्यू: 14वें दलाई लामा की आत्मकथा:अपने देश और लोगों के लिए 70 साल का संघर्ष, प्रेम, करुणा और उम्मीद की सच्ची कहानी
किताब: ‘दलाई लामा खामोश लोगों की ओर से’ ('वॉइस फॉर द वॉइसलेस' किताब का हिंदी अनुवाद) लेखक: 14वें दलाई लामा अनुवाद: चमन लाल गुप्त प्रकाशक: युवान बुक्स मूल्य: 299 रुपए दलाई लामा ने अपना घर, मातृभूमि और संस्कृति खोने के बावजूद संवाद, करुणा और अहिंसा का रास्ता चुना। उनकी किताब ‘दलाई लामा: खामोश लोगों की ओर से’ तिब्बत के करीब 75 वर्षों के संघर्ष का दस्तावेज है। यह उस व्यक्ति की आत्मकथा है, जिसने कम उम्र में ही तिब्बत की जिम्मेदारी संभाली, देश से दूर होने का दर्द झेला, लेकिन शांति और अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा। किताब राजनीति की बहस से आगे जाकर इंसानी गरिमा, सांस्कृतिक पहचान और उम्मीद की बात करती है। दलाई लामा अपने व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए बताते हैं कि कैसे चीन के साथ दशकों तक बातचीत की कोशिशों के बावजूद तिब्बत का सवाल आज भी अनसुलझा है। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी हिंसा का समर्थन नहीं किया। यही इस किताब की सबसे बड़ी ताकत है। लेखक का परिचय 14वें दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे सम्मानित स्पिरिचुअल लीडर्स में से एक हैं। मात्र दो वर्ष की उम्र में तेनजिन को 13वें दलाई लामा का पुनर्जन्म माना गया। बाद में उन्हें 14वें दलाई लामा के रूप में मान्यता मिली। 15 वर्ष की उम्र में, चीन की सेना के तिब्बत में प्रवेश के बीच उन्होंने तिब्बत की पूर्ण राजनीतिक सत्ता संभाली। इसके बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं और 1959 में उन्हें भारत आकर निर्वासन में रहना पड़ा। तब से वे भारत में रहते हुए तिब्बती संस्कृति, शिक्षा और शांति के संदेश को दुनिया भर में पहुंचा रहे हैं। उन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह किताब क्यों खास है? किताब में दलाई लामा पहली बार अपने सात दशकों के संघर्ष को विस्तार से बताते हैं। वे बताते हैं कि किशोरावस्था से लेकर आज तक उन्होंने माओ त्से तुंग, देंग शियाओपिंग, जियांग जेमिन, हू जिंताओ और शी चिनफिंग जैसे चीनी नेताओं के साथ अलग-अलग समय पर संवाद की कोशिश की। उनका उद्देश्य कभी युद्ध नहीं था, बल्कि तिब्बती लोगों की भाषा, संस्कृति, धर्म और पहचान को बचाना था। किताब पढ़ते हुए महसूस होता है कि यह अपने लोगों के लिए चिंतित एक आध्यात्मिक गुरु की आत्मस्वीकृति है। लेखक कहीं भी कटु भाषा का प्रयोग नहीं करते। वे बार-बार संवाद, करुणा और सह-अस्तित्व की बात करते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी नैतिक शक्ति बनकर सामने आती है। ‘पहचान बचाना भी संघर्ष है’ दलाई लामा इस किताब में बताते हैं कि किसी देश की हार केवल उसकी जमीन खोने से नहीं होती। उसकी हार तब होती है, जब उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराएं मिटने लगती हैं। इसलिए उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक अस्तित्व का संघर्ष है। वे बार-बार कहते हैं कि तिब्बत की पहचान बचाना सिर्फ पूरी मानवता की सांस्कृतिक विविधता का प्रश्न है। इसीलिए वे दुनिया से आग्रह करते हैं कि तिब्बत को केवल एक भू-राजनीतिक विवाद की तरह न देखें, बल्कि एक ऐसी सभ्यता के रूप में देखें, जिसकी अपनी अलग विरासत है। संघर्ष नहीं, समाधान का रास्ता किताब का सबसे महत्वपूर्ण विचार 'मिडिल वे अप्रोच' है। दलाई लामा साफ करते हैं कि उनका उद्देश्य चीन से अलग स्वतंत्र राष्ट्र बनाना नहीं है। वे चाहते हैं कि तिब्बत चीन के भीतर रहते हुए भी वास्तविक स्वायत्तता