Rahul Gandhi बोले: महिलाओं की प्रगति रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल होता है
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया जाता है और 80 प्रतिशत महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं। महिलाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने लिए आवाज उठानी चाहिए और खुद पर विश्वास रखना चाहिए। पार्टी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के ‘‘तीन रूप’’ -शारीरिक हिंसा, अवसरों से वंचित कर हिंसा और आर्थिक हिंसा गिनाए।
गांधी ने कहा कि हर साल 4.5 लाख कन्या भ्रूण हत्या के मामले सामने आते हैं, 80 प्रतिशत महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं, 29 प्रतिशत को शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है और छह प्रतिशत महिलाएं दुष्कर्म का सामना करती हैं। उन्होंने दावा किया कि सामाजिक कलंक के डर से यौन हिंसा की 99 प्रतिशत घटनाओं की शिकायत दर्ज नहीं होती। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर 50 प्रतिशत महिलाओं को शिक्षा या रोजगार के अवसरों से वंचित कर दिया जाता है।
महिलाओं को सुरक्षित यात्रा के नाम पर हर साल अतिरिक्त 17,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि महिलाओं को कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि 60 प्रतिशत महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं।
उन्होंने कहा, ‘‘लड़के को किसी भी समय बाहर जाने और देर से घर आने की इजाजत होती है, लेकिन लड़कियों को रात आठ बजे तक घर लौटना पड़ता है। लड़के किसी भी परीक्षा में कई बार बैठ सकते हैं, लेकिन लड़कियों को केवल एक मौका मिलता है। उनसे कहा जाता है कि यह उनकी शादी का समय है और परीक्षा देने जाने की जरूरत नहीं है।’’ गांधी ने कहा कि 45 प्रतिशत महिलाओं को शादी या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई या काम छोड़ना पड़ता है, जबकि केवल आठ प्रतिशत महिलाओं के नाम जमीन है।
घरों में असमानता को रेखांकित करते हुए गांधी ने कहा कि 15 से 29 वर्ष की आयु की महिलाएं घर में 5.5 घंटे काम करती हैं, जबकि उसी घर में लड़के केवल 30 मिनट काम करते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि 84 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार करने के लिए अपने परिवार की अनुमति लेनी पड़ती है। गांधी के अनुसार, महिलाएं पुरुषों की तुलना में 25 प्रतिशत कम कमाती हैं और उन्हें आसानी से पदोन्नति नहीं मिलती।
Brajesh Pathak ने Reservation Reform की मांग पर दिया भरोसा, केंद्रीय मंत्री से कराएंगे वार्ता
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को कहा कि जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं की मांगों पर केंद्रीय नेतृत्व गंभीरतापूर्वक विचार करेगा। उपमुख्यमंत्री ने नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आरक्षण सुधार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हर्ष दुबे के साथ यहां संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को अगले दो दिन में केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा और केंद्रीय मंत्री के साथ उनकी बैठक कराई जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने छात्र हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और शिवा शर्मा समेत प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में कहा, ‘‘कल (शुक्रवार को) जंतर-मंतर पर हुए धरना-प्रदर्शन से संबंधित पत्र हमें मिला है। हमने वह पत्र केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है। केंद्रीय नेतृत्व ने कहा है कि जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हमारे युवा साथियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।’’ पाठक ने कहा, ‘‘उन्होंने आश्वासन दिया है कि किसी भी स्थिति में देश के युवाओं और छात्रों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा तथा सभी को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा।
दो दिन बाद केंद्रीय मंत्री के साथ इनकी बैठक होगी और हम इन्हें लेकर जाएंगे।’’ इससे पहले आरक्षण सुधार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हर्ष दुबे ने लखनऊ में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की थी। इस दौरान आंदोलन से जुड़े छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया, ‘‘हमारा मानना है कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में कुछ बच्चे मेधा सूची में ऊपर हैं और कुछ बहुत नीचे जबकि सभी के लिए पढ़ाई का स्तर समान बताया जाता है।’’ इसमें कहा गया कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सभी छात्रों की बौद्धिक क्षमता का समान विकास सुनिश्चित करना है ताकि आगे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सभी को समान अवसर मिल सके।
ज्ञापन में कहा गया कि इसके लिए अवसरों की संख्या बढ़ाने और नए अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जिससे किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो और पूरे समाज का हित सुनिश्चित किया जा सके। इस बीच, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आरक्षण सुधार के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के खिलाफ एक और गहरी साजिश है। आरक्षण पीडीए का अधिकार है, किसी की इच्छा का विषय नहीं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा और उसके संगी-साथी समय-समय पर जिस तरह कभी ‘समीक्षा’ तो कभी ‘सुधार’ जैसे अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग कर आरक्षण का विरोध करते हैं या कभी ‘क्रीमीलेयर’ की बात करते हैं या ‘आरक्षण त्यागने’ की सलाह देते हैं, वो सदियों से शोषित-वंचित लोगों को मिले आरक्षण के अधिकार की हकमारी की लगातार की जा रही कोशिश के अलग-अलग मुखौटे हैं।
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