एक संसद सत्र में बिल लाने-पास कराने का ट्रेंड बढ़ा:रिपोर्ट- मानसून सत्र में 7 बिल बिना चर्चा 5 मिनट में ही पास
संसद में अब तक पेश किए गए आधे से ज्यादा बिल उसी सत्र के दौरान दोनों सदनों से पास हो गए। यह डेटा PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च ने जारी किया है। संस्था के सेशनवाइज डेटा के मुताबिक पिछले एक साल में बिल पेश करने और उन्हें पास कराने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। PRS के सेशनवाइज डेटा के एनालिसिस के अनुसार 18वीं लोकसभा के गठन के बाद से पेश किए गए 64 बिलों में से 34 (यानी 53%) उसी सत्र में दोनों सदनों से पास हो गए, जिसमें उन्हें पेश किया गया था। 16वीं लोकसभा में 189 में से 63 बिल यानी 33% उसी सत्र में पास हुए थे। 17वीं लोकसभा में यह आंकड़ा करीब दोगुना होकर 62% हो गया था। उस दौरान पेश किए गए 190 बिलों में से 117 उसी सत्र में पास हुए थे। डेटा तैयार करने वाली संस्था PRS संसद और राज्य विधानसभाओं के कामकाज पर रिसर्च और निगरानी करने वाला स्वतंत्र, गैर-लाभकारी संगठन है। 18वीं लोकसभा के सत्रों में बिल पास होने का आंकड़ा PRS के रिकॉर्ड के मुताबिक, 18वीं लोकसभा की शुरुआत में उसी सत्र में बिल पास होने की रफ्तार कम थी। इसके मुताबिक बजट सत्र में पेश किए गए 10 में से 5 बिल दोनों सदनों से उसी सत्र में पास हुए। 13 अगस्त को खत्म हुए मानसून सत्र में यह ट्रेंड सबसे ज्यादा दिखा। इस सत्र में पेश 12 में से 11 बिल सत्र खत्म होने से पहले पास हो गए। एकमात्र लंबित बिल इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 है। मानसून सत्र में सरकार के मूल एजेंडे में 5 नए बिल थे हाल ही खत्म हुए मानसून सत्र के लिए सरकार के मूल विधायी एजेंडे में 5 नए बिल पेश कर उन्हें पास कराने और 2 लंबित बिलों पर विचार कर उन्हें पास कराने की योजना थी। हालांकि, संसद से पास हुए 11 बिलों में से 6 मूल एजेंडे में पेश करने के लिए शामिल नहीं थे। सरकार के एजेंडे में विचार और पास कराने के लिए शामिल दो पेंडिंग बिलों में से कोई भी पास नहीं हुआ। ये विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल 2025 और फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट (FCRA) बिल 2026 हैं। VBSA बिल की जांच कर रही संसदीय समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है। वहीं, विपक्ष की ओर से बिल वापस लेने की मांग के बीच FCRA अमेंडमेंट बिल को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया है। PRS ने कम समय में बिल पास होने पर चिंता जताई PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च पहले भी कह चुका है कि बिल पेश होने और पास होने के बीच कम समय रहने से सांसदों को प्रस्तावित कानून की जांच के लिए कम समय मिलता है। इससे संबंधित पक्षों के साथ सलाह-मशविरा करने के मौके भी कम हो जाते हैं। मानसून सत्र में कई बिलों पर हुई चर्चा में लगा समय इस चिंता से जुड़ा है। PRS के मुताबिक, 9 बिल ऐसे पास हुए जिन पर उन्हें पेश करने वाले मंत्री के अलावा किसी सांसद ने बात नहीं की। 11 में से 7 बिल 5 मिनट या उससे कम समय में पास हो गए। 2024 से 2025 में बदला बिल पास होने का पैटर्न 2024 के बजट सत्र में पेश किए गए 11 में से एक भी बिल उसी सत्र में दोनों सदन से पास नहीं हुआ था। इसके बाद के शीतकालीन सत्र में पेश 4 बिल भी सत्र खत्म होने तक पेंडिंग रहे। शीतकालीन सत्र 2024 में संसद से पास होने वाला एकमात्र बिल भारतीय वायुयान विधेयक 2024 था। इसे पिछले बजट सत्र में पेश किया गया था। 2025 से यह पैटर्न बदल गया। 2025 के बजट सत्र में पेश किए गए 5 में से 3 बिल उसी सत्र में पास हुए। 2025 के मानसून सत्र में पेश किए गए 13 में से 8 बिल उसी सत्र में पास हुए। बाकी 5 बिल संसदीय समितियों के पास भेजे गए। 2025 के शीतकालीन सत्र में यह अनुपात और बढ़ा। इस सत्र में पेश किए गए 9 में से 7 बिल पास हुए, जबकि बाकी 2 बिल समितियों के पास भेजे गए। मानसून सत्र 2026 में दोनों सदनों का कामकाज इस साल का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चला। इसमें 19 बैठकें हुईं। NEET-UG पेपर लीक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर को मिले दान की चोरी के मुद्दों पर बार-बार हंगामा हुआ। PRS के मुताबिक, लोकसभा ने तय समय का केवल 15% और राज्यसभा ने 33% समय काम किया। लोकसभा में प्रश्नकाल तय समय का सिर्फ 1% और राज्यसभा में 12% चला। पूरे सत्र में लोकसभा का प्रश्नकाल केवल 9 मिनट हुआ। 380 लिस्टेड सवालों में से सिर्फ 2 का मौखिक जवाब दिया गया।
छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के NICU में आग, नवजात की मौत:सर्जन नहीं होने से जबलपुर किया गया था रेफर; हादसे में 3 बच्चे झुलसे
छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में शुक्रवार रात 2 से 3 बजे के बीच आग लग गई। शॉर्ट सर्किट से लगी आग की चपेट में तीन नवजात बच्चे आ गए। तीनों की उम्र 6 से 12 दिन के बीच है। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें सुबह करीब 5 बजे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां ले जाते समय रास्ते में एक की मौत हो गई। जिसकी मौत हुई है, वह बच्ची बताई जा रही है। किशनपुर चांद में रहने वाले पिता आदित्य वर्मा के मुताबिक, प्रसव के लिए पत्नी को तीन दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार रात 10:30 बजे उसने बच्ची को जन्म दिया। एक ही डोली में थे तीनों बच्चे डॉक्टर कंचन दुबे के मुताबिक, तीनों बच्चे कितने प्रतिशत झुलसे हैं, यह स्पष्ट नहीं है। बच्चों को सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें जबलपुर भेजा गया। डॉक्टर कंचन दुबे के अनुसार, NICU में एक प्लग में शॉर्ट सर्किट हुआ था। इसी के कारण उस डोली में आग लगी, जिसमें तीनों बच्चे थे। आग धीरे-धीरे डोली में लगे प्लास्टिक और कपड़ों तक पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शी आनंद के मुताबिक, आग लगते ही NICU में मौजूद स्टाफ ने अग्निशामक यंत्र की मदद से उसे बुझाने की कोशिश की। इसके बाद बच्चों को बाहर निकालकर प्राथमिक इलाज दिया गया। देखिए तस्वीरें इंफेक्शन के कारण भर्ती थे तीनों बच्चे घटना के समय NICU में 20 से ज्यादा नवजात और तीन स्टाफ सदस्य मौजूद थे। आग केवल एक यूनिट तक सीमित रही और उसी हिस्से को नुकसान पहुंचा है। मौके पर मौजूद परिजनों ने भी शॉर्ट सर्किट के बाद आग लगने की बात कही है। तीनों बच्चों को प्रसव के बाद इंफेक्शन होने के कारण NICU में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने भी अस्पताल पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन NICU में आग लगने के कारण और सुरक्षा इंतजामों की भी जांच कर रहा है। परिजन ने इलाज का खर्च उठाने की मांग की बच्चों के परिजन ने प्रशासन से इलाज का खर्च उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और जबलपुर में बच्चों के इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल होगा। अस्पताल प्रबंधन ने कहा- पहले फायर सेफ्टी ऑडिट हो चुका अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, नियमानुसार अस्पताल में पहले फायर सेफ्टी ऑडिट हो चुका है। जिस डोली में आग लगी, उसमें प्लास्टिक का टब रखा था और बच्चों को कपड़े से ढंक कर रखा गया था। शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारी के बाद प्लास्टिक और कपड़े ने आग पकड़ ली। NICU में लगातार ड्यूटी रहती है और स्टाफ की शिफ्ट बदलती रहती है। अस्पताल के मुताबिक, दो वार्ड बॉय भी हमेशा मौजूद रहते हैं, जिस बच्ची की मौत हुई, आग सीधे उसकी तरफ लगी थी, इसलिए वह बाकी बच्चों की तुलना में ज्यादा झुलस गई थी। यह खबर भी पढ़ें… '10 फीट दूर मरीज, बगल में बजता रहा संगीत':सरदारपुर अस्पताल में डॉक्टर की फेयरवेल पार्टी धार के सरदारपुर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की फेयरवेल पार्टी का वीडियो सामने आया है। अस्पताल परिसर के एक हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉक्टर और स्टाफ तेज संगीत पर नाचते-गाते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह आयोजन एक डॉक्टर की विदाई के लिए किया गया था। पढ़ें पूरी खबर…
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