Delhi News: द्वारका में रक्षा मंत्रालय की 30 वर्षीय महिला अधिकारी की संदिग्ध मौत, पति-ससुराल वालों पर FIR
पश्चिमी दिल्ली के द्वारका क्षेत्र के भरथल गांव में रक्षा मंत्रालय में तैनात 30 वर्षीय महिला अधिकारी नाजिया खानम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। नाजिया खानम रक्षा मंत्रालय में सहायक अनुभाग अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। मामले में द्वारका जिला पुलिस ने उनके पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और 108 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को मिली आत्महत्या की सूचना
पुलिस के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 4:21 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को भरथल गांव में एक महिला द्वारा आत्महत्या किए जाने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही सेक्टर-23 द्वारका थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और महिला के शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। मामले में मृतका के परिवार और ससुराल पक्ष से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
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शादी के सिर्फ 4 महीने बाद हुई मौत
पुलिस के अनुसार, नाजिया खानम की शादी इसी साल 11 अप्रैल को मोहम्मद आजम अली खान के साथ मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के महज करीब चार महीने बाद उनकी मौत होने के कारण पुलिस ने मामले की जानकारी संबंधित एसडीएम को दी।
इसके बाद महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए डीडीयू अस्पताल के शवगृह भेजा गया। कम समय पहले हुई शादी को देखते हुए मामले में मजिस्ट्रेट स्तर की कार्रवाई भी की गई।
पहले परिजनों ने नहीं जताया था संदेह
पुलिस के अनुसार, 21 अगस्त को शुरुआती पूछताछ के दौरान मृतका के परिजनों ने एसडीएम के सामने दिए गए लिखित बयान में किसी तरह का संदेह या आरोप नहीं लगाया था।
हालांकि, अगले दिन 22 अगस्त को मृतका के परिजन दोबारा एसडीएम के सामने पेश हुए और एक नई शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में उन्होंने नाजिया के पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों पर प्रताड़ना समेत कई गंभीर आरोप लगाए।
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पति और ससुराल वालों के खिलाफ FIR
परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद द्वारका जिला पुलिस ने मृतका के पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ BNS की धारा 85 और 108 के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, परिजनों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Devendra Fadnavis बोले, संविधान और लोकतंत्र ने मुझे CM बनाया, Nagpur में युवाओं से संवाद
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि भारत के लोकतंत्र और संविधान की ताकत तथा देश के युवाओं की शक्ति ने उनके जैसे एक साधारण व्यक्ति को राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचने में सक्षम बनाया, जिसने कभी नगर निगम पार्षद बनने की भी कल्पना नहीं की थी। नागपुर में ‘जेन-जी’ के लिए आयोजित मंथन 4 युवा कार्यक्रम में सवाल-जवाब सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘स्टार्टअप इकोसिस्टम’ के लिए नीति तैयार की है, कोष स्थापित किए हैं, ‘इन्क्यूबेशन’ केंद्र बनाए हैं और अब उनका विकेंद्रीकरण किया जा रहा है।
युवाओं के राजनीति में रुचि दिखाने और मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर फडणवीस ने कहा, यह आसान नहीं है। हमारे संविधान ने इस देश में लोकतंत्र दिया है। इस लोकतंत्र की खूबसूरती यह है कि देवेंद्र फडणवीस जैसा व्यक्ति, जिसने शायद कभी नगर निगम पार्षद बनने की भी कल्पना नहीं की थी, मुख्यमंत्री के पद तक पहुंच गया या गुजरात में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाला एक लड़का देश का प्रधानमंत्री बन गया।
उन्होंने कहा, यह भारत के संविधान की ताकत है, भारत के लोकतंत्र की शक्ति है और यही देश के युवाओं की ताकत है। फडणवीस ने कहा, जब मैंने राजनीति में प्रवेश किया तो मैं केवल विचारों से प्रेरित था। उस समय मेरे पास जो विचार थे और जिस पार्टी में मैं काम करता था, उससे ऐसा नहीं लगता था कि कभी सत्ता आएगी।
हम सोचते थे कि हम विपक्ष में राजनीति करने के लिए ही पैदा हुए हैं। हम हर दिन आंदोलन करते थे। रोज संघर्ष करते थे लेकिन किसी तरह जनता ने हम पर भरोसा जताया और एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए एक दिन मुझे महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने की जिम्मेदारी मिली।
उन्होंने कहा कि राजनीति सामाजिक-आर्थिक बदलाव का एक माध्यम है। मुख्यमंत्री ने अपने संघर्षों को याद करते हुए राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान 20 वर्ष की उम्र में बदायूं केंद्रीय जेल में 18 दिन बिताने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, मैं वहां से प्रयागराज गया और वहां से अयोध्या की ओर गया।
यह पहली बार था जब मैंने देखा कि भाषण और बयानबाजी किस तरह काम करती है। हम पर गोलियां चलाई गईं, लाठियों से पीटा गया और गिरफ्तार किया गया। बीस साल की उम्र में मैंने बदायूं की केंद्रीय जेल में 18 दिन बिताए।
मैं वापस आया और फिर आंदोलन में शामिल हो गया और जब 1992 में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया, तब मैं वहां था। मुझे इस पर बहुत गर्व है।
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