शिक्षा के बड़े दावों की खुली पोल: राजस्थान में 3700 से ज्यादा स्कूल जर्जर, 96 में पीने का पानी तक नहीं
Rajasthan Government Schools: राजस्थान में सराकरी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर ताजा आंकड़ा सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्ता की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेस में सैकड़ों ऐसे सरकारी विद्यालय हैं, जिसके पास अपना भवन तक नहीं है. वहीं हजारों स्कूलों में शौचालय और पीने के पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब शिक्षा गुणवत्ता और बुनियादी ढ़ाचे को मजबूत बनाने को लेकर लगातार दावे किए जा रहे हैं.
611 सरकारी स्कूलों के पास नहीं है अपना भवन
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि वर्ष 2025-26 के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) और समग्र शिक्षा अभियान के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है. इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं. इन स्कूलों का संचालन अस्थायी भवनों, किराए के स्थानों या अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से किया जा रहा है. राजधानी जयपुर में भी स्थिति चिंताजनक है। यहां 38 सरकारी स्कूल बिना अपने भवन के संचालित हो रहे हैं. जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो झालावाड़ जिले का अकलेरा ब्लॉक सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 23 स्कूलों के पास भवन नहीं है. इसके अलावा खानपुर क्षेत्र में 16, झालरापाटन में 11, फलोदी के बाप क्षेत्र में 11 तथा बांसवाड़ा के छोटीसर्वन में 10 स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं.
2,047 स्कूलों में नहीं है शौचलय की सुविधा
बालिका शिक्षा को लेकर भी स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है. सरकार के अनुसार भवनविहीन 611 स्कूलों में 10 बालिका विद्यालय शामिल हैं. जयपुर और अलवर में दो-दो बालिका स्कूल बिना भवन के हैं, जबकि बाड़मेर, चूरू, डूंगरपुर, करौली, कोटा और राजसमंद में एक-एक बालिका विद्यालय अपने भवन के बिना संचालित हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित और पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं की कमी का सीधा असर छात्राओं की शिक्षा पर पड़ सकता है. सिर्फ भवनों की कमी ही नहीं, बल्कि अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी सामने आया है. प्रदेश के 64 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में से 2,047 स्कूल ऐसे हैं, जहां शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है. वहीं 1,049 स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अधिक गंभीर दिखाई देती है.
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96 स्कूलों में नहीं है पीने के पानी की व्यवस्था
शौचालय की सुविधा नहीं होने के मामले में बांसवाड़ा जिला सबसे पीछे है, जहां 188 स्कूलों में यह सुविधा नहीं है. इसके बाद डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्रों को शौचालय उपलब्ध नहीं है. दूसरी ओर पीने के पानी की समस्या दौसा जिले में सबसे अधिक है, जहां 96 स्कूलों में पानी की व्यवस्था नहीं है. उदयपुर, अलवर, करौली और बांसवाड़ा भी इस सूची में शामिल हैं. इसी बीच सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों की ओर से भी निरीक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं. हाल ही में एक टीम ने जयपुर के पास बगरू क्षेत्र में स्थित एक स्कूल का दौरा करने का प्रयास किया था, जहां आरोप था कि विद्यालय का संचालन अस्थायी स्थान से किया जा रहा है. बताया गया कि पुराने भवन को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद छात्रों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया था। इससे यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया कि जर्जर स्कूल भवन छात्रों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकते हैं.
3,768 सरकारी स्कूल पूरी तरह जर्जर
विपक्ष ने सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाए हैं. नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने दावा किया कि राज्य में 3,768 सरकारी स्कूल पूरी तरह जर्जर हैं और उन्हें उपयोग के लिए असुरक्षित घोषित किया जा चुका है.उनके अनुसार ऐसे स्कूलों को बंद करने या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने से छात्रों के नामांकन पर भी असर पड़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों के 83,783 कमरे जर्जर स्थिति में हैं और तत्काल सुधार की आवश्यकता है. राजस्थान के सरकारी स्कूलों की यह तस्वीर बताती है कि शिक्षा के क्षेत्र में केवल योजनाएं और घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है. सुरक्षित भवन, स्वच्छ शौचालय और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं छात्रों के बेहतर भविष्य की आधारशिला होती हैं. ऐसे में राज्य के शिक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाना समय की मांग है.
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राज्य सरकार ने स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए कई योजनाओं का उल्लेख किया है. सरकार के अनुसार बजट में स्कूल भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा भवनविहीन और जर्जर स्कूलों के लिए नए भवन निर्माण हेतु 450 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किए गए हैं. सरकार का कहना है कि प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के स्कूलों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए हर वर्ष लगभग 2,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे. अगले पांच वर्षों में इस पर कुल 12,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है. इन कार्यों के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT), समग्र शिक्षा अभियान, राज्य निधि, सांसद और विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि, SDRF तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) जैसे विभिन्न स्रोतों से वित्तीय सहायता ली जा रही है.
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