उप्र: मथुरा में अज्ञात वाहन की टक्कर से छात्रा की मौत
उप्र: मथुरा में अज्ञात वाहन की टक्कर से छात्रा की मौतExplainer: किसी Actor को A-List Star कैसे माना जाता है? जानिए कौन तय करता है स्टारडम
How Decide A-List Star: ए-लिस्ट स्टार का मतलब सिर्फ यह नहीं होता है कि कोई एक्टर पॉपुलर है तो वह लिस्ट स्टार है. फिल्म इंडस्ट्री में यह ए लिस्ट स्टार उसे कहा जाता है जिसकी मौजूदगी किसी प्रोजेक्ट की कमाई, लोगों की दिलचस्पी और मार्केट की कीमत पर बड़ा असर डालती है. सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स, एक बड़ी हिट या कोई पुरस्कार किसी कलाकार को फेमस जरूर कर सकता है. लेकिन ए-लिस्ट स्टारडम इससे कहीं बड़ा होता है. इसमें बॉक्स ऑफिस, प्रोड्यूसर का भरोसा, ओपनिंग पावर, ब्रांड वैल्यू, इंटरनेशनल पहचान और लगातार हिट फिल्मों का ट्रैक रिकॉर्ड जैसे कई पहलू शामिल होते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि ए-लिस्ट की कोई एक ऑफिशियल पोस्ट नहीं होती है जो कलाकारों को दिया जाता है. आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं.
ए-लिस्ट शब्द की शुरुआत कैसे हुई?
ए-लिस्ट शब्द की जड़ें हॉलीवुड के पुराने स्टूडियो सिस्टम से जुड़ी हुई मानी जाती हैं. 20वीं सदी के मध्य में स्टूडियो और कास्टिंग से जुड़े लोग उन आर्टिस्ट की लिस्ट बनाते थे,जिनकी फिल्मों की सबसे ज्यादा करने उम्मीद होती थी. इन लिस्ट में कलाकारों को अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाता था और सबसे ऊपर ए-लिस्ट का नाम आता था. टाइम के साथ यह शब्द पूरी फिल्म इंडस्ट्री में पॉपुलर हो गया. आज इसका यूज ऐसे कलाकार के लिए किया जाता है जिसका नाम अपने आप में फिल्म बेचने की पावर रखता हो.
सिर्फ पॉपुलैरिटी नहीं, बैंकैबिलिटी भी होता है पैमाना
ए-लिस्ट स्टार की सबसे अहम पहचान बैंकैबिलिटी है. आसान शब्दों में कहे तो इसका मतलब है कि किसी एक्टर या एक्ट्रेस का नाम फिल्म से जुड़ते ही प्रोड्यूसर, इन्वेस्टर्स और डिस्ट्रीब्यूटर उस प्रोजेक्ट को ज्यादा भरोसे के साथ देखते हैं. अगर किसी स्टार की वजह से फिल्म को कमाई करना आसान हो जाता है. इतना ही नहीं बड़े लेवल पर रिलीज मिलती है और लोगों में पहले से एक्साइटमेंट बनता है, तो उसकी मार्केट बैल्यू मजबूत मानी जाती है. टॉम क्रूज, लियोनार्डो डिकैप्रियो और ड्वेन जॉनसन जैसे हॉलीवुड नामों के साथ, इंडियन सिनेमा में शाहरुख खान, सलमान खान और रजनीकांत ए लिस्ट स्टार की कैटेगरी में गिने जाते हैं.
कौन तय करता है कि स्टार ए-लिस्ट है?
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह फैसला कौन करता है. जवाब है कि कोई एक शख्स या संस्था नहीं. फिल्म के प्रोड्यूसर , स्टूडियो,इन्वेस्टर्स, डिस्ट्रीब्यूटर, थिएटर मालिक, कास्टिंग एजेंसियां, ट्रेड विश्लेषक और सबसे बढ़कर लोगों का व्यवहार मिलकर किसी स्टार की मार्केट वैल्यू तय करते हैं. अवॉर्ड देने वाली संस्थाएं एक्टिंग या अचीवमेंट्स को सम्मान दे सकती हैं, लेकिन वे किसी को ऑफिशियल तौर पर ए-लिस्ट स्टार का ऐलान नहीं करतीं. इसलिए ए-लिस्ट एक कर्मशियल और मार्केट के आधार पर तय होती है, न कि कोई सरकारी या पुरस्कार संबंधी सर्टिफिकेट होता है.
अल्मर स्केल से कैसे समझी जाती है स्टार वैल्यू?
