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Bihar STET 2026: शिक्षक बनने का मौका, आवेदन शुरू; 31 अगस्त आखिरी तारीख, जानें योग्यता और फीस

बिहार STET 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के पास आवेदन का मौका है। उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म भरने से पहले सभी जरूरी पात्रता शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है, ताकि बाद में आवेदन निरस्त होने की स्थिति न बने।

Bihar STET 2026 के लिए क्या है योग्यता?
STET में शामिल होने के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक या पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री होनी चाहिए। इसके साथ ही अभ्यर्थी के पास NCTE से मान्यता प्राप्त संस्थान से B.Ed, M.Ed, BA-B.Ed या BSc-B.Ed जैसी निर्धारित शिक्षक शिक्षा योग्यता होनी चाहिए।

उम्मीदवारों को सलाह है कि वे जिस विषय के लिए आवेदन कर रहे हैं, उसके अनुसार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता को आधिकारिक नोटिफिकेशन से जरूर मिलान कर लें।

कितनी होनी चाहिए उम्र?
Bihar STET 2026 में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु सीमा पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 37 वर्ष, जबकि महिला उम्मीदवारों के लिए 40 वर्ष निर्धारित है।

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को बिहार सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी। उम्र की गणना 1 अगस्त 2026 को आधार मानकर की जाएगी।

कितनी है आवेदन फीस?
आवेदन शुल्क अभ्यर्थी की कैटेगरी और पेपर की संख्या के अनुसार अलग-अलग है।

वर्ग            एक पेपर    दोनों पेपर
सामान्य/BC/EWS    ₹960    ₹1,440
SC/ST/PH    ₹760    ₹1,140
आवेदन शुल्क ऑनलाइन माध्यम से जमा किया जा सकता है।

Bihar STET 2026 फॉर्म कैसे भरें?
उम्मीदवार घर बैठे ऑनलाइन आवेदन पूरा कर सकते हैं। इसके लिए ये स्टेप्स फॉलो करें—

  • सबसे पहले STET की आधिकारिक आवेदन वेबसाइट पर जाएं।
  • होम पेज पर “To Register” के सामने दिए “Click Here” विकल्प पर क्लिक करें।
  • मांगी गई जानकारी दर्ज करके अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें।
  • रजिस्ट्रेशन के बाद “Already Registered? To Login” के सामने दिए लिंक पर क्लिक करें।
  • लॉगिन करके आवेदन फॉर्म में मांगी गई अन्य जानकारी भरें।
  • अपनी फोटो और हस्ताक्षर निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।
  • पेपर और कैटेगरी के अनुसार आवेदन शुल्क जमा करें।
  • फॉर्म सबमिट करने के बाद उसकी कॉपी डाउनलोड कर लें।
  • भविष्य में जरूरत के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट सुरक्षित रखें।

31 अगस्त के बाद नहीं मिलेगा आवेदन का मौका
Bihar STET 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इसलिए उम्मीदवारों को आखिरी दिन का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन पूरा कर लेना चाहिए। आवेदन करते समय नाम, जन्मतिथि, शैक्षणिक योग्यता और अन्य विवरण भरने में विशेष सावधानी बरतें।

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डिप्रेशन और तनाव का इलाज अब दवाओं में नहीं, Blue Space Therapy के जरिए पानी में मिल रहा है गहरा सुकून

आजकल युवाओ से लेकर बड़ों में भी मानसिक तनाव देखने को मिल रहा है। दिनभर में फोन में बिजी रहना और खराब लाइफस्टाइल के कारण हर कोई कहीं न कहीं मेंटल हेल्थ से परेशान है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, क मेंटल हेल्थ समझें तो एक मानसिक रुप से सेहतमंद इंसान अपनी क्षमता को जनता है, प्रतिदिन के तनाव को झेल सकता है और प्रोडक्टिविटी के साथ काम भी कर सकता है। 
हालांकि, आजकल लोगों की मानसिक स्थिति दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है, इन दिनों ट्ब्लू स्पेस जैसी थेरेपी भी दवा का कार्य कर रही है। आइए आपको विस्तार से बताते हैं ब्लू स्पेस थेरेपी के बारे में और यह क्या है?

क्या है ब्लू स्पेस थेरेपी? 
मेंटल हेल्थ से संबंधित मामले में डिजिटल दौर में काफी तेजी देखी जा रही है। जबकि इंटरनेट के दौर से पहले न तो किसी ने डिप्रेशन, अकेलेपन और एंग्जाएटी जैसी बीमारियों के नाम सुने भी नहीं थे। अब हर कोई इन नामों को जानने के साथ-साथ इनके बुरे अनुभव से भी परेशान है।  इसलिए आजकल ब्लू स्पेस थेरेपी ट्रेंड में है। इसके नाम से आपको पता चल रहा होगा कि यह ब्लू स्पेस अर्थ पानी से जुड़ी चीजों से हैं, जैसे कि झील, नदी और समंदर।
कुछ रिपोर्ट्स में यह पता चला है कि ब्लू स्पेस के ज्यादा संपर्क में रहने से मेंटल हेल्थ अच्छी रहती है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि तटीय इलाकों में रहने वाले और वहां जाने वाले लोगों में साइकोलॉजिकल डिस्ट्रेस यानी मेंटल हेल्थ से संबंधित परेशानियों कम करती है।

किताब ने भी किया साबित 
दरअसल, साल 2014 में मरीन बायोलॉजिस्ट वालेस जें. निकोलस की किताब ब्लू माइंड थी, इस किताब में यह साबित कर दिया था कि पानी के आसपास रहने से स्ट्रेस हॉर्मोन कोर्टिसोल कम हो जाता है और व्यक्ति खुद को लेकर पॉजिटिव महसूस करता है।

पानी के अंदर थेरेपी
खासकर ब्लू स्पेस थेरेपी पानी के आसपास रहने से दिखने वाले सकारात्मक बदलावों की बात करती है, लेकिन इसके फायदों को देखते हुए पानी के अंदर भी इस थेरेपी को दिया जाने लगा है। वहीं, विदेशों में डिप्रेशन, ट्रॉमा और नशे की लत जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए स्कूबा और फ्री-डाइविंग, वेटलेसनेस के अनुभव, ब्रीदवर्क के साथ मेडिटेशन जैसी थेरेपी लोगों को दी जाती हैं। वहीं, सबसे खास एहसास वेटलेसनेस का है, जो कि नर्वस और ब्रेन सिस्टम को दोबारा से रेगुलेट करने में काफी सहायक साबित होता है। 

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