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फूलों से लेकर इंटीमेट सीन तक: बॉलीवुड में ऐसे बदला प्यार दिखाने का तरीका, अब नए अंदाज में लौट रही हैं रोमांटिक कहानियां

बॉलीवुड में प्यार हमेशा से फिल्मों का अहम हिस्सा रहा है। कभी हीरो-हीरोइन के बीच प्यार दिखाने के लिए दो फूलों को करीब आते दिखाया जाता था, तो अब फिल्मों में किसिंग और इंटीमेट सीन भी आम हैं। लेकिन बदलाव सिर्फ इतना नहीं है।

आज की लव स्टोरीज में प्यार के साथ रिश्तों की उलझन, अलग सोच, परिवार और बदलती जिंदगी भी दिखाई जा रही है। यश और कियारा आडवाणी की ‘टॉक्सिक’ के गाने ‘तबाही’ के इंटीमेट सीन को लेकर हुई चर्चा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि बॉलीवुड में रोमांस आखिर कितनी दूर आ गया है। अगर पुराने दौर से आज तक की फिल्मों को देखें, तो प्यार दिखाने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है।

पहले प्यार का इशारा फूल करते थे

Bollywood Romance

1960 के दशक में फिल्मों में रोमांस तो खूब था, लेकिन किसिंग सीन दिखाना आसान नहीं था। इसलिए जब कहानी में हीरो-हीरोइन के करीब आने का मौका आता, तो कैमरा अक्सर फूलों पर चला जाता था। दो फूलों का एक-दूसरे के करीब आना ही उस दौर में प्यार का इशारा समझा जाता था। दर्शक भी समझ जाते थे कि पर्दे पर क्या होने वाला है। लेकिन समय के साथ फिल्ममेकर्स ने इस तरीके से आगे बढ़ना शुरू किया।

‘मुगल-ए-आजम’ ने दिखाई नई राह

Bollywood Kissing scene history

प्यार को पर्दे पर दिखाने के अलग-अलग तरीके पुराने समय से ही आजमाए जाते रहे हैं। ‘मुगल-ए-आजम’ में सलीम और अनारकली के बीच का मशहूर सीन इसका उदाहरण है। फिल्म में दिलीप कुमार और मधुबाला के किरदारों के बीच किस को सीधे दिखाने के बजाय एक पंख का इस्तेमाल किया गया था। सीन में प्यार भी था और उस समय की सीमाओं का भी ध्यान रखा गया था।

फिर फिल्मों में दिखने लगा लिप लॉक

Indian cinema kissing scenes

इसके बाद हिंदी सिनेमा में किसिंग सीन धीरे-धीरे ज्यादा खुले तरीके से दिखाए जाने लगे। राज कपूर की ‘बॉबी’ और ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ जैसी फिल्मों ने भी इस बदलाव में भूमिका निभाई। फिर 1980 और 1990 के दशक में आमिर खान की फिल्मों में भी किसिंग सीन देखने को मिले। ‘कयामत से कयामत तक’, ‘दिल’ और ‘राजा हिंदुस्तानी’ जैसी फिल्मों में रोमांस को पहले के मुकाबले ज्यादा खुलकर दिखाया गया। 2000 के दशक में इमरान हाशमी की फिल्मों ने तो किसिंग को लेकर बॉलीवुड में एक अलग ही पहचान बना दी।

आज रोमांस सिर्फ किस तक नहीं है

Kabir Singh

आज फिल्मों में रोमांस का मतलब सिर्फ हीरो-हीरोइन की प्रेम कहानी नहीं रह गया है। अब फिल्मों में रिश्तों की शुरुआत, ब्रेकअप, शादी के बाद की जिंदगी, परिवार की मुश्किलें और अलग-अलग सोच वाले लोगों के बीच प्यार जैसी कहानियां भी दिखाई जा रही हैं। यही वजह है कि आने वाले समय में कई ऐसी फिल्में आ रही हैं, जिनमें प्यार का अंदाज पहले से काफी अलग होगा।

