Dal Makhani Recipe: ढाबे वाली दाल मखनी घर पर करें तैयार, मेहमान खाएंगे तो जमकर करेंगे तारीफ
Dal Makhani Recipe: ढाबे पर मिलने वाली दाल मखनी का स्वाद आखिर किसे पसंद नहीं होता? दाल की मलाईदार ग्रेवी, मक्खन की खुशबू और ऊपर से क्रीम का हल्का स्वाद इसे बेहद खास बना देता है। अगर आप भी घर पर ऐसी ही रिच और स्वादिष्ट दाल मखनी बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत या महंगे सामान की जरूरत नहीं है। बस कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप अपनी रसोई में ढाबे जैसा स्वाद ला सकते हैं।
दाल मखनी की असली खासियत इसका धीमी आंच पर पकना है। जब उड़द दाल और राजमा अच्छी तरह गलकर मसालों के साथ पकते हैं, तो दाल का टेक्सचर बेहद क्रीमी हो जाता है। इसमें मक्खन और क्रीम का सही इस्तेमाल स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है। आइए जानते हैं घर पर ढाबे जैसी दाल मखनी बनाने का आसान तरीका।
दाल मखनी बनाने के लिए सामग्री
- 1 कप साबुत उड़द दाल
- 1/4 कप राजमा
- 2 बड़े चम्मच मक्खन
- 1 बड़ा चम्मच तेल
- 2 टमाटर की प्यूरी
- 1 प्याज बारीक कटा हुआ
- 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
- 1/2 छोटा चम्मच हल्दी
- 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
- 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला
- 2-3 बड़े चम्मच फ्रेश क्रीम
- नमक स्वादानुसार
- हरा धनिया सजाने के लिए
ढाबा स्टाइल दाल मखनी बनाने का तरीका
सबसे पहले दाल और राजमा भिगोएं
उड़द दाल और राजमा को अच्छी तरह धोकर कम से कम 7-8 घंटे या रातभर पानी में भिगो दें। इससे दोनों चीजें आसानी से गलेंगी और दाल का टेक्सचर भी ज्यादा क्रीमी बनेगा। सुबह पानी निकालकर इन्हें दोबारा धो लें।
कुकर में अच्छी तरह गलाएं
भीगी हुई दाल और राजमा को प्रेशर कुकर में डालें। इसमें पानी, थोड़ा नमक और हल्दी डालकर अच्छी तरह पकाएं। दाल और राजमा इतने नरम होने चाहिए कि उन्हें चम्मच से आसानी से मैश किया जा सके। यही दाल मखनी को रेस्टोरेंट जैसा टेक्सचर देने का पहला जरूरी स्टेप है।
मसाले का तड़का लगाएं
अब एक गहरी कड़ाही में तेल और मक्खन गर्म करें। इसमें बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और कुछ सेकंड पकाएं। अब टमाटर की प्यूरी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालकर मसाले को तब तक भूनें, जब तक तेल अलग दिखाई देने लगे।
धीमी आंच पर पकाना है जरूरी
अब उबली हुई दाल और राजमा मसाले में डालकर अच्छी तरह मिलाएं। जरूरत के अनुसार थोड़ा गर्म पानी डालें और दाल को धीमी आंच पर पकने दें। बीच-बीच में इसे चलाते रहें। करीब 15-20 मिनट तक धीमी आंच पर पकाने से दाल गाढ़ी और क्रीमी होने लगेगी। इसी धीमी पकाई से इसमें ढाबे जैसा गहरा स्वाद आता है।
मक्खन और क्रीम से बढ़ाएं स्वाद
आखिर में गरम मसाला और मक्खन डालें। इसके बाद फ्रेश क्रीम मिलाकर 2-3 मिनट और पकाएं। ध्यान रखें कि क्रीम डालने के बाद दाल को बहुत तेज आंच पर न पकाएं। ऊपर से हरा धनिया और थोड़ा मक्खन डालकर सर्व करें।
ढाबे जैसा स्वाद पाने की खास ट्रिक
अगर आप दाल में हल्का स्मोकी फ्लेवर चाहते हैं, तो कोयले का छोटा टुकड़ा गर्म करके कटोरी में रखें और उस पर थोड़ा घी डालकर कटोरी को दाल के बीच रख दें। कुछ मिनट ढककर रखने से दाल में हल्की धुएं की खुशबू आ जाएगी। इसे नान, तंदूरी रोटी, जीरा राइस या बटर नान के साथ परोसें। मेहमानों के सामने सर्व करेंगे तो स्वाद की तारीफ जरूर मिलेगी।
