2026 स्कोडा स्लाविया सेडान का फेसलिफ्ट मॉडल भारत में रिवील:सेगमेंट में पहली बार रियर मसाज सीट्स; 360-डिग्री कैमरा और AI असिस्टेंट जैसे फीचर्स मिलेंगे
स्कोडा इंडिया ने भारत में अपनी प्रीमियम सेडान स्लाविया का फेसलिफ्ट रिवील कर दिया है। अपडेटेड वर्जन को पहले से ज्यादा मॉडर्न डिजाइन, एडवांस्ड फीचर्स और एक नए ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ उतारा गया है। इस कार का सबसे बड़ा और अनोखा हाइलाइट इसके रियर पैसेंजर्स के लिए दी गई मसाज सीट्स हैं, जो इस सेगमेंट की किसी भी गाड़ी में पहली बार दिया गया है। कार में 360-डिग्री कैमरा और AI असिस्टेंट जैसे फीचर भी मिलेंगे। 11 से 18 लाख रुपए के बीच हो सकती है कीमत स्कोडा ने सेडान की कीमतों की घोषणा नहीं की है, लेकिन सितंबर की शुरुआत में खुलासा किया जा सकता है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 11 से 18 लाख रुपए के बीच हो सकती है। स्लाविया को 6 वैरिएंट्स- क्लासिक, क्लासिक प्लस, सिग्नेचर, स्पोर्टलाइन, प्रेस्टीज और मोंटे कार्लो में बेचा जाएगा। कंपनी ने इसकी बुकिंग शुरू कर दी है। एक्सटीरियर: नए अलॉय व्हील्स, कनेक्टेड LED और 10 कलर इंटीरियर: फ्लोटिंग टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम कार के अंदर का लेआउट पुराने मॉडल जैसा ही है, जिसमें केबिन को बड़ा दिखाने के लिए बेज और ब्लैक कलर की डुअल-टोन थीम मिलती है। कंफर्ट और एडवांस्ड फीचर्स नई स्लाविया को प्रीमियम बनाने के लिए स्कोडा ने इसमें कई बेहतरीन फीचर्स जोड़े हैं: परफॉर्मेंस: नया ऑटोमैटिक गियरबॉक्स नई स्लाविया फेसलिफ्ट में पुराने मॉडल वाले ही दो टर्बो-पेट्रोल इंजन के ऑप्शन मिलते हैं, लेकिन छोटे इंजन के साथ अब नया गियरबॉक्स जोड़ा गया है: सेफ्टी फीचर्स: 5-स्टार रेटिंग के साथ 360-डिग्री कैमरा स्कोडा स्लाविया अपनी मजबूत बिल्ड क्वालिटी के लिए जानी जाती है और इसे ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली हुई है।
बटन के आकार की डिवाइस से सेहत पर नजर:स्मार्टवॉच, बैंड व रिंग के बाद अब आ रहीं इंप्लांट होने वाली डिवाइस
वियरेबल डिवाइस का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्टवॉच, स्मार्ट रिंग और स्मार्ट बैंड के बाद अब ऐसे उपकरणों पर काम हो रहा है, जिन्हें शरीर में इंप्लांट किया जा सके। बांह में बटन के आकार का यह डिवाइस लगातार ब्लडप्रेशर, तापमान, दिल की गतिविधि और सेहत से जुड़े दूसरे मानकों की निगरानी कर सकेगा। इन उपकरणों से शरीर में किसी गड़बड़ी का तुरंत पता लगाया जा सकता है। व्यक्तिगत एआई सिस्टम संभावित बीमारी के संकेत मिलने पर इसकी जानकारी सीधे डॉक्टर को भेज सकता है। इससे बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है। वर्तमान में वियरेबल डिवाइस का बाजार कारोबार 4.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। भविष्य में मरीजों को बीमारी की जांच के लिए हर बार अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वियरेबल डिवाइस से जुटाया गया सेहत से जुड़ा डेटा पहले ही डॉक्टर तक पहुंच जाएगा। इससे डॉक्टर मरीज की स्थिति पर दूर से नजर रख सकेंगे और जरूरत के अनुसार जांच या इलाज की सलाह दे सकेंगे। 2009 में फिटबिट ट्रैकर लॉन्च होने के बाद वियरेबल डिवाइस में लोगों की रुचि तेजी से बढ़ी है। वेंचर कैपिटल फर्मों के साथ एपल, सैमसंग और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। टेक्नोलॉजी रिसर्च कंपनी आईडीसी के विश्लेषक जितेश उबरानी के मुताबिक, वियरेबल डिवाइस का अंतिम लक्ष्य हेल्थ सिस्टम का हिस्सा बनना है। इस क्षेत्र में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। स्मार्ट रिंग कंपनी औरा ने पेटेंट उल्लंघन के आरोप में सात प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ मुकदमे किए हैं। कंपनी तीन मामलों में जीत चुकी है, जबकि चार मामले लंबित हैं। एक तिमाही में 80 लाख एपल वॉच बेचने वाली एपल भी कम से कम दो पेटेंट मामलों का सामना कर रही है। कंपनियां अब अस्पतालों और हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ साझेदारी बढ़ा रही हैं। एपल ने हेल्थ डेटा कंपनी एपिक सिस्टम्स के साथ साझेदारी की है। औरा ने लगातार ग्लूकोज मॉनिटर बनाने वाली डेक्सकॉ के साथ गठजोड़ किया है। मई में गूगल ने गूगल हेल्थ पेश किया, जबकि सैमसंग ने पिछले साल जील्थ का अधिग्रहण किया था। मायो क्लिनिक हेल्थ सिस्टम के डॉ. एंड्रयू जैगिम के मुताबिक, वियरेबल डिवाइस की मदद से दुनिया में कहीं भी और किसी भी समय मरीज की निगरानी संभव होगी। इनका इस्तेमाल स्वास्थ्य के अलावा डिजिटल चाबी की तरह भी बढ़ रहा है। एपल वॉच से मैक अपने आप अनलॉक किया जा सकता है। भविष्य में चलने का तरीका, दिल की धड़कन और दूसरे बायोमेट्रिक्स सिस्टम में लॉगिन, इमारतों में प्रवेश और ऑनलाइन खरीदारी की मंजूरी के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। वियरेबल्स अब अधिक सक्रिय भी हो रहे हैं। वे केवल स्वास्थ्य और फिटनेस डेटा को ट्रैक करने के बजाय यह भी बताते हैं कि क्या किया जाए, कब और कैसे एक्सरसाइज करें, कब सोएं और कितना खाएं। इंडस्ट्री एनालिस्ट बेन अर्नोल्ड के अनुसार यहीं पर एपल और गूगल जैसे अधिक स्थापित ब्रांडों को बढ़त मिल सकती है। ये कंपनियां अपने इकोसिस्टम के अन्य उत्पादों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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