तमिलनाडु सरकार ने नवजात शिशुओं के लिए ‘थाई मामन स्वर्ण अंगूठी योजना’ के तहत सोने की अंगूठियां खरीदने के वास्ते दो आभूषण कंपनियों को कार्यादेश जारी किया है। सरकार ने यह जानकारी दी। यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई की जयंती के अवसर पर 15 सितंबर को शुरू की जाएगी।
सरकार ने शुक्रवार देर रात बताया कि तमिलनाडु चिकित्सा सेवा निगम (टीएनएमएससी) ने जून से सितंबर तक के लाभार्थियों के लिए आवश्यक सोने की 1,28,499 अंगूठियों की आपूर्ति के वास्ते जॉय अलुक्कास और कल्याण ज्वैलर्स को 70:30 के अनुपात में कार्यादेश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना की घोषणा की थी। इसका लाभ सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए शिशुओं को मिलेगा ताकि सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रसव को प्रोत्साहित किया जा सके।
सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘एक ग्राम वजन की सोने की 4,41,667 अंगूठियां उपलब्ध कराने के शासकीय आदेश के बाद तमिलनाडु चिकित्सा सेवा निगम ने 14 जुलाई को निविदा जारी की थी। इसमें 11 कंपनियों ने हिस्सा लिया और ‘टीएन टेंडर्स’ पोर्टल के जरिए अपनी कीमतों का ब्योरा दिया।’’
विज्ञप्ति के अनुसार, जॉय अलुक्कास ने एक ग्राम सोने की कीमत को छोड़कर प्रसंस्करण शुल्क, बीमा, परिवहन और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की मुहर लगाने सहित सभी अतिरिक्त शुल्क के लिए सबसे कम 0.01 रुपये की बोली लगाई। तमिलनाडु गैर-प्रकटीकरण समझौता अधिनियम और नियमों के तहत कल्याण ज्वैलर्स ने भी सबसे कम कीमत की बोली प्रस्तुत की।
विज्ञप्ति में कहा गया कि योजना 15 सितंबर 2026 को शुरू की जानी है, इसलिए जून से चार महीने के दौरान लाभार्थियों को सोने की 1,28,499 अंगूठियां उपलब्ध कराने के लिए जॉय अलुक्कास और कल्याण ज्वैलर्स को 70:30 के अनुपात में कार्यादेश जारी किया गया है। सरकारी अस्पतालों में 22 जून 2026 से जन्म लेने वाले बच्चों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
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शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ 'आरक्षण सुधार आंदोलन' के तहत बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में राष्ट्रीय स्तर पर कई संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के इक्विटी नियमों का विरोध करने वाले लोग एकत्र हुए। हाथों में पोस्टर और भगवा झंडे लिए प्रदर्शनकारियों ने 'गरीबों के लिए आरक्षण, जाति के लिए नहीं' के नारे लगाए और सरकार से मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की अपील की। ज़्यादातर पुरुष प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के इक्विटी नियमों का भी विरोध किया। इंडिया टुडे ने इस बड़े आंदोलन की रिपोर्टिंग करने वाले शुरुआती मीडिया संस्थानों में से एक था।
नारे लगाते हुए, प्लेकार्ड और भगवा झंडे लिए प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि छात्रों को जाति के बजाय उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर शिक्षा, कोचिंग और अन्य ज़रूरतों के लिए सरकारी मदद दी जानी चाहिए। 'गरीबों के लिए आरक्षण, जाति के लिए नहीं' उनके द्वारा लगाए गए नारों में से एक था।
प्रदर्शनकारियों ने SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट का भी विरोध किया और इसे रद्द करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि इसके फ़ायदे हमेशा समाज के सबसे वंचित वर्गों तक नहीं पहुँचते और इसका इस्तेमाल व्यक्तियों के ख़िलाफ़ गलत तरीके से नहीं किया जाना चाहिए, साथ ही सरकार से इस संबंध में ज़रूरी कदम उठाने का आग्रह किया।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में 'क्रीमी-लेयर' का नियम लागू करने और अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों से संबंधित नीतियों में बदलाव की भी मांग की।
एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया, "हम यह नहीं कह रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को बिना मदद के छोड़ दिया जाए। हम कह रहे हैं कि मदद उन लोगों तक पहुँचनी चाहिए जिन्हें इसकी ज़रूरत है, जिसमें स्कॉलरशिप, फ़ीस में मदद और कोचिंग शामिल है।"
कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण लागू होने के कई दशकों बाद भी इसके प्रावधानों के जारी रहने पर सवाल उठाए और मौजूदा सामाजिक-आर्थिक हालात को देखते हुए नीति की समीक्षा की मांग की। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "हालात काफ़ी बदल गए हैं। इस बात पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए कि क्या मौजूदा ढांचे की समीक्षा की ज़रूरत है और बिना भेदभाव के आर्थिक रूप से पिछड़ेपन की समस्या को कैसे दूर किया जा सकता है।"
यह विरोध प्रदर्शन NEET की तैयारी कर रहे हर्ष दुबे के नेतृत्व में 'आरक्षण सुधार आंदोलन' के तहत आयोजित किया गया था। राजस्थान स्थित जनरल सेना और चाणक्य सेना के साथ-साथ करणी सेना भी इस आंदोलन में शामिल हुई, जबकि जंतर-मंतर पर एक बार फिर बैरिकेड्स लगाए गए और भारी पुलिस बल व रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) की तैनाती की गई। आरक्षण और UGC इक्विटी नियमों के मुद्दों पर मुखर रहने वाले इन्फ़्लुएंसर अजीत भारती भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे। इस बीच, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। उनमें से एक ने इंडिया टुडे के सहयोगी चैनल 'यूपी तक' को बताया कि वे "राष्ट्रवादी प्रदर्शनकारी" हैं और हिंसा करने के बजाय अपनी मांगें रखने के लिए इकट्ठा हुए हैं।
दिन के आखिर में, दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान मौके की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर छा गए। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर ऐसे किसी भी प्रदर्शन, आंदोलन या जुलूस के लिए कोई इजाज़त नहीं दी गई थी। एक अधिकारी ने बताया कि इसके बजाय रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक अधिकतम 500 लोगों के साथ शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) जारी किया गया था।
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