Gorakhpur में PAC जवानों ने Rapti नदी में कूदे युवक को बचाया, सुरक्षित निकाला
गोरखपुर में प्रादेशिक सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) की 26वीं बटालियन की बाढ़ राहत टीम ने रविवार सुबह कथित तौर पर आत्महत्या के लिए राप्ती नदी में छलांग लगाने वाले एक युवक को बचा लिया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के निवासी युवक की पहचान लड्डू मांझी (25) के तौर पर हुई है।
बताया जा रहा है कि उसने सुबह करीब नौ बजे गीडा थाना इलाके में रामघाट के पास नदी में छलांग लगाई। चश्मदीदों ने बताया कि पानी में कूदने के कुछ ही देर बाद वह तेज बहाव में डूबने लगा। पुलिस ने कहा कि इलाके में बाढ़ बचाव की तैयारियों के प्रशिक्षण और बचाव कार्यों के लिए तैनात पीएसी की बाढ़ राहत टीम ने तुरंत मोटरबोट का इस्तेमाल करके अभियान शुरू किया।
पुलिस के अनुसार बचाव दल ने डूबते हुए व्यक्ति तक समय रहते पहुंचकर उसे नदी से सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने बताया कि किनारे लाने के बाद मांझी को प्राथमिक उपचार दिया गया और उसकी हालत स्थिर बताई गई है। बाद में उसे आगे की कार्रवाई के लिए नौसड़ चौकी पुलिस को सौंप दिया गया।
गीडा थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) अश्वनी पांडे ने बताया कि युवक सुरक्षित है और उसके परिवार वालों से संपर्क करके घटना के बारे में जानकारी दे दी गई है। पीएसी की बाढ़ राहत टीम ने यह सफल बचाव अभियान चलाया, जिसमें हेड कांस्टेबल बलदेव प्रसाद, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार और रवि गौतम समेत विभिन्न जवान शामिल थे। पुलिस ने बताया कि बाढ़ राहत और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए टीम को इलाके में तैनात किया गया है।
Kerala High Court ने MVD को लगाई फटकार, बाढ़ राहत में अवैध लाइट वाली SUV पर मांगा कड़ा एक्शन
केरल उच्च न्यायालय ने इस महीने की शुरुआत में अरनमुला में बाढ़ राहत कार्यों के दौरान अनधिकृत लाइट और अन्य बदलाव वाली ‘मॉडिफाइड’ एसयूवी गाड़ी के इस्तेमाल के खिलाफ कोई असरदार कार्रवाई नहीं होने पर मोटर वाहन विभाग (एमवीडी) की आलोचना की है। न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्णा एस. की खंडपीठ ने सड़क सुरक्षा और गाड़ियों में गैर-कानूनी बदलाव से जुड़े मामलों की सुनवाई की। उन्होंने वाहन और 21 अगस्त को उस पर की गई कार्रवाई के बारे में परिवहन आयुक्त की रिपोर्ट की जांच की।
यह निजी गाड़ी तब अदालत के ध्यान में आई जब अडूर में मोटर वाहन विभाग के दो अधिकारियों को इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने बाढ़ राहत कार्य से लौट रही इस गाड़ी का गैर-कानूनी बदलावों और प्रदूषण प्रमाणपत्र न होने के कारण चालान काटा था। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि 20 अगस्त, 2026 की परिवहन आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार, एमवीडी प्रवर्तन प्रकोष्ठ ने गाड़ी पर सिर्फ 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया था, जबकि उसमें छह अतिरिक्त अवैध लाइट लगी थीं और अदालत के बार-बार निर्देश भी दिए गए थे। अदालत ने इस बात का संज्ञान लिया कि गाड़ी के खिलाफ 11 मार्च, 2024 को जारी चालान लंबित रहा और उसका इस्तेमाल अनधिकृत लाइट एवं अन्य बदलावों के साथ एक बार फिर सार्वजनिक रूप से किया गया जो सड़क पर अन्य लोगों के लिए गंभीर खतरा है।
अदालत ने एमवीडी प्रवर्तन प्रकोष्ठ और पुलिस को पहले के आदेश का कड़ाई से अनुपालन करने का निर्देश दिया। मामले में सात सितंबर को पुन: सुनवाई होगी।
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