Sawan Special: बिना प्याज-लहसुन के सब्जी का स्वाद दोगुना करने के लिए अपनाएं ये आसान Kitchen Tips
सावन के महीने में कई लोग धार्मिक मान्यताओं के चलते प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते। इन्हें तामसिक भोजन माना जाता है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि बिना प्याज-लहसुन के सब्जी का स्वाद फीका हो जाता है। लेकिन कुछ आसान किचन टिप्स अपनाकर आप बिना प्याज-लहसुन के भी स्वादिष्ट खाना बना सकती हैं।
सही तड़का देगा बेहतरीन स्वाद
अगर आप सब्जी का स्वाद बढ़ाना चाहती हैं, तो सबसे जरूरी है सही तरीके से तड़का लगाना। सबसे पहले तेल या घी अच्छी तरह गर्म करें। फिर उसमें जीरा डालकर हल्का भूनें। इसके बाद एक चुटकी हींग डालें। चाहें तो राई या सौंफ भी डाल सकती हैं। अब अदरक का पेस्ट और हरी मिर्च डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। आखिर में टमाटर डालें और मसालों के साथ अच्छी तरह पकाएं। इस तरीके से बना तड़का सब्जी का स्वाद कई गुना बढ़ा सकता है।
इन मसालों का करें इस्तेमाल
प्याज-लहसुन की कमी को सही मसालों से आसानी से पूरा किया जा सकता है। घर में पिसा हुआ धनिया पाउडर डालें। काली मिर्च पाउडर स्वाद को और बेहतर बनाता है। गरम मसाला, जीरा पाउडर और कसूरी मेथी का इस्तेमाल करें। ग्रेवी के लिए टमाटर को पीसकर डालें। रंग और स्वाद के लिए लाल मिर्च पाउडर डालें। सब्जी तैयार होने के बाद ऊपर से थोड़ा घी डालने से स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। इसे भी पढ़ें: Sawan 2026: हलवाई जैसा Mini Ghevar घर पर बनाने के 3 आसान Methods, जानें परफेक्ट Recipe
दही और भुनी हुई सब्जियों से आएगा नया स्वाद
अगर आप रोज एक जैसा खाना खाकर बोर हो गए हैं, तो दही का इस्तेमाल करें। पहले सब्जियों को हल्के तेल में भूनकर अलग रख लें। फिर मसाले अच्छी तरह पकने के बाद दही डालें और आखिर में भुनी हुई सब्जियां मिलाएं। इससे सब्जी का स्वाद, टेक्सचर और ग्रेवी तीनों बेहतर हो जाते हैं।
हर सब्जी के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
आलू की सब्जी: सब्जी तैयार होने के बाद थोड़ा अमचूर और कसूरी मेथी डालें। इससे स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ेंगे।
भिंडी: भिंडी बनाते समय कुछ बूंदें नींबू का रस या थोड़ा अमचूर डालें। इससे चिपचिपापन कम होगा और बिना प्याज के भी स्वाद अच्छा रहेगा।
लौकी: लौकी में अदरक और हरी मिर्च थोड़ा ज्यादा डालें। आखिर में ताजा हरा धनिया डालने से स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है।
बैंगन: बैंगन की सब्जी में मूंगफली या तिल का पाउडर और थोड़ी कसूरी मेथी मिलाएं। इससे सब्जी का स्वाद पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो जाएगा। इसे भी पढ़ें: Instant Cooking Tips: बिना झंझट घर पर तैयार करें South Indian Street Food स्टाइल Bun Dosa, बच्चों को भी आएगा पसंद
छोटे बदलाव, बड़ा स्वाद
अगर सही मसाले, सही तड़का और कुछ आसान किचन ट्रिक्स अपनाई जाएं, तो बिना प्याज-लहसुन के भी सब्जी बेहद स्वादिष्ट बन सकती है। सावन के पूरे महीने आप इन आसान टिप्स की मदद से हर दिन अलग और स्वादिष्ट खाना बना सकते हैं।
