ट्रंप ने कनाडा पर लगाया 50 फीसदी टैरिफ तो भड़के PM मार्क कार्नी, अमेरिका को दे डाली ये धमकी
अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड डील को लेकर हो रही बातचीत बेनतीजा रही. दोनों देशों के बीच इस पर सहमति नहीं बनी. उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा के प्रोडक्ट्स पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया. ट्रंप के इस टैरिफ से कनाडा के पीएम मार्क कार्नी भी भड़क गए और उन्होंने भी अमेरिका के सामानों पर उतना ही टैरिफ लगाने की बात कह दी. न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्नी ने शुक्रवार को कहा कि ट्रेड डील के लिए वॉशिंगटन की शर्तें मानने से इनकार करने के बाद, वे US टैरिफ का जवाब "डॉलर-के-बदले-डॉलर" (उतनी ही रकम के टैरिफ) से देंगे.
कनाडा ने ट्रेड डील से किया इनकार
US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने शुक्रवार को कहा कि "कनाडा ने इस हफ्ते की शुरुआत में तय हुई शर्तों के तहत ट्रेड डील को फाइनल करने से इनकार कर दिया." उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन की ओर से स्टील और एल्युमीनियम जैसे सेक्टर पर टैरिफ कम करने के ऑफर के बावजूद कनाडा ने इनकार कर दिया.
वहीं दूसरी ओर कनाडा के पीएम कार्नी ने एक बयान में कहा, "यूएस की प्रस्तावित शर्तों में आखिरी समय में किए गए बदलाव अनुचित और आर्थिक रूप से गलत थे, और इनसे किसी भी डील की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं." ये सब तब हुआ जब ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को "कनाडा के साथ डील करनी चाहिए," और इसके लिए उन्होंने कार्नी के साथ अपने "अच्छे रिश्तों" का जिक्र किया.
अमेरिका की शर्तें अनुचित थीं- कार्नी
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, "अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शर्तों में आखिरी समय में किए गए बदलाव अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदेह थे, और इनसे किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं." उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आने वाले दिनों में कनाडाई कर्मचारियों और व्यवसायों के लिए अतिरिक्त सहायता की घोषणा करेगी. बता दें कि कनाडा ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिकी टैरिफ से राहत की मांग कर रहा है, जिसका उसकी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है, नौकरियों का नुकसान हुआ है और वाशिंगटन के साथ उसके कभी मजबूत रहे व्यापारिक संबंधों में तनाव आया है.
कार्नी ने बार-बार कनाडाई लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी व्यापार समझौते के नतीजे से परे, अमेरिका के साथ संबंधों में स्थायी बदलाव आया है. उन्होंने यह भी कहा कि देश को अपने व्यापार में विविधता लानी चाहिए और अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए, क्योंकि कनाडा के कुल निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को ही जाता है.
टैरिफ का राजनीति असर
बता दें कि टैरिफ विवाद का राजनीतिक असर इसके आर्थिक असर से भी ज्यादा अहम हो सकता है, क्योंकि पिछले साल दोनों देशों के बीच 880 अरब डॉलर का सामान और सेवाएं खरीदी-बेची गई थीं. शुरू में ये टैरिफ बुधवार को रात 12 बजे से लागू होने वाला था, लेकिन न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने बातचीत के लिए दोनों पक्षों को और समय देने के लिए समय-सीमा तीन दिन बढ़ा दी.
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क्योंकि नहीं हुआ अमेरिका-कनाडा के बीच समझौता?
दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच दशकों से व्यापारिक विवाद रहे हैं, जिनमें कनाडा से सॉफ्टवुड लकड़ी के आयात और कनाडा के सुरक्षित डेयरी बाजार तक अमेरिका की पहुंच को लेकर असहमति शामिल है. इन तनावों के बावजूद, दोनों देशों ने सहयोगी, पड़ोसी और बड़े व्यापारिक साझेदार के तौर पर करीबी रिश्ते बनाए रखे हैं. 11 सितंबर के हमलों के बाद अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के साथ कनाडाई सैनिकों ने भी लड़ाई लड़ी थी. दोनों देशों की 5,525 मील लंबी सीमा बिना सुरक्षा के है, जबकि हर दिन लगभग 3,30,000 लोग और करीब 2 अरब डॉलर का सामान इस सीमा को पार करते हैं. साथ ही, लगभग 8,00,000 कनाडाई लोग भी अमेरिका में रहते हैं.
