Meerut Murder Case में सौतन समेत 3 गिरफ्तार, बेटे के विवाद में की थी हत्या
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक महिला की हत्या के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में मृतका के पति की दूसरी पत्नी भी शामिल है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने वारदात में कथित तौर पर इस्तेमाल एक कार भी बरामद की है। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अभिजीत कुमार के अनुसार, 19 अगस्त को सरधना क्षेत्र में गन्ने के खेत में एक अज्ञात महिला का शव पड़ा होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और महिला की पहचान कराने के प्रयास शुरू किए।
पुलिस ने मृतका की तस्वीर सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और फेसबुक पर प्रसारित कराई। 21 अगस्त को भावनपुर थाना क्षेत्र के सियाल गांव निवासी जुनैद ने तस्वीर देखकर महिला की पहचान अपनी बहन शीबा (25) के रूप में की। इसके बाद जुनैद की शिकायत पर सरधना थाने में पांच लोगों के खिलाफ हत्या सहित भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि सादिक की पहली पत्नी आसिया से पांच बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है। पुत्र की इच्छा में सादिक ने शीबा से दूसरी शादी की थी और दोनों का करीब 18 माह का एक बेटा है। पुलिस ने कहा कि शीबा के पुत्र होने के बाद आसिया बच्चे को अपने पास रखना चाहती थी और शीबा की हत्या का दबाव बना रही थी।
आरोप है कि साजिश रचकर शीबा को घूमाने के बहाने कार में बैठाया गया और कार में उसके साथ मारपीट करने के बाद ईंट से सिर पर प्रहार कर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव को कुशावली-सलावा मार्ग स्थित गन्ने के खेत में फेंक दिया गया। पुलिस और स्वाट टीम ने शनिवार को आरोपी शादाब तथा आरोपी महिलाओं वसीला और आसिया को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने बताया कि मामले में वांछित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
Neha Pachisia मामले में MP Police ने गठित की SIT, जमीन सौदे की होगी जांच
मध्यप्रदेश पुलिस ने कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) नेहा पचिसिया के खिलाफ हत्या के एक आरोपी से जुड़े कथित जमीन सौदे के मामले में लगे आरोपों की जांच के लिए शनिवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। कटनी के कुठला थाने में 19 अगस्त को पचिसिया (37) और उनके दो सहयोगियों, जिनमें क्षितिज राज बरापात्रे भी शामिल हैं, के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जबलपुर जोन के पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि एसआईटी मामले की जांच कर रहीं जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अंजना तिवारी की सहायता करेगी।
कटनी के पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा के अनुसार, मामला हत्या के आरोपी रमेश लोधी की गिरफ्तारी में कथित तौर पर देरी करने और निर्धारित 90 दिन की अवधि में उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। विश्वकर्मा ने कहा, ‘‘जब हमारे संज्ञान में आया कि आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है तो हमने उसे गिरफ्तार कराया।’’ हालांकि, आरोपपत्र दाखिल नहीं होने के कारण लोधी को जुलाई के पहले सप्ताह में जमानत मिल गई। विश्वकर्मा ने कहा, ‘‘मैंने जांच की समीक्षा कराई...मैंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए, जिसमें मामला संदिग्ध पाया गया।’’ इसके बाद जबलपुर की एएसपी अनु बेनीवाल ने जांच की।
जांच में सामने आया कि लोधी और उसके परिवार की जमीन 18 लाख रुपये में मारूफ अहमद हनफी को बेची गई, जबकि सरकार के निर्देश के अनुसार उसकी कीमत 82 लाख रुपये थी और बाजार मूल्य करीब दो करोड़ रुपये आंका गया। पुलिस अधीक्षक विश्वकर्मा ने कहा, ‘‘कोई व्यक्ति इतनी कम कीमत पर जमीन क्यों बेचेगा? इसका मतलब है कि उस पर दबाव था।
और दबाव यह था कि तुम्हें जेल नहीं भेजा जाएगा।’’ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को पचिसिया को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया था। रजनी नगर थाने के प्रभारी अरुण पाल सिंह, उप निरीक्षक सौरभ सोनी, सीएसपी के रीडर नरेंद्र पांडे, गनमैन माटू और चालक केशव को भी निलंबित किया गया है। विश्वकर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ कथित अपराध में शामिल होने का आरोप नहीं है, लेकिन सेवा नियमों के तहत जिन आदेशों का पालन नहीं किया जाना चाहिए था, उनका कथित तौर पर पालन करने के कारण उन्हें निलंबित किया गया है।
पचिसिया के खिलाफ एक अलग विभागीय जांच भी की जा रही है। इसमें एक ट्रांसपोर्टर के डंपर ट्रकों को रोकने के बाद उससे कथित तौर पर धन वसूली करने का आरोप है। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील की रहने वाली पचिसिया ने पुलिस विभाग में आने से पहले एयर होस्टेस के रूप में काम किया था और कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी सेवाएं दी थीं।
उन्होंने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की 2012 की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सरकारी सेवा में प्रवेश किया। पुलिस विभाग में शामिल होने से पहले उन्होंने कुछ समय महिला एवं बाल विकास विभाग में भी काम किया था। गुना में नगर पुलिस अधीक्षक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान महिला मोबाइल पुलिस थाना शुरू करने के लिए उन्हें ‘‘लेडी सिंघम’’ के नाम से जाना जाने लगा था।
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