Kids Meal Plan: 2-3 साल के बच्चों के लिए बनाएं 7 दिन का हेल्दी मील प्लान, खाने में शामिल करें ये चीजें
Kids Meal Plan: 2-3 साल की उम्र में बच्चे तेजी से बढ़ते हैं और इस दौरान उन्हें अलग-अलग तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। बच्चे की प्लेट में अनाज, दाल, सब्जियां, फल, दही और अन्य पौष्टिक चीजों को उम्र और बच्चे की पसंद के अनुसार शामिल किया जा सकता है। बच्चे के लिए 7 दिनों का यह आसान रूटीन बेहतर विकल्प हो सकता है।
दिन 1: सॉफ्ट इडली और नारियल चटनी
पहले दिन नाश्ते में सॉफ्ट इडली दी जा सकती है। इडली को छोटे और नरम टुकड़ों में काटकर बच्चे को खिलाएं। इसके साथ हल्की नारियल चटनी दी जा सकती है। दोपहर या रात के खाने में दाल-चावल और नरम पकी सब्जियां शामिल करना आसान विकल्प है।
दिन 2: वेज दलिया
दूसरे दिन बच्चे को सब्जियों वाला दलिया खिलाया जा सकता है। दलिया में मूंग दाल, गाजर, मटर और थोड़ी हल्दी डालकर इसे नरम पकाएं। सब्जियों को अच्छी तरह गलाकर दें, ताकि बच्चे को चबाने में परेशानी न हो। जरूरत के अनुसार इसकी कंसिस्टेंसी थोड़ी नरम रखी जा सकती है।
दिन 3: मूंग दाल की खिचड़ी
तीसरे दिन मूंग दाल की खिचड़ी बच्चे के लिए हल्का और आसान भोजन हो सकती है। इसमें चावल, मूंग दाल, गाजर और मटर जैसी सब्जियां डाल सकते हैं। खिचड़ी को अच्छी तरह पकाकर नरम रखें। स्वाद के लिए हल्दी और जीरे का सीमित इस्तेमाल किया जा सकता है।
दिन 4: दही-चावल
चौथे दिन के मील में दही-चावल शामिल कर सकते हैं। नरम पके चावल में ताजा दही मिलाकर बच्चे को खिलाएं। दही बहुत ठंडा न हो और नमक की मात्रा भी कम रखें। अगर बच्चा किसी डेयरी प्रोडक्ट को आसानी से पचा नहीं पाता है, तो उसे देने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
दिन 5: सॉफ्ट वेज उपमा
पांचवें दिन नाश्ते में सब्जियों वाला उपमा दिया जा सकता है। इसमें गाजर, शिमला मिर्च, मटर और धनिया जैसी चीजें शामिल की जा सकती हैं। उपमा को अच्छी तरह पकाकर नरम रखें। बच्चे के लिए इसे कम मसाले और कम तेल में तैयार करें।
दिन 6: केला पैनकेक
छठे दिन नाश्ते में केले से बना सॉफ्ट पैनकेक एक आसान विकल्प हो सकता है। इसे आटे या सूजी और पके केले से तैयार किया जा सकता है। पैनकेक को बहुत ज्यादा मीठा करने की जरूरत नहीं है। इसे नरम रखें और बच्चे को छोटे टुकड़ों में परोसें।
दिन 7: वेज सूजी उपमा
सातवें दिन फिर से वेज सूजी उपमा को मेन्यू में शामिल किया जा सकता है। इसमें गाजर, मटर और थोड़ी सी धनिया डालकर इसे पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है।
बच्चों के लिए खाना बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- खाने में नमक और चीनी सीमित रखें।
- भोजन को बहुत ज्यादा मसालेदार बनाने से बचें।
- बच्चे को खाना हमेशा उसकी उम्र के हिसाब से नरम और छोटे टुकड़ों में दें।
- साबुत मेवे, अंगूर जैसे गोल खाद्य पदार्थ, पॉपकॉर्न या अन्य चोकिंग-रिस्क वाली चीजें बिना उचित तैयारी के न दें।
इसके अलावा बच्चे की डाइट में सिर्फ एक सप्ताह के तय मेन्यू पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग अनाज, दालें, सब्जियां, फल और प्रोटीन स्रोतों को बदल-बदलकर शामिल करना बेहतर है।
(Disclaimer): यह एक सामान्य मील-प्लान आइडिया है। हर बच्चे की भूख, एलर्जी, पाचन और पोषण की जरूरत अलग हो सकती है। किसी बच्चे को एलर्जी, वजन से जुड़ी समस्या या अन्य विशेष डाइट की जरूरत हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य डाइटीशियन की सलाह लें।
यह भी पढ़ें: वजन घटाने के लिए रोज वॉक करें या 30 मिनट एक्सरसाइज? जानिए क्या है ज्यादा असरदार
Pomegranate Side Effects: अनार हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं! इन हेल्थ कंडीशन में हो सकता है नुकसान
