Allahabad High Court ने कहा प्रयागराज को अस्पताल की सख्त जरूरत, यूपी सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रयागराज को अस्पताल की सख्त जरूरत है। अदालत ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों की ‘‘लापरवाही’’ पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल की दयनीय स्थिति से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कहा, ‘‘राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा दिखाई गई लापरवाही सराहनीय नहीं है और यह अदालत प्रदेश के प्रमुख सचिव (नियोजन एवं विकास) से व्यक्तिगत तौर पर इस मामले को देखने और व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने की उम्मीद करती है।’’ अदालत को राज्य सरकार द्वारा नगर के महात्मा गांधी मार्ग पर एक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के संबंध में अवगत कराया गया और बताया गया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूरी और निर्माण उद्देश्य से ठेकेदार के चयन के लिए 180 दिन की समय सीमा तय की गई है। एसआरएन बाल चिकित्सालय का निर्माण कार्य अधूरा रहने पर अदालत ने कहा, ‘‘हम इस बात से हैरान हैं कि उप्र राज्य निर्माण एवं ढांचागत विकास निगम (यूपीसिडको) बाल चिकित्सालय के निर्माण के मामले में किस तरह से काम कर रहा है जो पिछले सात वर्षों से चल रहा है।’’ अदालत ने कहा कि अगली तिथि पर यूपीसिडको के प्रबंध निदेशक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर किए गए कार्य का उल्लेख करेंगे और यह बताएंगे कि उन्होंने खुली अदालत में अपने बयान में इस बात की जानकारी क्यों नहीं दी।
NIA ने Jammu Kashmir में 10 ठिकानों पर की छापेमारी, आतंकी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर में 10 ठिकानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई सीमा पार आतंकवादी साजिश से जुड़े एक मामले में की गई, जिसमें पाकिस्तान स्थित आकाओं और स्थानीय मददगारों का एक नेटवर्क कथित रूप से शामिल है। यह नेटवर्क कथित तौर पर भारत में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को रसद और अन्य सहायता प्रदान कर रहा था।
एनआईए द्वारा जारी एक बयान के अनुसार श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम में की गई इस तलाशी अभियान का उद्देश्य साजिश से जुड़े दस्तावेजी, डिजिटल और अन्य भौतिक सबूत जुटाना तथा कथित तौर पर स्थानीय सहायता नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाना था। यह मामला 31 मार्च 2026 की देर रात एक जांच चौकी पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से कथित रूप से जुड़े एक मददगार की गिरफ्तारी के बाद शुरू किया गया था। उसके कब्जे से एक हथगोला और कारतूस बरामद किये गये थे।
जांच एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान साजिश से कथित रूप से जुड़े पाकिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही, स्थानीय मददगार नेटवर्क के सदस्यों की पहचान और उनकी कथित भूमिकाओं का भी पता लगाया गया। बयान के अनुसार जांच में वित्तीय लेन-देन, संचार माध्यमों, आरोपियों की आवाजाही तथा हथियारों और विस्फोटकों के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और उसकी गतिविधियों के दायरे का पता लगाया जा सके।
इसके अनुसार एनआईए साजिश में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिका का पता लगाने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है। बयान में कहा गया है कि जांच के नतीजों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी, जिसमें गिरफ्तारियां या बरामदगी भी शामिल हो सकती हैं।
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