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गोरखा अंदाज में आई Royal Enfield Classic 350! क्रॉस्ड खुकरी इंसिग्निया के साथ लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स

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अग्निवीरों को फायर सर्विस, जेल विभाग भर्ती में 20% आरक्षण:उम्र सीमा और PET में छूट, CAPF में 50% आरक्षण पहले से घोषित

दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने पूर्व अग्निवीरों को राहत देते हुए दिल्ली सरकार के 2 प्रमुख विभागों में सीधी भर्ती के दौरान 20% आरक्षण देने का फैसला मंजूर कर लिया है। यह निर्णय भारत सरकार की तरफ से पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए बनाई गई नीति के तहत लिया गया है। दिल्ली गृह विभाग ने इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इस फैसले से न केवल युवाओं को सेना से आने के बाद दिल्ली में स्थायी सरकारी नौकरी मिलेगी, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में उम्र सीमा और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में भी विशेष छूट मिलेगी। संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत उपराज्यपाल ने भर्ती नियमों में यह प्रावधान दिया है। संबंधित विभाग तय करेंगे PET में छूट पूर्व अग्निवीरों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में कितनी छूट दी जाएगी, इसका फैसला संबंधित विभाग खुद तय करेंगे। अगर किसी भर्ती में योग्य अग्निवीर पर्याप्त संख्या में नहीं मिलते हैं तो भारत सरकार की हॉरिजॉन्टल आरक्षण गाइडलाइंस के अनुसार उन सीटों को भरा जाएगा। CAPF में 50% आरक्षण की घोषणा पिछले महीने ही केंद्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल (GD) और राइफलमैन (GD) के पदों पर 50% आरक्षण देने की घोषणा की थी। इसके साथ ही कई राज्य सरकारों जैसे हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश ने अपनी पुलिस व अन्य सुरक्षा सेवाओं में भी अग्निवीरों के लिए विशेष आरक्षण और आयु सीमा में छूट की घोषणा की है। गृह मंत्रालय के अनुसार, पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से भी छूट दी जाएगी। यानी उनकी भर्ती प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया गया है। गृह मंत्रालय में बनाया गया 'स्पेशल विंग' पूर्व अग्निवीरों के भविष्य और रोजगार के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने एक्स-अग्निवीर विंग की भी स्थापना की है। यह विंग विभिन्न सुरक्षा बलों में उनकी नियुक्ति और अन्य अवसरों के लिए को ऑर्डिनेशन का काम करेगा। हरियाणा में पूर्व अग्निवीरों के लिए ग्रुप - B में 1%, ग्रुप-C में 5% और पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में 20% आरक्षण का प्रावधान है। कार्यकाल पूरा होने से पहले ही घोषणा 'अग्निपथ योजना' के तहत भर्ती किए गए पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल इस साल के अंत तक पूरा होगा। सरकार ने उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए पहले से ही केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और असम राइफल्स में रोजगार का रास्ता तैयार कर दिया है। ये खबर भी पढ़ें… SBI में 9124 पदों पर निकली भर्ती: सैलरी 64 हजार के साथ अलाउंस भी मिलेंगे, ग्रेजुएट्स करें अप्लाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 9000 से अधिक पदों पर जूनियर एसोसिएट्स यानी क्लर्क की वैकेंसी निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें

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  Sports

Dhananjaya de Silva का खुलासा, Sri Lanka को टेस्ट क्रिकेट में खली 140 Kmph वाले तेज गेंदबाजों की कमी

श्रीलंका की टीम भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में उतरने की तैयारी कर रही है और इसी बीच कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने टीम की तेज गेंदबाजी को लेकर एक अहम कमी की ओर ध्यान दिलाया है। उनका मानना है कि श्रीलंका को ऐसे तेज गेंदबाजों की जरूरत है जो लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंद डाल सकें। मौजूदा समय में टीम के पास इस स्तर की गति वाला केवल एक गेंदबाज है।

धनंजय डी सिल्वा ने कहा कि वह चाहते हैं कि श्रीलंका के पास कम से कम दो या तीन ऐसे तेज गेंदबाज हों, जिनके पास 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति हो। उन्होंने माना कि मौजूदा संसाधनों को देखते हुए असिता फर्नांडो और लाहिरू कुमारा ही टीम के लिए सबसे उपयुक्त जोड़ी हैं।

असिता फर्नांडो पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं। वह करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ अपनी सटीक गेंदबाजी और निरंतरता के लिए पहचाने जाते हैं। वहीं, लाहिरू कुमारा के पास ज्यादा गति है, लेकिन उनका करियर चोटों से प्रभावित रहा है। 36 टेस्ट मैचों में कुमारा ने 106 विकेट लिए हैं और उनका गेंदबाजी औसत 36.38 रहा है।

पहले टेस्ट में भी कुमारा का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा था। गाले में उन्होंने 104 रन देकर दो विकेट हासिल किए थे। इसके बावजूद धनंजय का कहना है कि उपलब्ध विकल्पों में कुमारा ही असिता के साथ सबसे बेहतर तालमेल बनाते हैं।

गौरतलब है कि श्रीलंका के पास दुश्मंथा चमीरा, दिलशान मदुशंका और मतीशा पथिराना जैसे तेज गेंदबाज भी हैं। हालांकि, चमीरा ने अपना पिछला टेस्ट 2021 में खेला था। चोटों के इतिहास और सीमित ओवरों की क्रिकेट में उनकी अहमियत को देखते हुए श्रीलंका ने उन्हें मुख्य रूप से छोटे प्रारूपों के लिए संभालकर रखा है। मदुशंका गाले में टेस्ट टीम का हिस्सा थे, लेकिन घरेलू प्रतियोगिता में खेलने के लिए उन्हें टीम से बाहर किया गया था।

धनंजय ने यह भी कहा कि श्रीलंका के तेज गेंदबाजों में आत्मविश्वास की कमी दिखाई देती है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले 15 वर्षों में श्रीलंका की धरती पर केवल नुवान प्रदीप ने पांच विकेट लेने का कारनामा किया है। उन्होंने 2017 में भारत के खिलाफ छह विकेट लिए थे। इसके मुकाबले विदेशी तेज गेंदबाजों ने श्रीलंका में 14 बार पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लिए हैं।

बता दें कि धनंजय की कप्तानी में श्रीलंका ने घरेलू मुकाबलों में भी दो तेज गेंदबाजों के साथ उतरने की नीति अपनाई है। उनका मानना है कि अगर श्रीलंकाई तेज गेंदबाज घरेलू परिस्थितियों में विकेट लेना सीख जाते हैं तो विदेशों में भी उनका प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। उनका कहना है कि टीम को तेज गेंदबाजी के विकल्प बढ़ाने पर जल्द काम करना होगा और आने वाले समय में ऐसे गेंदबाज तैयार करने होंगे।
Sun, 23 Aug 2026 21:41:00 +0530

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