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इंटरव्यू:राजकुमार संतोषी बोले- ‘घायल’, ‘दामिनी’ से ‘बंटवारा 1947’ तक मेरे लिए कहानी पहले है, कभी ट्रेंड फॉलो नहीं किया

निर्देशक राजकुमार संतोषी ‘बंटवारा 1947’ के जरिए एक बार फिर से सनी देओल के साथ अपनी फिल्म परदे पर लेकर आए हैं। असग़र वजाहत के मूल प्ले को फिल्म में बदलने से लेकर सीक्वल कल्चर और बॉक्स ऑफिस ट्रेंड पर उनसे हुई खास बातचीत... ‘बंटवारा 1947’ का मुख्य किरदार आपके पुराने नायकों से कितना अलग है? मेरी फिल्मों में अक्सर ऐसा किरदार आता है, जो एक पॉइंट तक चीजों को सहता है, समझने की कोशिश करता है, लेकिन फिर उसके सामने ऐसा पल आता है जहां वह तय करता है कि अब चुप नहीं रहा जा सकता। ‘घायल’ में संघर्ष बहुत निजी था। ‘दामिनी’ में न्याय का सवाल था। ‘घातक’ में सिस्टम और ताकत के खिलाफ लड़ाई थी। ‘बंटवारा 1947’ में सिकंदर मिर्जा का संघर्ष दूसरे इंसान की सुरक्षा, सम्मान और इंसानियत से जुड़ा है। तो उसके अंदर बागीपन जरूर है, लेकिन उसका संदर्भ अलग है। वह सिर्फ अपनी लड़ाई नहीं लड़ रहा। उसके सामने यह सवाल है कि जब किसी दूसरे इंसान के साथ गलत हो रहा हो, तो क्या आप सिर्फ तमाशबीन बने रहेंगे? मूल प्ले से फिल्म में क्या बड़ा बदलाव किया गया? सिकंदर मिर्जा के किरदार को ज्यादा एक्टिव बनाया गया है। मूल प्ले में वह घटनाओं के बीच मौजूद है, लेकिन फिल्म में हमें उसकी जर्नी को ज्यादा प्रो-एक्टिव बनाना था। थिएटर और सिनेमा की लैंग्वेज अलग होती है। स्टेज पर एक लंबा डायलॉग, परफॉर्मेंस और सिचुएशन मिलकर किरदार की मनःस्थिति बता सकते हैं। इसलिए हमने यह देखा कि सिकंदर सिर्फ घटनाओं का गवाह न रहे। उसके फैसले कहानी को आगे बढ़ाएं। सनी देओल की लार्जर दैन लाइफ इमेज को इस कहानी में कैसे इस्तेमाल किया? मेरी फिल्मों में पहले किरदार आता है, स्टार की इमेज बाद में। सनी की स्क्रीन प्रेजेंस और इंटेंसिटी बहुत मजबूत है, लेकिन हर फिल्म में उस इंटेंसिटी को एक ही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अगर आप हर बार सिर्फ उनकी पुरानी फिल्मों वाला पैटर्न दोहराएंगे, तो किरदार नया नहीं लगेगा। ‘बंटवारा...’ में सिकंदर को हमने एक्टिव जरूर बनाया, लेकिन उसके लिए सिर्फ फिजिकल एग्रेसन काफी नहीं, अंदर इमोशनल कंट्रोल भी चाहिए था। अलग-अलग जॉनर के बावजूद आपकी फिल्मों की कॉमन सिमिलैरिटी क्या है? जॉनर मेरे लिए बस कहानी कहने का तरीका है, कहानी का मकसद नहीं। ‘दामिनी’ कोर्टरूम ड्रामा है, ‘घातक’ एक्शन ड्रामा है, ‘लज्जा’ सोशल स्टेटमेंट है और ‘खाकी’ क्राइम नैरेटिव है, लेकिन इन सबमें कहीं न कहीं एक सवाल जरूर है कि जब किसी इंसान की गरिमा, उसके अधिकार या उसके साथ न्याय का सवाल सामने आता है, तो वह क्या करता है? मुझे ऐसे किरदार दिलचस्प लगते हैं जिनके पास समझौता करने का विकल्प होता है, लेकिन वे आखिरकार आसान रास्ता नहीं चुनते। एक खास मौके पर उनके भीतर कुछ बदलता है। शायद यही मेरी फिल्मों की कॉमन थीम है। क्या आज सीक्वल फिल्मों के लिए नॉस्टैल्जिया एक बड़ा कॉमर्शियल टूल बन गया है? नॉस्टैल्जिया काम जरूर करता है, लेकिन सिर्फ उसी के भरोसे फिल्म नहीं चल सकती। दर्शक को एक नई कहानी चाहिए। मैंने कभी सिर्फ ट्रेंड देखकर फिल्म नहीं चुनी। कोई सब्जेक्ट मुझे समझ में आता है, उसमें कुछ कहने लायक लगता है तभी मैं उसमें दिलचस्पी लेता हूं। मेरे लिए पहले कहानी है। उसके बाद स्टार, स्केल, ट्रेंड या फ्रेंचाइज है। ‘अंदाज अपना अपना 2’ की काफी चर्चा हो रही है। इसके बनने की क्या संभावनाएं हैं? ‘अंदाज अपना अपना’ सिर्फ दो-चार कैरेक्टर्स या उसके टाइटल की वजह से यादगार नहीं बनी। उसकी स्क्रीनप्ले, डायलॉग्स, कॉमिक टाइमिंग और उसका पूरा कॉमिक रिदम मिलकर उसे खास बनाते हैं। अगर कभी उस स्पिरिट को आगे लेकर जाना है, तो सिर्फ पुराने कैरेक्टर्स को वापस लाना काफी नहीं होगा। ज्यादा जरूरी है कि एक ऐसी नई कहानी हो, जिसमें वही कॉमिक एनर्जी हो। दर्शक को सिर्फ पुरानी फिल्म की कॉपी नहीं चाहिए। उसे नई फिल्म चाहिए, लेकिन उसके अंदर उस दुनिया की फील भी होनी चाहिए।

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फ्रिज कब बंद करना चाहिए? साल में कितनी बार स्विच ऑफ करना है सही, एक गलती से होगी खराबी

क्या रात में फ्रिज बंद करने से बिजली का बिल कम होता है? जानिए फ्रिज को बार-बार बंद करने से कंप्रेसर और खाने पर क्या असर पड़ सकता है. यह भी जानें कि फ्रिज को साल में कब और किन परिस्थितियों में बंद करना सही है. साथ ही समझें Auto Cut-off फीचर कैसे काम करता है और बिजली बचाने का सही तरीका क्या है.

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दुनिया का वो लेफ्ट आर्म पेसर, जिसने 140 साल में पहली बार किया ये कारनामा, सदियों तक याद रखा जाएगा नाम

Shoriful Islam Creat history: बांग्लादेश के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज शोरिफुल इस्लाम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैके टेस्ट में इतिहास रच दिया है. उन्होंने पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी में कहर बरपाते हुए मात्र 48 रन देकर 7 विकेट झटके. इस घातक प्रदर्शन के दम पर वह पिछले 140 वर्षों में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट पारी में सात विकेट लेने वाले दुनिया के पहले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज बन गए हैं. Sun, 23 Aug 2026 21:16:04 +0530

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