Odisha में Congress ने Mining Bill पर मांगा विधानसभा का विशेष सत्र, सौंपा ज्ञापन
कांग्रेस की ओडिशा इकाई ने ‘खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक’ पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून से राज्य की शक्तियां कम हो जाएंगी और भारी राजस्व का नुकसान होगा। राम चंद्र कदम के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति को एक ज्ञापन सौंपा और उनसे सदन का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया।
कदम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने राज्यपाल को खनन से जुड़े नए विधेयक के प्रति अपने विरोध के बारे में बताया और इसे वापस लेने की मांग की। हमने उनसे इस मामले पर विस्तार से चर्चा करने के लिए सदन का विशेष सत्र बुलाने का भी आग्रह किया।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि संसद के दोनों सदनों ने बिना पर्याप्त चर्चा के जल्दबाजी में यह विधेयक पारित किया। कदम ने इस विधेयक को ‘काला कानून’ करार देते हुए दावा किया कि इसका उद्देश्य खनिज अधिकार और खनिज वाली भूमि पर कर लगाने की राज्य की शक्तियों को सीमित करना और संघीय ढांचे को कमज़ोर करना है।
उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन की वजह से ओडिशा को लगभग एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है और सालाना राजस्व में करीब 20,000 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा कि इन संशोधनों से लाखों लोगों, खासकर आदिवासी समुदायों के हितों को गंभीर खतरा है और इससे राज्य की वित्तीय स्वायत्तता सीमित हो जाएगी। इससे पहले, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने नए खनन कानून का विरोध किया और लोगों से अपने उन अधिकारों के लिए लड़ने की अपील की।
उन्होंने दावा किया कि लोगों के अधिकार केंद्र द्वारा छीने जा रहे हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हालांकि विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और कांग्रेस तथा बीजू जनता दल (बीजद) पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। भाजपा महासचिव बिरंची नारायण त्रिपाठी ने कहा, ‘‘ओडिशा समेत सभी खनिज-समृद्ध राज्यों और सबसे बढ़कर पूरे देश को इस नए कानून से लाभ होगा।
यह शानदार कानून खनिज संसाधनों के सही इस्तेमाल से मूल्यवर्धन करने के लिए लाया गया है।
National Space Day: पीएम मोदी ने स्पेस स्टार्टअप्स के फाउंडर्स से की मुलाकात, बोले- दुनिया का टैलेंट भारत लाना है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत के तेजी से बढ़ते प्राइवेट स्पेस सेक्टर को नई दिशा देने वाले स्टार्टअप्स और उनके फाउंडर्स से मुलाकात की। इस दौरान देश के निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी, नए इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
पीएम मोदी ने इस दौरान स्पेस सेक्टर में भारत की बढ़ती क्षमता और देश के स्टार्टअप्स के लिए मौजूद अवसरों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत के पास कम लागत, बेहतरीन टैलेंट और जोखिम उठाने की क्षमता जैसी कई मजबूत खूबियां हैं।
स्पेस सेक्टर में भारत के पास मजबूत आधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से मुलाकात का एक वीडियो शेयर किया गया। वीडियो में पीएम मोदी स्पेस टेक्नोलॉजी और भारत के प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम पर अपनी बात रखते नजर आए।
स्पेस स्टार्टअप्स के फाउंडर्स से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास स्पेस सेक्टर में एक बेहतरीन कॉमर्शियल मॉडल बनाने की क्षमता है। उन्होंने भारत की कम लागत और प्रतिस्पर्धी क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि टैलेंट के मामले में देश के पास कोई कमी नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीयों की रिस्क लेने की क्षमता को भी भारत की बड़ी ताकत बताया।
Met India’s brightest space StartUps.
As always, came away impressed by their energy and ambition.
You would love their insights and optimism.
Do tell me...what excites you most about India’s space journey? #NationalSpaceDay pic.twitter.com/d1pDC0UZ6p— Narendra Modi (@narendramodi) August 23, 2026
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दुनिया के टैलेंट को भारत लाने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को स्पेस सेक्टर में ऐसा माहौल और पहचान बनानी चाहिए, जिससे दुनिया भर के प्रतिभाशाली लोग भारतीय कंपनियों की ओर आकर्षित हों। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अपने देश के टैलेंट का इस्तेमाल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार करना चाहिए जो दुनिया के बेहतरीन टैलेंट को भारत की ओर खींच सके। इससे भारतीय स्पेस कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
नेशनल स्पेस डे पर पीएम मोदी का संदेश
नेशनल स्पेस डे के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ‘हैप्पी नेशनल स्पेस डे!’ लिखते हुए भारत के युवाओं और इनोवेटर्स से बड़े सपने देखने, ज्यादा इनोवेशन करने और नई सीमाओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के स्पेस सेक्टर की युवा ऊर्जा से मिलकर उन्हें काफी अच्छा लगा। उन्होंने युवा उद्यमियों और इनोवेटर्स की तारीफ करते हुए कहा कि इन लोगों ने एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम रखा, जोखिम उठाया और लगातार बेहतर करने की कोशिश की।
निजी कंपनियों के लिए खुला स्पेस सेक्टर
भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। इसका असर देश के तेजी से विकसित होते प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम में दिखाई दे रहा है।
आज भारत में कई स्टार्टअप सैटेलाइट, रॉकेट, स्पेस डेटा, लॉन्च व्हीकल और दूसरी आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। इससे भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी कंपनियों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।
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स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम I ने रचा इतिहास
भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की बढ़ती ताकत का एक उदाहरण हैदराबाद की स्पेस स्टार्टअप कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस भी है। इसी साल जुलाई में कंपनी के प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-I' ने अंतरिक्ष में सफल उड़ान भरकर इतिहास रचा।
विक्रम-I की सफलता को भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भारतीय स्टार्टअप अब केवल स्पेस टेक्नोलॉजी विकसित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रॉकेट और लॉन्च व्हीकल जैसे बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं।
भारत के स्पेस सेक्टर का अगला लक्ष्य
पीएम मोदी की स्टार्टअप फाउंडर्स के साथ मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत अपने स्पेस सेक्टर को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्पेस टेक्नोलॉजी के साथ AI, सैटेलाइट डेटा और निजी लॉन्च सेवाओं का विस्तार आने वाले समय में इस क्षेत्र को और बड़ा बना सकता है। भारत के सामने अब चुनौती केवल अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की नहीं, बल्कि एक ऐसा ग्लोबल स्पेस हब बनने की है जहां दुनिया के निवेशक, कंपनियां, वैज्ञानिक और टैलेंट आकर्षित हों।
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