प्राप्त करे, ताकि वहां के लोग अपनी भाषा, धर्म, संस्कृति और जीवनशैली को सुरक्षित रख सकें। यह दृष्टिकोण किताब को राजनीतिक नारों से अलग करता है। दलाई लामा का मानना है कि संवाद और आपसी सम्मान के जरिए ऐसा समाधान संभव है, जिससे चीन और तिब्बत दोनों का भविष्य सुरक्षित हो सके। तिब्बत का संघर्ष केवल जमीन का नहीं दलाई लामा इस किताब में बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, धर्म और परंपराओं से बनती है। उनके अनुसार, अगर ये चीजें धीरे-धीरे खत्म होने लगें तो किसी भी समुदाय का अस्तित्व संकट में पड़ जाता है। यही कारण है कि वे तिब्बत के मुद्दे को सांस्कृतिक संरक्षण का प्रश्न मानते हैं। किताब में कई जगह यह चिंता दिखाई देती है कि तिब्बती भाषा, शिक्षा, धार्मिक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत लगातार दबाव में हैं। इसके बावजूद लेखक निराशा की बजाय उम्मीद का संदेश देते हैं। उनका विश्वास है कि यदि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे तो संस्कृति को जीवित रखा जा सकता है। पूरी दुनिया से जुड़ा है तिब्बत का पर्यावरण किताब का एक महत्वपूर्ण हिस्सा तिब्बत के पर्यावरण पर भी केंद्रित है। दलाई लामा बताते हैं कि तिब्बत के पठार केवल तिब्बतियों की धरोहर नहीं है। यहां से निकलने वाली नदियां एशिया के करोड़ों लोगों को पानी उपलब्ध कराती हैं। इसलिए तिब्बत के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा दुनिया की नैतिक जिम्मेदारी है। दलाई लामा का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और मानवता का भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर तिब्बत के पठार का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता है तो उसका असर पूरे एशिया पर पड़ेगा। इस तरह किताब राजनीतिक चर्चा से आगे बढ़कर जलवायु और पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों को भी सामने लाती है। सबसे बड़ी ताकत है करुणा किताब को पढ़ते हुए सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बात यह है कि दलाई लामा सात दशक लंबे संघर्ष के बाद भी कटुता की भाषा नहीं बोलते। वे मानते हैं कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। इसलिए वे लगातार बातचीत, आपसी सम्मान और शांति पर जोर देते हैं। यही दृष्टिकोण इस किताब को दूसरे संस्मरणों से अलग बनाता है। किताब के बारे में मेरी राय किताब एक ऐसे व्यक्ति की आत्मकथा भी है, जिसने अपना देश खो दिया, लेकिन उम्मीद नहीं खोई। इसे पढ़ते हुए महसूस होता है कि लेखक किसी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की बजाय अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से पाठक को सोचने पर मजबूर करते हैं। किताब की सबसे बड़ी खूबी इसकी ईमानदारी है। दलाई लामा अपने संघर्षों, असफल वार्ताओं और निराशाओं को भी उतनी ही सादगी से लिखते हैं, जितनी सहजता से अपने विश्वास और उम्मीद की बात करते हैं। भाषा सरल है और घटनाओं का क्रम स्पष्ट है। इसलिए इतिहास में रुचि रखने वाले पाठक भी इसे आसानी से पढ़ सकते हैं। …………… ये बुक रिव्यू भी पढ़ें बुक रिव्यू- अंतरिक्ष से पृथ्वी कैसी दिखती है: देशों की सीमाएं, राजनीति और युद्ध नहीं, दुनिया को देखने का नया नजरिया देती एक किताब क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष से पृथ्वी कैसी दिखती होगी? वहां से देशों की सीमाएं नहीं दिखतीं, न राजनीति, न युद्ध और न ही इंसानों के बंटवारे। सिर्फ एक नीला ग्रह दिखाई देता है, जिस पर पूरी मानवता रहती है। मशहूर लेखिका समैंथा हार्वी की किताब 'ऑर्बिटल' इसी नजरिए से दुनिया को दिखाने की कोशिश करती है। पूरी खबर पढ़ें…