Pomegranate Side Effects: अनार को सेहत के लिए फायदेमंद फलों में गिना जाता है। इसके दानों में एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि लोग इसे डाइट में शामिल करना पसंद करते हैं। लेकिन क्या अनार हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित है? जरूरी नहीं। कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों में अनार या इसका जूस सीमित मात्रा में लेने की सलाह दी जा सकती है और कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह जरूरी हो सकती है।
खासकर किडनी की बीमारी, ब्लड शुगर की समस्या, लो ब्लड प्रेशर या किसी खास दवा का सेवन करने वाले लोगों को अनार को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों को किसी फल से एलर्जी है, उन्हें अनार खाने के बाद होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं किन हेल्थ कंडीशन में अनार खाने से पहले सावधानी जरूरी है।
किडनी की बीमारी में बरतें सावधानी
किडनी शरीर में पोटैशियम समेत कई इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर कुछ लोगों को पोटैशियम का सेवन सीमित करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अनार को डाइट में शामिल करने की मात्रा व्यक्ति की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर कर सकती है। किडनी रोगियों को नियमित रूप से ज्यादा मात्रा में अनार या इसका जूस लेने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
डायबिटीज में जूस से रहें सावधान
अनार एक पौष्टिक फल है, लेकिन इसमें प्राकृतिक शर्करा भी होती है। डायबिटीज वाले लोगों के लिए फल की मात्रा और पूरी डाइट का संतुलन महत्वपूर्ण होता है। खासकर अनार का जूस पीते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि जूस में फाइबर कम हो सकता है और एक बार में ज्यादा मात्रा में शुगर का सेवन हो सकता है। इसलिए बिना चीनी वाला जूस भी जरूरत से ज्यादा पीने से बचें और मात्रा को लेकर डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
लो ब्लड प्रेशर वालों को भी ध्यान रखना चाहिए
अनार के सेवन को ब्लड प्रेशर पर संभावित प्रभाव से जोड़कर देखा गया है। अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर पहले से कम रहता है या वह ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाएं ले रहा है, तो बड़ी मात्रा में अनार या अनार का जूस लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। चक्कर, कमजोरी या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण नजर आएं तो इसे नजरअंदाज न करें।
एलर्जी होने पर तुरंत रोकें सेवन
अनार से एलर्जी दुर्लभ हो सकती है, लेकिन संभव है। कुछ लोगों में किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी होने पर खुजली, मुंह या गले में असहजता, सूजन, त्वचा पर लाल चकत्ते या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो अनार खाना तुरंत बंद करें। सांस लेने में परेशानी या तेजी से बढ़ती सूजन जैसी गंभीर प्रतिक्रिया में तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।
दवाएं लेने वाले लोग डॉक्टर से पूछें
अगर आप नियमित रूप से कोई प्रिस्क्रिप्शन दवा लेते हैं, तो रोजाना बड़ी मात्रा में अनार या इसका जूस शुरू करने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है। खासकर ऐसी दवाओं के मामले में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है जिनका असर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर या रक्तस्राव से जुड़ा हो।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए [haribhoomi.com] के साथ।
लेखक: (कीर्ति)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi







