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MPPMCL और UPPCL में Power Banking का करार, 2000 MW सौर ऊर्जा खरीदेंगे दोनों राज्य

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश ने मौसम के हिसाब से बिजली की मांग में होने वाले अंतर को देखते हुए इसकी खरीद, आपूर्ति की व्यवस्था और मध्यम अवधि में बिजली बैंकिंग व्यवस्था तलाशने के लिए एक समझौता किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के बीच यह समझौता शुक्रवार को लखनऊ में हुआ।

एमपीपीएमसीएल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी पंकज स्वामी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि समझौते के दौरान मध्यप्रदेश के ऊर्जा सचिव विशेष गढ़पाले और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन आशीष कुमार गोयल मौजूद थे। स्वामी ने बताया कि मध्यप्रदेश में अक्टूबर से मार्च तक रबी मौसम के दौरान, मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में खपत के कारण बिजली की मांग चरम पर रहती है जबकि उत्तर प्रदेश में अप्रैल से सितंबर के बीच खरीफ और गर्मी के महीनों में मांग अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में बिजली की मांग के अलग-अलग स्वरूप के कारण उत्पादन क्षमता का अधिक प्रभावी ढंग से साझा उपयोग किया जा सकता है और बिजली खरीद की लागत कम की जा सकती है।

समझौते के तहत दोनों राज्यों ने प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से 2,000 मेगावाट की एकीकृत सौर ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली क्षमता की खरीद की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से बिजली संसाधनों के कुशल साझा उपयोग, परिसंपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल और दीर्घकालिक बिजली संसाधन उपलब्धता की योजना बनाने में मदद मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि इस पहल से बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

इससे बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार सृजन के अवसर भी पैदा होंगे। दोनों राज्यों ने संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, ग्रिड में लचीलापन और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने तथा महंगी अल्पकालिक बिजली खरीद पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से मध्यम अवधि की सुनिश्चित बिजली बैंकिंग व्यवस्था तलाशने पर भी सहमति जताई है। स्वामी ने बताया कि समझौते पर एमपीपीएमसीएल के मुख्य महाप्रबंधक (गैर-पारंपरिक ऊर्जा) जी. एस. खानूजा और यूपीपीसीएल के निदेशक (योजना) दीपक रायजादा ने हस्ताक्षर किए।

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CJI Surya Kant बोले, मजबूत संस्थाओं और भरोसेमंद न्यायिक फैसलों से ही बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि देशों से जिस बड़े पैमाने पर आर्थिक वृद्धि बनाए रखने की उम्मीद की जाती है, वह केवल भौगोलिक स्थिति या संसाधनों के बूते संभव नहीं है तथा लगातार भरोसेमंद न्यायिक फैसलों के जरिए सभी को समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए ‘‘न्याय-नॉमिक्स’’ (न्याय के अर्थशास्त्र) की जरूरत है। प्रधान न्यायाधीश ने यहां 11वें ‘ब्रिक्स प्लस लीगल फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा कि संस्थाएं आर्थिक वृद्धि के इर्द-गिर्द खड़ा किया गया कोई अस्थायी ढांचा नहीं, बल्कि उसकी बुनियाद हैं। इस मंच का विषय ‘आर्थिक मजबूती, नवोन्मेष और स्थिरता के लिए कानून के शासन की रूपरेखा एवं संस्थागत क्षमता निर्माण’ था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि भारत की प्रगति में मजबूत संस्थाओं की अहम भूमिका है और इनमें न्यायपालिका की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है तथा यही बात ‘ब्रिक्स प्लस’ देशों पर भी लागू होती है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देशों से जिस बड़े पैमाने पर आर्थिक वृद्धि बनाए रखने की उम्मीद है, वह केवल अनुकूल भौगोलिक स्थिति या संसाधनों के सहारे संभव नहीं है। इसके लिए ऐसी मजबूत संस्थाओं का होना जरूरी है, जिन पर भरोसा किया जा सके।

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शायद आंकड़े इस बात को शब्दों से बेहतर ढंग से स्पष्ट कर सकते हैं।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘न्याय-नॉमिक्स यानी सरल शब्दों में न्याय का अर्थशास्त्र। न्यायिक फैसलों में निरंतरता और न्याय प्रक्रिया पर भरोसा लेन-देन की लागत कम करता है। इससे बाजार में सभी को बराबरी का अवसर मिलता है और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलता है।’’ उन्होंने कहा कि भारत समेत ‘ब्रिक्स प्लस’ की किसी भी अर्थव्यवस्था ने केवल प्राकृतिक संसाधनों के बल पर प्रगति नहीं की है और इन देशों का विकास इस बात पर भी निर्भर करता है कि वहां किए गए वादों एवं समझौतों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

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प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर आज आप अपनी शब्दावली में एक नया शब्द शामिल करना चाहें तो वह ‘न्याय सेतु’ होना चाहए। यह ऐसा सेतु है जो 11 अलग-अलग कानूनी परंपराओं को जोड़ता है। इन सभी की यह साझा सोच है कि भरोसा अपने आप बनने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसे लगातार प्रयासों से मजबूत किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘संस्थाएं आर्थिक वृद्धि के बाद खड़ा किया जाने वाला सहायक ढांचा नहीं हैं, बल्कि वे उसकी बुनियाद हैं।

अगर यह बुनियाद कमजोर हो तो तेजी से बढ़ती दिख रही अर्थव्यवस्था भी पहली बड़ी चुनौती के सामने डगमगा सकती है।

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153.6 KMPH की रफ्तार से गेंद फेंक कार्तिक त्यागी ने मचाया तहलका, टीम इंडिया के स्टार का किया शिकार

kartik tyagi 153.6 kmph ball: यूपी टी20 लीग में कई युवा स्टार्स अपने दमदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींच रहे हैं. इस बीच मेरठ मेवरिक्स के कार्तिक त्यागी ने लगभग 154 KMPH की रफ्तार से गेंद डालकर सुर्खियां बटोरी हैं. उन्होंने गोरखपुर लायंस के खिलाफ यह तेज रफ्तार गेंद फेंकी और विकेट भी चटकाया. Tue, 25 Aug 2026 00:01:29 +0530

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