ट्रम्प बोले- 2020 चुनाव में 24,000 गैर-नागरिकों ने वोट डाले:चुनाव में मेरी जीत हुई थी, धांधली रोकने के लिए कानून बनाऊंगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया है कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मतदाता और नागरिकता रिकॉर्ड की जांच में 24 हजार से ज्यादा गैर-अमेरिकी नागरिकों के वोट डालने का पता चला है। ट्रम्प ने आगे कहा कि अमेरिकी जनगणना ब्यूरो मतदाता रिकॉर्ड और नागरिकता रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है। अब तक 12.8 करोड़ मतदाताओं की जांच की जा चुकी है। अभी 3.2 करोड़ और मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच होनी बाकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, अवैध मतदान के मामलों की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2020 के चुनाव में उनकी ही जीत हुई थी। ट्रम्प ने कहा कि चुनाव में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वे ‘सेव अमेरिका एक्ट’ लाने वाले हैं। ट्रम्प क्यों उठा रहे हैं यह मुद्दा? अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग के लिए पहचान संबंधी जानकारी देनी होती है। हालांकि पूरे देश में एक जैसा नियम नहीं है। हर राज्य के अपने चुनावी नियम हैं। इसलिए वोट डालने के लिए मांगे जाने वाले दस्तावेज भी राज्य के हिसाब से बदलते हैं। वॉशिंगटन डीसी समेत 15 ऐसे राज्य हैं जहां वोट डालने के लिए फोटो आईडी जरूरी नहीं है। इनमें से ज्यादातर राज्य ऐसे हैं जहां चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत होती है। ट्रम्प और उनकी पार्टी के नेता का आरोप है कि जिन राज्यों में फोटो आईडी जरूरी नहीं है, वहां किसी और के नाम पर वोट डालने या गैर-नागरिकों के मतदान का खतरा रहता है। इसलिए वे सख्त पहचान और नागरिकता जांच की मांग कर रहे हैं। सेव अमेरिका ऐक्ट के लिए समर्थन जुटा रहे ट्रम्प डोनाल्ड ट्रम्प ने 24 हजार गैर-नागरिकों के कथित अवैध मतदान का मुद्दा ऐसे समय उठाया है, जब वह सेव अमेरिका ऐक्ट के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। अगर ये कानून पास होता है तो वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। ट्रंप और उनके समर्थकों का कहना है कि इससे गैर-नागरिकों के मतदान पर रोक लगेगी और चुनावी प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित होगी। 2020 में राष्ट्रपति चुनाव हार गए थे ट्रम्प अमेरिका में 2020 का राष्ट्रपति चुनाव जो बाइडेन ने जीता था। उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रम्प को हराया था। इस चुनाव में बाइडेन को 8.1 करोड़ वोट मिले, जबकि ट्रम्प को 7.4 करोड़ वोट मिले। इलेक्टोरल कॉलेज में बाइडेन को 306 वोट जबकि ट्रम्प को 232 वोट मिले। वहां राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा इलेक्टोरल वोट से ही तय होता है। हर राज्य को उसकी आबादी और संसद में उसके प्रतिनिधित्व के आधार पर कुछ इलेक्टोरल वोट मिलते हैं। अमेरिका में सभी राज्यों को मिलाकर 538 इलेक्टोरल वोट हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए किसी उम्मीदवार को 270 वोट चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर किसी उम्मीदवार को किसी राज्य में सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, तो आम तौर पर उस राज्य के सभी इलेक्टोरल वोट उस उम्मीदवार को मिल जाते हैं। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- अमेरिका में भारत जैसा चुनावी सिस्टम हो:हर भारतीय वोटर के पास फोटो ID अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला देते हुए ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पास कराने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में 27 साल रही भारतवंशी महिला हिरासत में:ICE ने पूछताछ के बाद किया डिटेन; वेंकटा के पास 2013 से ग्रीन कार्ड
अमेरिका में 27 साल से रह रहीं भारतीय मूल की वेंकटा वासमसेट्टी को इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में ले लिया। 11 अगस्त को शार्लोट स्थित ICE कार्यालय में नियमित चेक-इन के दौरान पूछताछ के बाद उन्हें डिटेन किया गया। वेंकटा के पास 2013 से ग्रीन कार्ड है और वह नॉर्थ कैरोलिना के सरकारी स्कूल में स्पेशल-नीड्स बच्चों को पढ़ाती हैं। भारत जाने के बाद ग्रीन कार्ड पर सवाल उठा वेंकटा जुलाई 2022 में बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए भारत आई थीं। वहां उन्हें कोविड हुआ और करीब दो हफ्ते अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वह फरवरी 2023 में करीब 7 महीने बाद अमेरिका लौटीं। अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी लंबी गैर-मौजूदगी को आधार बनाकर सवाल उठाया कि क्या उन्होंने अमेरिका में अपना स्थायी निवास छोड़ दिया था। वेंकटा के वकीलों ने कहा कि उनका घर, नौकरी और परिवार अमेरिका में है और उन्होंने स्थायी रूप से भारत लौटने का इरादा नहीं किया था। ग्रीन कार्डधारक 180 दिन से ज्यादा अमेरिका से बाहर रहें तो इमिग्रेशन अधिकारी यह जांच कर सकते हैं कि उन्होंने अमेरिका को अपना स्थायी घर बनाए रखा है या नहीं। मई में जज ने डिपोर्टेशन केस खत्म किया वेंकटा के खिलाफ डिपोर्टेशन की कार्रवाई चल रही थी और उन्हें नियमित रूप से ICE के सामने पेश होना पड़ता था। 19 मई को इमिग्रेशन जज ने केस खत्म कर दिया। जज ने कहा कि सरकार यह स्पष्ट और ठोस सबूत नहीं दे पाई कि वेंकटा को अमेरिका से बाहर किया जा सकता है। इसके बावजूद 11 अगस्त को ICE कार्यालय में चेक-इन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल उन्हें जॉर्जिया के इरविन काउंटी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। डायबिटीज की मरीज, वकीलों ने कोर्ट में चुनौती दी वेंकटा को गंभीर डायबिटीज है और उनके वकील के मुताबिक, हिरासत में लिए जाने के समय उनके पास इंसुलिन और जरूरी मेडिकल सप्लाई नहीं थीं। उनके वकीलों ने हिरासत को फेडरल कोर्ट में चुनौती दी है। 13 अगस्त को जज ने ICE से तीन दिन में यह बताने को कहा कि वेंकटा को हिरासत में रखने का कानूनी आधार क्या है। वेंकटा का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उनकी दो बेटियां और दो पोते-पोतियां अमेरिकी नागरिक हैं। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- रूस सीक्रेट रूट से ईरान को हथियार भेज रहा:मिसाइल-ड्रोन पार्ट्स और गोला-बारूद शामिल; ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर समुद्री रास्ते का इस्तेमाल रूस सीक्रेट रास्ते के जरिये ईरान के सैन्य भंडार को मजबूत करने में मदद कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को TNT विस्फोटक, ड्रोन के पार्ट्स और गोला-बारूद भेज रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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