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Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत का समापन, जानिए Puja Vidhi और Udyapan का सही समय और नियम

सावन माह की शुरूआत को चुकी है। वहीं आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से जया-विजया पार्वती व्रत शुरू हुआ था। जोकि सावन कृष्ण तृतीया यानी की 5 दिनों तक रखा जाता है। जया पार्वती व्रत भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है। यह व्रत महिलाएं अखंड सुहाग और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं और कुंवारी कन्याएं मनचाए वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं। इस बार आज यानी की 01 अगस्त को जया पार्वती व्रत का समापन किया जाएगा।

कैसे करें समापन

जया पार्वती व्रत 5 दिनों तक चलने वाला विशेष व्रत है। इसको मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं। वहीं व्रत के अंतिम दिन विधि-विधान से उद्यापन और समापन करना शुभ माना जाता है।

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव और मां पार्वती का पूजन करें। पूजा में भगवान शिव और मां पार्वती को अक्षत, फूल, फल, धूप-दीप और नैवेद्य आदि अर्पित करें। इसके बाद व्रत कथा का पाठ करें। क्योंकि माना जाता है कि बिना कथा सुने व्रत का पूजा पूरा फल मिलता है। मां पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें और इसमें चूड़ियां, बिंदी, चुनरी, सिंदूर, मेहंदी और श्रृंगार की अन्य वस्तुएं शामिल करें।

इसके बाद आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक के लिए मां पार्वती और भगवान शिव से क्षमायाचना करें। वहीं अपनी श्रद्धा अनुसार ब्राह्मण, जरूरतमंद या किसी सुहागिन को फल, वस्त्र, दक्षिणा या अन्न का दान करें। प्रसाद वितरित करें और सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता है कि जो भी महिला विधिपूर्वक यह व्रत करके समापन करती हैं, उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। वहीं अविवाहित कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।

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VIral Video: गुजरात के मोरबी में 'हिलता' कुआं बना रहस्य, भूकंप नहीं तो आखिर क्या है असली वजह?

Viral News: गुजरात के मोरबी जिले में एक गांव के कुएं का पानी लगातार हिलने की घटना ने स्थानीय निवासियों को हैरान कर दिया। इस असामान्य नजारे को देखकर लोगों के मन में यह आशंका पैदा हो गई कि कहीं यह भूकंप से जुड़ी कोई घटना तो नहीं है।

लहराते पानी के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद इस रहस्यमयी घटना को देखने के लिए लोगों की भीड़ मौके पर जुटने लगी। हालांकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस घटना का भूकंपीय गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।

भूकंप नहीं, यह है असली कारण
जिला भूवैज्ञानिक जेएस वाधेर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि कुएं का पानी हिलने की वजह भूकंप या टेक्टोनिक हलचल है। वाधेर ने स्पष्ट करते हुए कहा, "यह भूकंपीय गतिविधि नहीं है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ऊपरी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद भूजल का रिचार्ज हो रहा है, और चट्टानों के छिद्रों में फंसी हवा बाहर निकल रही है, जिसके कारण कुएं में यह हलचल पैदा हो रही है।"

अधिकारियों के मुताबिक, ऊपरी इलाकों में हाल ही में हुई तेज बारिश से भूजल रिचार्ज की प्रक्रिया काफी बढ़ गई है। जब पानी भूमिगत चट्टानी संरचनाओं में रिसता है, तो यह चट्टानों में फंसी हवा को दरारों और छिद्रों के जरिए बाहर की ओर धकेल सकता है।

इस तरह बाहर निकलती हवा से पानी की सतह पर बुलबुले और लगातार लहरें बन सकती हैं, जिससे यह भ्रम पैदा होता है कि कुआं हिल रहा है।

इस साल गुजरात में असामान्य रूप से सक्रिय रहा मानसून
इस वर्ष गुजरात में मानसून काफी सक्रिय रहा है, और राज्य के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है। अरब सागर और मध्य भारत के ऊपर लगातार बने कम दबाव के क्षेत्रों की वजह से व्यापक स्तर पर बारिश हुई, जिसके चलते सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात भी बने। इसके साथ ही राज्यभर में जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भूकंप विज्ञान संस्थान ने भी की पुष्टि
इस क्षेत्र में किसी भी तरह के कंपन दर्ज न होने से यह वैज्ञानिक व्याख्या और मजबूत होती है। अधिकारियों ने इस संबंध में गांधीनगर स्थित भूकंप विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ISR) से भी सलाह ली, जिसने पुष्टि की कि इस क्षेत्र में कोई सक्रिय फॉल्ट लाइन मौजूद नहीं है और किसी भी तरह की भूकंपीय गतिविधि दर्ज नहीं हुई है।

सतर्कता के तौर पर भेजी जाएगी वैज्ञानिक टीम
हालांकि प्रारंभिक आकलन के बावजूद प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। मोरबी जिला कलेक्टर स्वप्निल खरे ने बताया कि गुजरात सरकार को इस घटना की जानकारी दे दी गई है, और गांधीनगर से एक वैज्ञानिक टीम विस्तृत जांच के लिए मौके पर पहुंचेगी।

खरे ने कहा, "हमने इस बारे में गुजरात सरकार को सूचित कर दिया है, और आगे की जांच के लिए गांधीनगर से एक टीम मौके का दौरा करेगी।"

विशेषज्ञ करेंगे जांच
विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल से जुड़ी ऐसी हलचलें भले ही आम न हों, लेकिन तेज बारिश और एक्विफर (जलभृत) रिचार्ज के दौरान इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि भूजल रिचार्ज और फंसी हवा का बाहर निकलना ही इसका सबसे संभावित कारण है, फिर भी वैज्ञानिक कई अन्य संभावनाओं की भी जांच करेंगे। इनमें भारी मानसूनी रिचार्ज के कारण भूजल दबाव में उतार-चढ़ाव शामिल है, जो कुएं के पानी में लयबद्ध हलचल पैदा कर सकता है।

जांचकर्ता यह भी अध्ययन करेंगे कि क्या कुएं की खास आकृति और गहराई भूमिगत दबाव तरंगों को बढ़ा रही है, जिसे 'वेल सेइश' (well seiche) या रेजोनेंस नामक प्रक्रिया के तौर पर जाना जाता है। एक अन्य संभावना यह भी हो सकती है कि यह कुआं किसी भूमिगत दरार या गुहा से जुड़ा हो, जिसके चलते यह सतह के नीचे होने वाले बदलावों के प्रति खासतौर पर संवेदनशील हो।

उम्मीद है कि यह जांच उस सटीक भूवैज्ञानिक प्रक्रिया का पता लगाएगी, जो इस असामान्य हलचल के पीछे जिम्मेदार है, जिससे उन निवासियों को स्पष्टता मिलेगी जो इस घटना को भूकंप की पूर्व चेतावनी मानकर आशंकित थे।

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