Gorkha समझौते का मसौदा बनाने के लिए MHA ने गठित की समिति, सांसद Raju Bista का बयान
दार्जिलिंग से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद राजू बिष्ट ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार ने गोरखा मुद्दे पर अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत एक समिति गठित की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गोरखा नेताओं और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच हुई अहम बैठक के बाद बिष्ट ने यह जानकारी दी। इस बैठक का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से जारी समस्याओं के ‘‘स्थायी राजनीतिक समाधान’’ के लिए आगे की रूपरेखा तय करना था।
शाह के उत्तर बंगाल दौरे के तीसरे और अंतिम दिन दार्जिलिंग की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित सुकना के एक होटल में यह बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, पर्वतीय क्षेत्र के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और अन्य हितधारक शामिल हुए। बिष्ट ने कहा, ‘‘गृह मंत्रालय के तहत वार्ताकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।
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यह समिति आज हुए समझौते के अंतिम मसौदे को तैयार करने का काम करेगी।’’ गृह मंत्रालय ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह को अक्टूबर 2025 में इस मुद्दे पर सरकार का आधिकारिक वार्ताकार नियुक्त किया था। उनकी भूमिका राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने और गोरखा समुदाय की काफी समय से लंबित मांगों का समाधान तलाशने पर केंद्रित है। बिष्ट ने कहा कि शनिवार की बैठक एक ऐतिहासिक दिन पर हुई है क्योंकि 1988 में इसी तारीख को गोरखा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
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केंद्र, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के बीच हुए इस समझौते के बाद दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (डीजीएचसी) का गठन हुआ था। इससे पहले अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर हिंसक आंदोलन हुआ था। बिष्ट ने कहा, ‘‘पर्वतीय समुदायों का संघर्ष चार दशक से अधिक पुराना है।
इस दौरान पिछली वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को कुचला। हमारे करीब 2,000 लोगों ने जान गंवाई, 5,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए और महिलाओं को यातनाएं दी गईं तथा उनके साथ दुष्कर्म किया गया।’’ उन्होंने कहा कि बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं और अपेक्षाएं सामने रखीं तथा मुख्यमंत्री ने भी बताया कि वह पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के मुद्दों का समाधान किस तरह करना चाहते हैं। बिष्ट ने कहा, ‘‘सभी पक्षों की बात सुनने के बाद शाह ने बैठक का सार रखते हुए बताया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे का स्थायी समाधान किस प्रकार किया जाएगा।’’ बैठक में भाजपा के चुनावी वादे के अनुरूप संवैधानिक ढांचे के तहत दार्जिलिंग पहाड़ियों की समस्याओं का ‘‘स्थायी राजनीतिक समाधान’’ तलाशने पर चर्चा हुई।
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बैठक में शुभेंदु अधिकारी के अलावा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) प्रमुख बिमल गुरुंग, पार्टी के वरिष्ठ नेता रोशन गिरि, जीएनएलएफ प्रमुख मान घीसिंग, राज्य सरकार के कई मंत्री, पर्वतीय क्षेत्र के भाजपा विधायक और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। पिछली राज्य सरकारों ने डीजीएचसी और गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) जैसी व्यवस्थाओं के जरिए इस मुद्दे के समाधान का प्रयास किया था, लेकिन इनसे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति, आर्थिक समृद्धि और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित नहीं हो सकी।
Bhagwant Mann की पत्नी Gurpreet Kaur ने पूर्व जज को भेजा कानूनी नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर ने दुष्कर्म के एक मामले को दबाने के लिए पांच करोड़ रुपये मांगने का आरोप लगाने के लिए शनिवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश को कानूनी नोटिस भेजा। आम आदमी पार्टी (आप) के सूत्रों के अनुसार डॉ. गुरप्रीत कौर ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश को कानूनी नोटिस भेजकर कहा कि वह 24 घंटे में इसका जवाब दें और ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि यह मामला तब सामने आया जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पंजाब सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख को एक शिकायत के संबंध में नोटिस जारी किया।
उन्होंने बताया कि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मान की पत्नी ने दुष्कर्म के एक मामले को दबाने के लिए पांच करोड़ रुपये की मांग की थी। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और मुख्यमंत्री को इन आरोपों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। वडिंग ने यहां पत्रकारों से कहा, मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए।
ऐसे आरोप क्यों लगाए गए हैं, मामला क्या है, उन्हें इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए। शिरोमणि अकाली दल के नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को आरोपों का जवाब देना चाहिए। मजीठिया ने शनिवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, आपकी पत्नी पर पांच करोड़ रुपये रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है और एनएचआरसी ने आपके डीजीपी और मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है।
उन्होंने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए भगवंत मान को तुरंत मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करनी चाहिए। मजीठिया ने अपनी पोस्ट में कहा, भगवंत मान, आपकी पत्नी के खिलाफ पांच करोड़ रुपये मांगने का गंभीर आरोप लगाया गया है। नैतिक आधार पर पंजाब के लोगों का आप पर भरोसा खत्म हो गया है।
तुरंत पंजाब के राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेजें। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अधिकारियों को आरोप की जांच करने और दो सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। आयोग के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि दुष्कर्म के एक मामले के संबंध में पांच करोड़ रुपये की मांग की गई थी और इसमें कथित तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री की पत्नी का नाम जुड़ा था।
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