'2 स्टेटस' और ‘परम सुंदरी’ में अलग संस्कृति का प्यार

Bollywood love stories

आलिया भट्ट-अर्जुन कपूर की 2 स्टेटस और सिद्धार्थ मल्होत्रा-जाह्नवी कपूर की ‘परम सुंदरी’ में दो अलग संस्कृतियों से आने वाले लोगों की कहानी दिखाई जाएगी। फिल्म में एक पंजाबी लड़के और दक्षिण भारतीय लड़की के बीच प्यार को दिखाया गया है। यानी कहानी में सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि दोनों परिवारों और उनकी अलग-अलग सोच का मजेदार टकराव भी देखने को मिलेगा। यह उस तरह की लव स्टोरी है, जिसे बॉलीवुड पहले भी पसंद करता रहा है, लेकिन अब इसे नए अंदाज में पेश किया जा रहा है।

‘मेट्रो... इन दिनों’ में शहर वाला प्यार

Bollywood Romance Evolution

अनुराग बसु की ‘मेट्रो... इन दिनों’ का रोमांस थोड़ा अलग है। यहां एक ही कपल की कहानी नहीं है। फिल्म में शहर में रहने वाले कई लोगों के रिश्तों और उनकी जिंदगी को दिखाया गया है। कहीं प्यार अधूरा है, कहीं पुराना रिश्ता दोबारा जुड़ रहा है और कहीं दो लोग अचानक एक-दूसरे की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। यानी आज का प्यार सिर्फ ‘हीरो मिला, प्यार हुआ और शादी हो गई’ वाली कहानी नहीं है।

नई जोड़ियां भी बदल रही हैं तस्वीर

Bollywood love stories

बॉलीवुड में रोमांस की वापसी के साथ नई जोड़ियां भी देखने को मिल रही हैं। अनन्या पांडे-लक्ष्य की ‘चांद मेरा दिल’ और कार्तिक आर्यन-स्रीलीला की आने वाली फिल्म जैसे प्रोजेक्ट्स में नई जोड़ी और नए तरह के रिश्ते देखने को मिलेंगे। इन फिल्मों की कहानी आज की जिंदगी के हिसाब से आगे बढ़ेगी।

अब उम्र भी प्यार के बीच नहीं

Indian cinema

रोमांस को सिर्फ युवा कपल तक सीमित रखने का चलन भी बदल रहा है। आर. माधवन और फातिमा सना शेख की ‘आप जैसा कोई’ जैसी फिल्में अलग उम्र के लोगों की कहानी दिखाने की कोशिश कर रही हैं। यहां प्यार सिर्फ कॉलेज या जवानी की कहानी नहीं है। फिल्म का फोकस इस बात पर है कि जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर इंसान को प्यार और साथ की जरूरत हो सकती है।

बॉलीवुड में फिर लव स्टोरीज का चलन 

Bollywood Romantic Movies

पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड में एक्शन और थ्रिलर फिल्मों का दबदबा रहा। बड़े स्टार, बड़े सेट के साथ-साथ जोरदार एक्शन वाली फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर खूब जगह बनाई। लेकिन ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ और ‘जरा हटके जरा बचके’ जैसी फिल्मों ने दिखाया कि दर्शक आज भी अच्छी लव स्टोरी देखना चाहते हैं। जिसमें उन्हें अपने रिश्तों और जिंदगी की कुछ झलक दिखाई दे।

‘टॉक्सिक’ ने फिर छेड़ी बोल्ड रोमांस पर बहस

Toxic

आज की फिल्म इंडस्ट्री में रोमांस को सिर्फ प्यार और गानों तक सीमित नहीं रखा जा रहा। ‘टॉक्सिक’ के ‘तबाही’ गाने में यश और कियारा आडवाणी के किरदारों के बीच दिखाए गए इंटीमेट सीन इसका उदाहरण हैं। ऐसे सीन अब फिल्मों में रिश्तों की नजदीकी दिखाने का एक तरीका बन गए हैं।

हालांकि, इन्हें लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग है। कुछ लोगों को यह आज के समय की कहानी के हिसाब से सही लगता है, जबकि कुछ दर्शक मानते हैं कि रोमांस दिखाने के लिए कहानी और सीन के बीच संतुलन जरूरी है।

