पारदर्शिता और अनुपालन को आसान बनाने के लिए पब्लिक इश्यू से जुटाई गई राशि के उपयोग से जुड़े खुलासा नियमों की समीक्षा कर रहा है सेबी: चेयरमैन
नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) सार्वजनिक निर्गमों (पब्लिक इश्यू) के जरिए जुटाई गई धनराशि के उपयोग की निगरानी और उससे संबंधित खुलासों के मौजूदा ढांचे की समीक्षा कर रहा है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को अधिक समयबद्ध और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना तथा कंपनियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना है। यह बात सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को इंस्टीट्यूट ऑफ डायरेक्टर्स के वार्षिक निदेशक सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए कही।
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि प्रभावी कॉरपोरेट गवर्नेंस केवल खुलासों की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि निवेशकों को उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और उपयोगिता पर भी आधारित होती है।
उन्होंने कहा कि सेबी वर्तमान में उस व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है जिसके तहत कंपनियों द्वारा पब्लिक इश्यू से जुटाए गए धन के उपयोग की निगरानी और रिपोर्टिंग की जाती है। नियामक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ऐसी जानकारियां अधिक तेजी से निवेशकों तक पहुंचें और कंपनियों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ भी कम हो।
पांडे ने कहा, वास्तविक पारदर्शिता जानकारी की मात्रा नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, समयबद्धता और उपयोगिता में होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खुलासा नियमों का उद्देश्य निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करना होना चाहिए, न कि केवल रिपोर्टिंग संबंधी औपचारिकताओं को बढ़ाना।
सेबी प्रमुख ने बताया कि नियामक ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण घटनाओं और सूचनाओं के खुलासे से जुड़े नियमों को लगातार मजबूत किया है। इसके तहत मैटेरियलिटी थ्रेशहोल्ड और निर्धारित समयसीमा जैसे प्रावधान लागू किए गए हैं, ताकि महत्वपूर्ण सूचनाएं निवेशकों तक बिना देरी के पहुंच सकें और खुलासों में एकरूपता बनी रहे।
उन्होंने यह भी बताया कि सेबी संबद्ध पक्ष लेनदेन (रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस) से जुड़े नियमों में भी सुधार पर विचार कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य कंपनियों के लिए अनुपालन को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है, जबकि निवेशकों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।
पांडे ने कहा कि नियामकीय ढांचा ऐसा होना चाहिए जो संतुलित और अनुपातिक हो तथा एक ही मामले में बार-बार अनुपालन संबंधी बोझ न पैदा करे। इसी दिशा में सेबी एक ऐसे ढांचे पर भी विचार कर रहा है जिसके तहत एक से अधिक शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियों को एक ही उल्लंघन के लिए कई बार दंडित न किया जाए।
उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य नियमन को अधिक प्रभावी बनाना है, जबकि उसके मूल उद्देश्य और निवेशक संरक्षण को पूरी तरह बरकरार रखना है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
असम में जैव प्रौद्योगिकी में बड़ी कामयाबी, देशी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली आईवीएफ बछिया का जन्म: सीएम सरमा
गुवाहाटी, 22 अगस्त (आईएएनएस)। असम ने पशुधन जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य में देशी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली आईवीएफ बछिया का जन्म हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस विकास को असम की सभ्यता, संस्कृति और सृजन का ऐतिहासिक संगम बताया और कहा कि यह उपलब्धि राज्य के पशुधन और डेयरी क्षेत्र के लिए नए रास्ते खोल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा, असम की मूल लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली आईवीएफ मादा बछिया का जन्म असम पशु चिकित्सा और मत्स्य विश्वविद्यालय में हुआ है।
यह सफलता गुवाहाटी के खानापारा स्थित पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय की आईवीएफ प्रयोगशाला में हासिल की गई है। यह प्रयोगशाला राष्ट्रीय गोकुल मिशन के सहयोग से स्थापित की गई है।
असम की स्वदेशी नस्ल लखीमी मवेशियों के संरक्षण के लिए यह विकास विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एडवांस्ड असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी से मूल्यवान देशी आनुवंशिक संसाधनों को संरक्षित करते हुए आनुवंशिक रूप से बेहतर पशुओं की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सरमा ने कहा कि यह उपलब्धि स्वदेशी नस्ल संरक्षण, बेहतर रोग नियंत्रण और अधिक दुग्ध उत्पादकता सहित कई क्षेत्रों में योगदान दे सकती है। लंबे समय में इन प्रयासों से असम की डेयरी अर्थव्यवस्था मजबूत होने और पशुपालक किसानों की आय में सुधार होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा, इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे सभी पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों और पेशेवरों को मेरी हार्दिक बधाई। उन्होंने कहा कि उनका काम असम के डेयरी क्षेत्र के लिए एक नए युग की शुरुआत करने की क्षमता रखता है। उन्होंने नवजात बछिया को आकार में छोटा लेकिन असम के जैव प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के लिए वैज्ञानिक उपलब्धि के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
यह नवीनतम उपलब्धि पशुधन विकास में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी को लाने के असम के चल रहे प्रयासों पर आधारित है। इस साल की शुरुआत में पशु चिकित्सा महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने असम की पहली आईवीएफ बछिया, सोनापुर में जन्मी गिर नस्ल की मादा बछिया पैदा की थी, जिसने फील्ड परिस्थितियों में भ्रूण-स्थानांतरण तकनीक की व्यवहार्यता को प्रदर्शित किया था।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि ऐसी तकनीकें बेहतर आनुवंशिक स्टॉक के तेजी से गुणन को सक्षम कर सकती हैं, जिससे संभावित रूप से दूध उत्पादकता में सुधार और डेयरी किसानों की आय को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसलिए लखीमी बछिया का सफल जन्म आधुनिक प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी को स्वदेशी मवेशी नस्ल के संरक्षण के साथ जोड़ता है, जो असम को अपने पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक नया उपकरण देता है।
सरमा ने गौ माता का आह्वान करते हुए अपने संदेश का समापन किया और इस उपलब्धि को एक बछिया के जन्म से कहीं अधिक महत्व रखने वाला मील का पत्थर बताया।
--आईएएनएस
डीएससी
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