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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? जानें भाई-बहन से जुड़े इस त्योहार का धार्मिक महत्व और इतिहास
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन सनातन धर्म का प्रमुख त्योहार है. हिंदू धर्म में रक्षा और रक्षासूत्र को खास महत्व होता है. यह त्योहार भी रक्षा से ही जुड़ा हुआ है. इसमें बहन अपने भाई की कलाई में राखी बांधती है और उसकी लंबी आयु और अच्छे जीवन की कामना करती है. वहीं, भाई अपनी बहन को जीवनभर रक्षा करने का वरदान देता है. इस साल 28 अगस्त 2026 को शुक्रवार के दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा. पौराणिक कथाओं के अनुसार, रक्षासूत्र एक धागा होता है, जो सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. इस त्योहार की अपनी मूल जड़े हैं, जो पौराणिक और धार्मिक मानी जाती है.
रक्षाबंधन का अर्थ क्या है?
'रक्षाबंधन' इस शब्द का अर्थ दो शब्दों से मिलकर बनता है रक्षा और बंधन. इसलिए, इसका मतलब होता है ऐसा बंधन जो रक्षा और सुरक्षा का भाव दें. पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस वजह से इसे कई जगह इसे राखी पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन राखी बांधने के साथ बहने भाई को तिलक भी करती है. हालांकि, आज के समय में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहनों का प्रमुख त्योहार बन गया है लेकिन कई धार्मिक परंपरां में रक्षा सूत्र का महत्व अलग भी है.
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रक्षाबंधन की शुरुआत कैसे हुई थी?
रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर कोई निश्चित तारीख या घटना नहीं बताई गई है. इसके पीछे कई धार्मिक कथाएं और लोक कथाएं हैं. इन कथाओं ने समय के साथ इस त्योहार को मजबूती प्रदान की है. इनमें भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा भी काफी प्रसिद्ध मानी जाती है. इस कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लगी थी. इस वजह से खून बहना लगा था, इस रक्त रिसाव को रोकने के लिए द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण के हाथों में बांधी थी. द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से भगवान कृष्ण भावुक हो गए. मान्यता है कि उन्होंने द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दिया. बाद में जब महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब भगवान कृष्ण ने उनकी लाज बचाई. इस कथा को भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के भाव से जोड़कर देखा जाता है.
रक्षाबंधन से जुड़ी प्रचलित कथाएं
रक्षाबंधन की कथाओं में यम और यमुना की कथा भी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि सावन पूर्णिमा के दिन यमुना ने यमराज को राखी बांधी थी. इससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें अमरता का वरदान दिया था. वहीं, एक अन्य कथा में बताया जात है कि विष्णु जी को पुन: प्राप्त करने के लिए माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधी थी. सत्युग की एक कथा है, जिसमें इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने देवताओ की रक्षा के लिए देवराज इंद्र को राखी बांधी थी.
रक्षाबंधन का ऐतिहासिक संबंध
रानी कर्णावती ने हुमायू को राखी भेजी थी. ऐतिहासिक कथाओं में बताया जाता है कि चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने संकट के समय में मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा के लिए गुहार लगाई थी. वहीं, एक कथा के अनुसार, वर्णन मिलता है कि राजा पोरस के साथ युद्ध के दौरान सिकंदर की पत्नी ने उन्हें राखी बांध भाई बनाया था.
राखी का महत्व
धार्मिक दृष्टि से रक्षा सूत्र को सकारात्मक ऊर्जा और मंगल का प्रतीक माना जाता है. राखी बांधते समय बहन अपने भाई के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है. वहीं, भाई बहन के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लेते हैं. इसलिए, रक्षाबंधन को सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं बल्कि रिश्तों को मजबूत करने और परिवार में प्रेम एवं विश्वास बढ़ाने वाले पर्व के रूप में मनाया जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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