साइबर लिटरेसी- रक्षाबंधन पर साइबर फ्रॉड का रिस्क:ऑनलाइन राखी खरीदते हुए बरतें 9 सावधानियां, जानें किसी भी स्कैम से कैसे बचें
रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है। इस दौरान लोग ऑनलाइन राखी, मिठाई और गिफ्ट ऑर्डर करते हैं। बढ़ती ऑनलाइन खरीदारी के साथ साइबर ठग भी एक्टिव हो जाते हैं। वे लोगों को ठगने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाते हैं। स्कैमर्स फर्जी शॉपिंग वेबसाइट के जरिए सोशल मीडिया पर भारी डिस्काउंट और एक्सप्रेस डिलीवरी के लुभावने ऑफर दिखाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। कई मामलों में पेमेंट लेने के बाद सामान डिलीवर नहीं किया जाता, जबकि कुछ लोगों को नकली या खराब क्वालिटी का प्रोडक्ट भेज दिया जाता है। इसलिए आज 'साइबर लिटरेसी' में ऑनलाइन राखी और गिफ्ट ऑर्डर के दौरान होने वाले साइबर फ्रॉड पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- त्योहारों के दौरान फ्रॉड के मामले क्यों बढ़ जाते हैं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- रक्षाबंधन के आसपास किस तरह के फ्रॉड ज्यादा होते हैं? जवाब- इस दौरान स्कैमर लोगों को ठगने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। ग्राफिक में सभी साइबर फ्रॉड देखिए- इन स्कैम के बारे में विस्तार से समझिए- 1. फेक शॉपिंग वेबसाइट 2. वॉट्सएप पर गिफ्ट स्कैम 3. फेक कूरियर स्कैम 4. फेक कैशबैक स्कैम 5. फेक कस्टमर केयर 6. फेक ट्रैकिंग लिंक 7. रिफंड स्कैम सवाल- ऑनलाइन गिफ्ट ऑर्डर करने से पहले कैसे चेक करें कि वेबसाइट असली है या नहीं? फर्जी वेबसाइट कैसे पहचानें? जवाब- कुछ ऐसे संकेत हैं, जिनसे फर्जी वेबसाइट की पहचान की जा सकती है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- क्या सोशल मीडिया पर दिखने वाले एड भरोसेमंद होते हैं? जवाब- नहीं, स्कैमर्स भी फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी शॉपिंग एड चलाते हैं। इसमें वे भारी छूट, सीमित समय के ऑफर या एक्सप्रेस डिलीवरी का दावा करते हैं। ऐसे विज्ञापनों पर क्लिक करते ही लोग स्कैम का शिकार हो जाते हैं। सवाल- ऑनलाइन राखी खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- ऑनलाइन राखी खरीदते समय थोड़ी-सी सावधानी आपको साइबर फ्रॉड से बचा सकती है। खरीदारी से पहले इन बातों का ध्यान रखें- सवाल- राखी भेजते समय क्या सावधानी बरतें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- गिफ्ट या राखी ट्रैक करने का सही तरीका क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- रक्षाबंधन के दौरान साइबर फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें? जवाब- त्योहारों के दौरान थोड़ी-सी सतर्कता आपको साइबर ठगी से बचा सकती है। इसलिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें- सवाल- अगर ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, तुरंत कुछ कदम उठाएं- सवाल- साइबर फ्रॉड की शिकायत कहां और कैसे करें? जवाब- इसके लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में भी शिकायत कर सकते हैं। ……………………… ये खबर भी पढ़ें…. साइबर लिटरेसी- मोबाइल टावर लगाने के नाम पर फ्रॉड:मोटी कमाई के लालच में न आएं, एक्सपर्ट से समझें कि इस स्कैम से कैसे बचें फर्ज करिए, आपके पास खेत, खाली प्लॉट या मकान की बड़ी छत है। एक दिन अचानक कॉल या मैसेज आता है कि आप वहां मोबाइल टावर लगवाकर हर महीने 30-50 हजार रुपए किराया कमा सकते हैं। कई लोग बिना कोई जांच-पड़ताल किए इस आकर्षक ऑफर पर भरोसा कर लेते हैं। ये खबर भी पढ़ें….
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