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लेखक: (कीर्ति)
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अगर छोटी-छोटी बातों पर बार-बार झगड़ा हो रहा है, तो जरूरी नहीं कि रिश्ते में प्यार खत्म हो गया हो। कई बार असली वजह संवाद की कमी, अनकही अपेक्षाएं या तनाव होती है। ऐसे में एक-दूसरे की बात ध्यान से सुनना, गुस्से में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना और समस्या पर मिलकर काम करना रिश्ते को बेहतर बना सकता है।
बहस में 'तुम हमेशा' और 'तुम कभी नहीं' से बचें
किसी बात पर नाराजगी हो तो आरोप लगाने के बजाय अपनी भावनाओं को स्पष्ट करें। 'तुम कभी मेरी बात नहीं समझते' कहने की जगह 'मुझे ऐसा महसूस होता है कि मेरी बात सुनी नहीं जा रही' कहना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। 'मैं' वाले वाक्यों से बातचीत में आरोप का भाव कम होता है और सामने वाला अपनी बात रखने के लिए ज्यादा सहज महसूस कर सकता है।
जवाब देने से पहले पार्टनर की बात सुनें
कई बार हम सामने वाले की बात पूरी होने से पहले ही अपना जवाब सोचने लगते हैं। इससे गलतफहमी बढ़ सकती है। पार्टनर जब अपनी परेशानी बता रहा हो, तो बीच में टोके बिना उसकी बात सुनें। जरूरत हो तो पूछें कि "क्या तुम कहना चाह रहे हो कि...?" इससे सामने वाले को महसूस होता है कि उसकी बात को गंभीरता से लिया जा रहा है।
गुस्सा बहुत ज्यादा हो तो बातचीत रोक दें
बहस के दौरान भावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ जाएं तो उसी समय फैसला लेने या तीखी बातें करने से बचना बेहतर है। कुछ समय शांत होने के लिए लिया जा सकता है और फिर बातचीत दोबारा शुरू की जा सकती है। ध्यान रहे कि यह दूरी समस्या से भागने के लिए नहीं, बल्कि शांत होकर बात करने के लिए होनी चाहिए।
पुरानी गलतियों की पूरी फाइल न खोलें
आज की समस्या पर बात करते समय कई साल पुरानी गलतियां गिनाने से बहस और लंबी हो सकती है। एक समय में एक ही मुद्दे पर ध्यान दें। अगर हर बातचीत में पुराने विवाद दोहराए जाएंगे, तो समाधान निकालना मुश्किल हो सकता है। समस्या और व्यक्ति को अलग-अलग देखना रिश्ते में सम्मान बनाए रखने में मदद करता है।
रोज थोड़ा क्वालिटी टाइम निकालें
रिश्ता केवल समस्याओं पर चर्चा करने से मजबूत नहीं होता। साथ बैठकर खाना खाना, टहलना, चाय पीना या कुछ देर बिना मोबाइल के बातचीत करना भी भावनात्मक जुड़ाव बढ़ा सकता है। नियमित रूप से एक-दूसरे की भावनाओं और परेशानियों के बारे में पूछना रिश्ते में दूरी बनने से रोकने में मदद कर सकता है।
छोटी चीजों के लिए शुक्रिया कहना सीखें
पार्टनर के रोजमर्रा के छोटे प्रयासों को नोटिस करें। घर के काम में मदद करने, समय देने या किसी जिम्मेदारी को संभालने के लिए 'धन्यवाद' कहना मामूली बात लग सकती है, लेकिन सकारात्मक संवाद रिश्ते में भरोसे और अपनापन बढ़ाने में मदद करता है।
हर बहस में जीतना जरूरी नहीं
पति-पत्नी का रिश्ता किसी प्रतियोगिता की तरह नहीं है। हर बहस में कौन सही था, यह साबित करने से ज्यादा जरूरी है कि दोनों मिलकर समस्या से कैसे बाहर निकलें। जरूरत पड़ने पर अपनी गलती स्वीकार करना और कुछ मामलों में समझौता करना रिश्ते को कमजोर नहीं, बल्कि परिपक्व बना सकता है। स्वस्थ रिश्ते में लक्ष्य एक-दूसरे को हराना नहीं, बल्कि समस्या को हराना होता है।
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लेखक: (कीर्ति)
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