DU ने नए पीजी सिलेबस से दिल्ली सल्तनत पेपर हटाया:38 प्रस्तावित पेपर्स में से 16 किए शामिल, प्राचीन भारत के कई पेपर भी आउट
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के इतिहास विभाग के पोस्टग्रेजुएट कोर्स के नए सिलेबस को लेकर विवाद शुरू हो गया है। नए सिलेबस में मध्यकालीन भारत के इतिहास से जुड़े कुछ खास विषयों को जगह नहीं मिली है। इनमें दिल्ली सल्तनत पर पढ़ाया जाने वाला प्रमुख पेपर The Delhi Sultanate: Structures of Authority in Medieval North India पेपर भी शामिल है। दिल्ली सल्तनत भारत में 13वीं और 14वीं शताब्दी के शासन को दिखाता है। इसी के पतन के बाद मुगलों का दौर आया था। यह MA History के तीसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जाता था। यह बदलाव 2026-27 के पीजी हिस्ट्री प्रोग्राम से जुड़ा है। फाइनल सिलेबस का नोटिफिकेशन 7 अगस्त को जारी किया गया था। इसमें ये कोर्स शामिल नहीं थे। 2020 में न्यू एजुकेशन पॉलिसी आने के बाद यूनिवर्सिटी ने कई कोर्सेस में बदलाव किए हैं। यह पेपर लंबे समय से छात्रों को मध्यकालीन उत्तर भारत में सत्ता, शासन व्यवस्था और सामाजिक बदलावों को समझने में मदद करता रहा है। इस विषय में मध्यकालीन भारत में राज्य व्यवस्था के विकास, सत्ता के स्वरूप और राजनीतिक व सामाजिक बदलावों का अध्ययन कराया जाता था इसके अलावा उत्तर भारत के इतिहास से जुड़े एक अन्य पेपर को भी तीसरे सेमेस्टर के फाइनल सिलेबस से हटा दिया गया है। विभाग द्वारा प्रस्तावित कई अन्य पेपर भी फाइनल लिस्ट में शामिल नहीं किए गए हैं। सेमेस्टर थर्ड में शामिल न किए जाने वाले 5 मेन पेपर 38 प्रस्तावित पेपर में से 16 को मिली जगह नए सिलेबस में सिर्फ मध्यकालीन इतिहास से जुड़े विषय ही नहीं, बल्कि प्राचीन भारत के कई पेपर भी शामिल नहीं किए गए हैं। इनमें प्राचीन भारत में जेंडर और महिलाओं का इतिहास, प्राचीन भारत में राजनीतिक व्यवस्था और प्राचीन साहित्य में धर्म और समाज जैसे विषय शामिल हैं। कुछ पेपर अभी भी चर्चा के तहत जानकारी के अनुसार, इतिहास विभाग ने कुल 38 DSE (Discipline Specific Elective) पेपर प्रस्तावित किए थे। हालांकि, तीसरे सेमेस्टर के फाइनल सिलेबस में इनमें से केवल 16 पेपर ही रखे गए हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, कई विषय सिलेबस की मंजूरी प्रक्रिया में पास भी हुए थे, लेकिन 7 अगस्त को जारी फाइनल नोटिफिकेशन में उन्हें जगह नहीं मिली। कुछ पेपर अभी भी चर्चा के तहत या चर्चा नहीं हुई की स्थिति में हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह संशोधन पीजी पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क (PGCF 2024) और NEP के अनुरूप किया गया है। इससे पहले 2023 में भी यूनिवर्सिटी ने अंडरग्रेजुएशन छात्रों के कुछ पेपर्स के सिलेबस में बदलाव किया था। ------------ ये खबर भी पढ़ें… SBI में 9124 पदों पर निकली भर्ती: सैलरी 64 हजार के साथ अलाउंस भी मिलेंगे, ग्रेजुएट्स करें अप्लाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 9000 से अधिक पदों पर जूनियर एसोसिएट्स यानी क्लर्क की वैकेंसी निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
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