ये हैं दुनिया के 5 सबसे जहरीले सांप, डंसते ही पहुंचा देते हैं यमलोक, आखिर कहां है इनका घर?
सांप का नाम सुनते ही बॉडी में एक अजीब सी सिहरन होने लगती है. वैसे तो धरती पर कई प्रजाति के सांप पाए जाते हैं. इनमें से अधिकांश जहरीले नहीं होते लेकिन जो होते हैं, वो इंसान को मौत के मुंह में पहुंचा कर दी दम लेते हैं. आज हम आपको दुनिया के ऐसे ही पांच सबसे जहरीले सांपों के बारे में बताने जा रहे हैं.
Car Features: आपकी कार में बिना केबल के कैसे चार्ज होता है मोबाइल? जानें डिटेल
Car Features: आधुनिक कारों के केबिन को ज्यादा सुविधाजनक और हाई-टेक बनाने के लिए कई एडवांस फीचर्स दिए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक है वायरलेस मोबाइल चार्जिंग। इस फीचर की मदद से सफर के दौरान फोन को चार्ज करने के लिए बार-बार चार्जिंग केबल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। आपको सिर्फ मोबाइल को कार में दिए गए वायरलेस चार्जिंग पैड पर रखना होता है और चार्जिंग शुरू हो जाती है।
इस तकनीक के पीछे वायरलेस चार्जिंग स्टैंडर्ड, कॉइल और मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल होता है। आइए जानते हैं कि कार का वायरलेस चार्जर आखिर किस तरह काम करता है।
क्या होती है कार की वायरलेस चार्जिंग?
कार में वायरलेस चार्जिंग का मतलब है कि मोबाइल को बिना किसी केबल के चार्ज किया जा सकता है। इसके लिए कार के केबिन में एक खास वायरलेस चार्जिंग पैड दिया जाता है। जब वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करने वाले फोन को इस पैड पर सही स्थिति में रखा जाता है, तो उसकी बैटरी चार्ज होने लगती है।
आमतौर पर इस तकनीक में Qi जैसे वायरलेस चार्जिंग स्टैंडर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। चार्जिंग पैड और स्मार्टफोन, दोनों में विशेष कॉइल लगी होती हैं। इन्हीं कॉइल के जरिए चार्जिंग पैड से फोन तक ऊर्जा पहुंचती है।
बिना केबल के मोबाइल तक कैसे पहुंचती है पावर?
अब सवाल आता है कि बिना किसी तार के बिजली मोबाइल तक कैसे पहुंचती है। दरअसल, जब कार का वायरलेस चार्जिंग पैड सक्रिय होता है, तो उसके अंदर लगी कॉइल में तेजी से बदलने वाला इलेक्ट्रिक करंट प्रवाहित होता है। इससे चार्जिंग पैड के आसपास एक बदलता हुआ मैग्नेटिक फील्ड बनता है।
स्मार्टफोन के अंदर मौजूद रिसीविंग कॉइल इस मैग्नेटिक फील्ड से ऊर्जा प्राप्त करती है। इसके बाद फोन का चार्जिंग सिस्टम इस ऊर्जा को इलेक्ट्रिक पावर में बदलता है, जिसका इस्तेमाल बैटरी को चार्ज करने के लिए किया जाता है।
इस तरह चार्जिंग केबल लगाए बिना ही ऊर्जा चार्जिंग पैड से फोन की बैटरी तक पहुंच जाती है।
चार्जिंग के दौरान फोन की पोजिशन क्यों है जरूरी?
वायरलेस चार्जिंग में फोन की सही पोजिशन काफी महत्वपूर्ण होती है। स्मार्टफोन के अंदर लगी कॉइल और चार्जिंग पैड की कॉइल जितनी बेहतर तरीके से एक-दूसरे के सामने होंगी, ऊर्जा का ट्रांसफर उतना ही प्रभावी होगा।
अगर फोन पैड पर सही जगह नहीं रखा गया है, तो चार्जिंग धीमी हो सकती है। इस दौरान कुछ ऊर्जा गर्मी के रूप में भी बदल सकती है, जिससे फोन ज्यादा गर्म होने की संभावना रहती है। यही वजह है कि कई कारों में वायरलेस चार्जिंग पैड पर फोन रखने के लिए एक निर्धारित स्थान या निशान दिया जाता है।
इसलिए बेहतर और स्थिर चार्जिंग के लिए मोबाइल को चार्जिंग पैड पर सही जगह रखना जरूरी है।
क्या हर मोबाइल को कार के वायरलेस चार्जर से चार्ज किया जा सकता है?
नहीं, हर स्मार्टफोन वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट नहीं करता। फोन में वायरलेस चार्जिंग के लिए जरूरी हार्डवेयर और संबंधित चार्जिंग स्टैंडर्ड का सपोर्ट होना चाहिए।
अगर आपका फोन वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट नहीं करता है, तो उसे कार के चार्जिंग पैड पर रखने से बैटरी चार्ज नहीं होगी। इसके अलावा, फोन और कार के वायरलेस चार्जिंग पैड की क्षमता अलग-अलग होने के कारण सभी डिवाइस एक जैसी स्पीड से चार्ज हों, यह भी जरूरी नहीं है।
वायरलेस चार्जिंग की स्पीड मुख्य रूप से फोन की चार्जिंग क्षमता, चार्जिंग पैड की पावर और दोनों के बीच मौजूद वायरलेस चार्जिंग स्टैंडर्ड पर निर्भर करती है।
(मंजू कुमारी)
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