फूलों वाला प्यार अब बदल चुका है
बॉलीवुड का रोमांस अब काफी आगे निकल चुका है। कभी कैमरा दो फूलों पर रुक जाता था, फिर इशारों के जरिए प्यार दिखाया गया और बाद में लिप लॉक और इंटीमेट सीन फिल्मों का हिस्सा बन गए। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव कहानी में आया है। आज फिल्मों में प्यार सिर्फ खूबसूरत जगहों और गानों तक सीमित नहीं है। अब इसमें करियर, परिवार, अलग संस्कृति, उम्र, ब्रेकअप और रिश्तों की असली परेशानियां भी शामिल हैं।

यानी बॉलीवुड का प्यार अब सिर्फ ‘सरसों के खेत’ वाला रोमांस नहीं रहा। अब यह बदलती जिंदगी के साथ बदल रहा है कभी इंटीमेट सीन के जरिए, तो कभी एक साधारण रिश्ते की उलझी हुई कहानी के जरिए।

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Ganesh Chaturthi Celebration: फिल्मी या कस्टमाइज्ड मूर्ति से बचें, जानें गणेश चतुर्थी के लिए शास्त्र समम्मत Idol Selection के संबंधी कड़े नियम

करोड़ों भक्त गणेश चतुर्थी का बेसब्री से इंतजार करते हैं ताकि वह बप्पा का स्वागत कर सके। हिंदू धर्म में यह सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी। देशभर धूमधाम से यह त्योहार मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की पूजा, उपासना और सेवा का प्रतीक है। इस बार गणेशोत्सव 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन मनाया जाएगा, यह 10 दिनों तक चलेगा। 
पूरे भारत वर्ष में गणेश चतुर्थी के मौके पर जगह-जगह गणपति जी के पंडाल लगाए जाते हैं। वहीं, इन पंडालों में भगवान गणेश की भव्य मूर्तियां स्थापित कराई जाती है। हर साल गणपति बप्पा की मूर्तियों में तरह-तरह की क्रिएटिविटी देखने को मिलती है।
खासकर कई जगहों पर गणेश जी को महादेव के रुप में दर्शाया जाता है, तो कहीं नारायण के रुप में, कही उन्हें साधु-संतों के भेष में तो कहीं प्रसिद्ध फिल्मी पात्रों और मनुष्यों के चेहरे के साथ स्थापित किया जाता है।
कभी किसी ने सोचा है कि, क्या देवमूर्ति को किसी भी रुप में बनाया जा सकता है? क्या भगवान गणेश की कस्टमाइज मूर्तियों की पूजा करने का विधान है और इस पर शास्त्र क्या कहते हैं? आइए आपको बताते हैं पूरी जानकारी।

कस्टमाइज मूर्तियों की पूजा करनी सही या गलत?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रत्येक देवता की अपनी स्वतंत्र सत्ता, रुप और गुणों को निर्धारित किया गया है। पुराणों में और आगम शास्त्रों में कही भी ऐसा नहीं लिखा है कि किसी भी देवता की मूर्ति में दूसरे देवता का चेहरा लगाना चाहिए। जबकि हर एक देवता का रुप उसकी तत्व शक्ति का प्रकट स्वरुप माना जाता है। ऐसे में किसी भी देवता की मूर्ति का स्वरुप बदलना विकृति कहा जा सकता है। 
खासकर मूर्ति का स्वरुप जैसे शास्त्र में बताया गया है वैसे ही होना अनिवार्य है। किसी भी देवता का रुप जोड़ना, संतों का रुप मिलाना या फिर मनुष्यों का रुप मिलाना इसे वर्जित माना जाता है और यह शास्त्र समम्मत नहीं माना जाता है। 
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक देवता के हाथों में कौन-सा आयुध हो, कौन-सी मुद्रा हो ये निश्चित होती है। जैसे भगवान विष्णु के हाथों में शंख, चक्र और गदा होता है, वैसे ही भगवान गणेश के हाथों में पाश, अंकुश, मोदक और अभय मुद्रा होती है।
जब भी आप भगवान गणेश की मूर्ति खरीदें तो पहले इन बातों का जरुर ध्यान रखें कि, मूर्ति शास्त्र के अनुसार न बनी हो तो दैवीय शक्ति का आवेश उस मूर्ति में नहीं होता है।
 इसलिए जब आप गणेश चतुर्थी से पहले भगवान गणेश की मूर्ति खरीदन जाए, तो फैंसी या कस्टमाइज मूर्तियों को खरीदने से बचें। सच्चे मन से श्री गणेश जी की पूजा करें।