हॉलीवुड में एक्टर की मार्केट वैल्यू को समझने के लिए पत्रकार और एक्सपर्ट्स जेम्स अल्मर का अल्मर स्केल चर्चित रहा है. दिए गए आंकड़ों के अनुसार यह पैमाना करीब 1,400 से ज्यादा एक्टर्स के डेटा को ट्रैक करता है और कलाकारों को ए+, ए, बी+, बी, सी और डी जैसी कैटेगरी में देखा जाता है. इसमें सिर्फ पॉपुलर नहीं, बल्कि ट्रैक रिकॉर्ड, हालिया बॉक्स ऑफिस वैल्यू, ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन वैल्यू, एक्टिंग स्किल और प्रोफेशनल रवैये जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है. हालांकि इसे पूरी इंडस्ट्री का ऑफिशियल रूल नहीं समझा जाना चाहिए. यह स्टार की कमर्शियल पावर को देखने का फेमस फॉर्मूला है.
डिस्ट्रीब्यूटर और थिएटर मालिक क्यों अहम हैं?
किसी स्टार की रियल मार्केट वैल्यू का पता फिल्म रिलीज होने से पहले भी लगाया जाता है. डिस्ट्रीब्यूटर यह देखते हैं कि उस एक्टर की फिल्म के राइट्स खरीदने में कितना जोखिम है. अगर किसी आर्टिस्ट के नाम पर डिस्ट्रीब्यूटर ज्यादा कीमत देने और फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करने के लिए तैयार हैं, तो यह मजबूत मार्केट वैल्यू का मानी जा सकती है. थिएटर मालिक भी देखते हैं कि किस स्टार की फिल्म पहले दिन दर्शकों को खींच सकती है. इसी को ओपनिंग पावर कहा जाता है. किसी एक्टर की फिल्म का सिर्फ ट्रेलर नहीं, बल्कि उसका नाम भी टिकट बेचने लगे, तो उसे लिस्ट स्टार कहा जा सकता है.
एडवांस बुकिंग और ओपनिंग पावर भी होती है अहम
ए-लिस्ट स्टार की पावर का सबसे साफ संकेत उसकी फिल्म की शुरुआती कमाई में दिखाई देता है. अगर किसी फिल्म का बड़ा गाना या बेहद पॉपुलर ट्रेलर न होने के बावजूद सिर्फ स्टार के नाम से एडवांस बुकिंग शानदार हो रही है तो यह उसकी स्टार पावर बताती है. पहले वीकेंड में फिल्म की बड़ी कमाई भी मार्केट वैल्यू के भरोसे का संकेत हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि हर ए-लिस्ट स्टार की हर फिल्म हिट होगी. बल्कि बात यह है कि उसकी प्रेजेंस फिल्म को शुरुआत में शुरुआत दे सकती है.
फ्लॉप फिल्म के बाद भी स्टारडम क्यों बचा रहता है?
ए-लिस्ट स्टार की खासियत यह भी मानी जाती है कि एक-दो फ्लॉप फिल्मों के बाद भी उसकी मार्केट वैल्यू कम नहीं होती है. बड़े स्टार की पिछली फिल्मों का रिकॉर्ड, फैन बेस और शुरुआती लोग मांग उसे कुछ सुरक्षा देते हैं. इसके उलट, कम पॉपुलर या कम मार्केट वैल्यू वाले एक्टर को लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद आगे काम मिलने में दिक्कत आ सकती है. यही कमर्शियल सुरक्षा ए-लिस्ट स्टारडम का इंपोर्टेंट हिस्सा है. फिर भी लगातार फ्लॉप फिल्मों का असर किसी भी एक्टर पर पड़ सकता है, इसलिए यह सिक्योरिटी हमेशा के लिए नहीं होती है.
इंटरनेशनल पहचान भी बनाती है बड़ा स्टार
आज स्टारडम सिर्फ देश या एक लैंग्वेज तक लिमिट नहीं है. जिस कलाकार की फिल्में अलग-अलग देशों में लोगों को थिएटर तक लाती है. उसकी इंटरनेशनल वैल्यू बढ़ जाती है. जैसे शाहरुख खान की फिल्में विदेशों में भी देखी जाती है और टॉम क्रूज की फिल्में कई देशों में आज भी देखी जाती हैं, उन्हें ज्यादा देशों में लोग पहचानते हैं. इसका मतलब यह है कि ए-लिस्ट स्टार की पहचान केवल अपने ही देश तक सीमित नहीं रहती. अलग-अलग मार्केट में फिल्म बेचने की पावर भी उसकी वैल्यू तय करती है.
ये भी पढ़ें: Explainer: कैसे शुरू हुई गोविंदा-सुनीता की Love Story? शादी छिपाने से लेकर अफेयर की खबरों तक पूरी कहानी
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
IBC24
News Nation