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  Sports

Dhananjaya de Silva का खुलासा, Sri Lanka को टेस्ट क्रिकेट में खली 140 Kmph वाले तेज गेंदबाजों की कमी

श्रीलंका की टीम भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में उतरने की तैयारी कर रही है और इसी बीच कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने टीम की तेज गेंदबाजी को लेकर एक अहम कमी की ओर ध्यान दिलाया है। उनका मानना है कि श्रीलंका को ऐसे तेज गेंदबाजों की जरूरत है जो लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंद डाल सकें। मौजूदा समय में टीम के पास इस स्तर की गति वाला केवल एक गेंदबाज है।

धनंजय डी सिल्वा ने कहा कि वह चाहते हैं कि श्रीलंका के पास कम से कम दो या तीन ऐसे तेज गेंदबाज हों, जिनके पास 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति हो। उन्होंने माना कि मौजूदा संसाधनों को देखते हुए असिता फर्नांडो और लाहिरू कुमारा ही टीम के लिए सबसे उपयुक्त जोड़ी हैं।

असिता फर्नांडो पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं। वह करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ अपनी सटीक गेंदबाजी और निरंतरता के लिए पहचाने जाते हैं। वहीं, लाहिरू कुमारा के पास ज्यादा गति है, लेकिन उनका करियर चोटों से प्रभावित रहा है। 36 टेस्ट मैचों में कुमारा ने 106 विकेट लिए हैं और उनका गेंदबाजी औसत 36.38 रहा है।

पहले टेस्ट में भी कुमारा का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा था। गाले में उन्होंने 104 रन देकर दो विकेट हासिल किए थे। इसके बावजूद धनंजय का कहना है कि उपलब्ध विकल्पों में कुमारा ही असिता के साथ सबसे बेहतर तालमेल बनाते हैं।

गौरतलब है कि श्रीलंका के पास दुश्मंथा चमीरा, दिलशान मदुशंका और मतीशा पथिराना जैसे तेज गेंदबाज भी हैं। हालांकि, चमीरा ने अपना पिछला टेस्ट 2021 में खेला था। चोटों के इतिहास और सीमित ओवरों की क्रिकेट में उनकी अहमियत को देखते हुए श्रीलंका ने उन्हें मुख्य रूप से छोटे प्रारूपों के लिए संभालकर रखा है। मदुशंका गाले में टेस्ट टीम का हिस्सा थे, लेकिन घरेलू प्रतियोगिता में खेलने के लिए उन्हें टीम से बाहर किया गया था।

धनंजय ने यह भी कहा कि श्रीलंका के तेज गेंदबाजों में आत्मविश्वास की कमी दिखाई देती है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले 15 वर्षों में श्रीलंका की धरती पर केवल नुवान प्रदीप ने पांच विकेट लेने का कारनामा किया है। उन्होंने 2017 में भारत के खिलाफ छह विकेट लिए थे। इसके मुकाबले विदेशी तेज गेंदबाजों ने श्रीलंका में 14 बार पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लिए हैं।

बता दें कि धनंजय की कप्तानी में श्रीलंका ने घरेलू मुकाबलों में भी दो तेज गेंदबाजों के साथ उतरने की नीति अपनाई है। उनका मानना है कि अगर श्रीलंकाई तेज गेंदबाज घरेलू परिस्थितियों में विकेट लेना सीख जाते हैं तो विदेशों में भी उनका प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। उनका कहना है कि टीम को तेज गेंदबाजी के विकल्प बढ़ाने पर जल्द काम करना होगा और आने वाले समय में ऐसे गेंदबाज तैयार करने होंगे।
Sun, 23 Aug 2026 21:41:00 +0530

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